- बंग भाषी उन्नयन समिति ने मुख्यमंत्री के नाम बीडीओ को सौंपा ज्ञापन
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जादूगोड़ा : जादूगोड़ा क्षेत्र में मातृ भाषा बांग्ला को संरक्षित और पुनर्जीवित करने की मांग अब तेज होती जा रही है। शुक्रवार को बंग भाषी उन्नयन समिति के एक प्रतिनिधिमंडल ने पोटका प्रखंड कार्यालय पहुंचकर बीडीओ अरुण मुंडा को मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में बांग्ला एकेडमिक के गठन की मांग प्रमुख रूप से उठाई गई, ताकि झारखंड में बांग्ला भाषा को पुनः पहचान मिल सके और स्कूलों में इसकी पढ़ाई दोबारा शुरू हो सके। समिति के सदस्यों ने कहा कि बांग्ला केवल एक भाषा नहीं, बल्कि लाखों लोगों की सांस्कृतिक पहचान है, जिसे बचाना बेहद जरूरी है।
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भाषा के अस्तित्व पर संकट, सरकार से की गई ठोस पहल की मांग
इस दौरान पूर्व जिला परिषद करुणामय मंडल, राज कुमार गुप्ता, सुनील डे और शंकर चंद्र गोप ने चिंता जताते हुए कहा कि झारखंड में बांग्ला भाषा धीरे-धीरे समाप्ति की ओर बढ़ रही है। उन्होंने बताया कि संसाधनों और पाठ्यपुस्तकों की कमी के कारण सरकारी स्कूलों में बांग्ला की पढ़ाई लगभग बंद हो चुकी है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से अपील की कि जल्द से जल्द बांग्ला एकेडमिक का गठन किया जाए, जिससे इस भाषा को नई पहचान और मजबूती मिल सके। उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि समय रहते कदम नहीं उठाया गया, तो आने वाली पीढ़ियां अपनी मातृभाषा और संस्कृति से वंचित हो जाएंगी।
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बीडीओ ने दिया आश्वासन, प्रतिनिधिमंडल में कई गणमान्य शामिल
पोटका बीडीओ अरुण मुंडा ने प्रतिनिधिमंडल की बातों को गंभीरता से सुनते हुए आश्वासन दिया कि यदि इसी तरह प्रयास जारी रहा तो बांग्ला भाषा को निश्चित रूप से पहचान मिलेगी। उन्होंने कहा कि सरकार तक इस मांग को पहुंचाया जाएगा और सकारात्मक पहल की उम्मीद है। इस प्रतिनिधिमंडल में करुणामय मंडल, डॉ. सुंदर लाल दास, सुनील कुमार डे, शंकर चंद्र गोप, मृणाल कांति पाल, राज कुमार गुप्ता, कृष्ण पद मंडल, संजय साहू, प्रतिमा मंडल, शरद चंद दास, तपन मंडल और सुधीर सरदार समेत कई लोग शामिल थे।























