- अष्टम प्रहर हरि कीर्तन में उमड़ी श्रद्धा, ऐतिहासिक स्थल से जुड़ी सामाजिक और राजनीतिक विरासत
जेबी लाइव, रिपोर्टर
चाकुलिया : चाकुलिया प्रखंड के मटियाबांधी पंचायत स्थित बासाड़ीहा गांव इन दिनों भक्ति और श्रद्धा के माहौल में सराबोर है, जहां 24 प्रहर तक चलने वाले अष्टम प्रहर हरि कीर्तन का भव्य आयोजन किया जा रहा है। यह आयोजन पिछले लगभग 150 वर्षों से निरंतर होता आ रहा है और क्षेत्र की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक एकता का प्रतीक बन चुका है। कीर्तन स्थल पर दिन-रात भजन-कीर्तन, पूजा-अर्चना और धार्मिक अनुष्ठानों का क्रम जारी है, जिसमें स्थानीय ग्रामीणों के साथ-साथ आसपास के क्षेत्रों से भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु भाग ले रहे हैं। पूरे गांव में उत्सव जैसा माहौल है और हर घर में भक्ति की धारा प्रवाहित हो रही है।
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150 वर्षों से जारी परंपरा का धार्मिक और सांस्कृतिक महत्व

इस आयोजन से जुड़ी एक विशेष बात यह भी है कि इस पावन स्थल के लिए जमीन का दान घनश्याम महतो की माता स्वर्गीय प्रमिला महतो द्वारा किया गया था। तभी से यह स्थान हर वर्ष इस आयोजन का केंद्र बना हुआ है। ग्रामीणों का मानना है कि इस कीर्तन के आयोजन से गांव में सुख-समृद्धि, शांति और सामाजिक सौहार्द बना रहता है। यह केवल एक धार्मिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि गांव की एकता और परंपरा को सहेजने का माध्यम भी है। आयोजन समिति और ग्रामीण मिलकर पूरे समर्पण के साथ इस कार्यक्रम को सफल बनाने में जुटे हैं।
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दान की भूमि से जुड़ी आस्था और गांव की खुशहाली की मान्यता

बासाड़ीहा का यह ऐतिहासिक स्थल केवल धार्मिक दृष्टि से ही नहीं, बल्कि झारखंड आंदोलन के इतिहास में भी महत्वपूर्ण स्थान रखता है। घनश्याम महतो के अनुसार, झारखंड आंदोलन की शुरुआत भी इसी स्थान से शुबेंदु महतो के नेतृत्व में हुई थी। वर्ष 1984 से यहां राजनीतिक गतिविधियां तेज हुईं और शैलेंद्र महतो सांसद बने थे। तब से इस क्षेत्र की पहचान और मजबूत हुई। घनश्याम महतो स्वयं लंबे समय से सामाजिक और राजनीतिक जीवन में सक्रिय रहे हैं और विभिन्न महत्वपूर्ण पदों पर कार्य करते हुए क्षेत्र के विकास में योगदान देते आए हैं। कार्यक्रम में कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा को और बढ़ा दिया।























