- भारत की आर्थिक नीतियां आत्मनिर्भरता और सुधारों पर आधारित, अमेरिकी दबाव बेअसर साबित होगा
- नया भारत सम्मान चाहता है, आदेश नहीं
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : भाजपा किसान मोर्चा झारखंड प्रदेश के नेता एवं हिन्दू धर्म रक्षा मंच के प्रदेश मंत्री जय प्रकाश पांडेय ने अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप द्वारा भारत पर 500% टैरिफ लगाने की तैयारी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने कहा कि भारत के यशस्वी प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी की रणनीतिक ढाल के सामने अमेरिकी टैरिफ बेअसर साबित होगा। अमेरिका पहले से ही भारत पर लगभग 50% टैरिफ लागू कर चुका है, इसके बावजूद भारत का निर्यात लगातार बढ़ रहा है और आज भारत दुनिया की चौथी सबसे बड़ी आर्थिक शक्ति बन चुका है। भारत की आर्थिक वृद्धि दर दुनिया में सबसे तेज है, जो इस बात का प्रमाण है कि बाहरी दबावों से भारतीय अर्थव्यवस्था प्रभावित नहीं होती। अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन से खुद को अलग कर लिया है, जिससे संकेत मिलता है कि वह जलवायु और व्यापार दोनों मोर्चों पर पीछे हट रहा है।
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भारत की आर्थिक वृद्धि दर दुनिया में सबसे तेज
पांडेय ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी ने सोमनाथ से भारत की आर्थिक समृद्धि का संकेत दिया है। अमेरिकी टैरिफ के बावजूद घरेलू मांग में मजबूती, उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजनाएं और नियमों को सरल बनाकर भारतीय उद्योगों में आत्मविश्वास भरा जा रहा है। मोदी सरकार ने उपभोक्ताओं को राहत देकर सुधारों की गति तेज कर दी है। भारत ने स्पष्ट कर दिया है कि वह बाहरी दबाव के सामने झुकने के बजाय अपनी रणनीतिक स्वायत्तता बनाए रखेगा। यूरोपीय संघ ने भी चेतावनी दी है कि अमेरिका अपनी हितों के लिए किसी भी राष्ट्र को बलि चढ़ा सकता है, जिसका उदाहरण वेनेजुएला और ईरान में देखा जा चुका है। भारत ने साफ कर दिया है कि दबाव की कूटनीति नहीं बल्कि आर्थिक शक्ति ही उसका जवाब होगी।
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मोदी सरकार ने घरेलू मांग को रणनीतिक हथियार बनाया
यदि अमेरिका भारत पर 500% टैरिफ लगाता है तो भारत के पास कई विकल्प पहले से तैयार हैं। इनमें निर्यात बाजारों का विविधीकरण, घरेलू विनिर्माण को आक्रामक समर्थन, व्यापार समझौतों को तेज करना और अमेरिकी निर्भरता कम करना शामिल है। साथ ही भारत विश्व व्यापार संगठन जैसे मंचों पर कानूनी और कूटनीतिक लड़ाई लड़ने के लिए भी तैयार है। पांडेय ने कहा कि अमेरिका की टैरिफ नीति खुद उसके लिए जोखिम भरी है, क्योंकि यूरोपीय संघ और चीन के साथ टकराव वैश्विक मंदी को न्योता दे सकता है। भारत इस पूरे खेल में संतुलन की भूमिका निभा रहा है और उसने दिखा दिया है कि टैरिफ के डर से आर्थिक नीतियां नहीं बदलतीं।
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भारत के पास टैरिफ से निपटने के कई विकल्प तैयार
भारत ने साबित कर दिया है कि उसकी आर्थिक नीतियां दीर्घकालिक सोच पर आधारित हैं। निर्यात का बढ़ना, घरेलू मांग को मजबूत करना और सुधारों में निरंतरता इस बात का गवाह है कि अमेरिका चाहे जितना बड़ा टैरिफ का दीवार खड़ा कर ले, भारत सक्षम है कि उसके ऊपर से अपनी अर्थव्यवस्था का रास्ता निकाल ले। मोदी सरकार ने साफ कर दिया है कि भारत की आर्थिक नीति फोन कॉल से नहीं बल्कि राष्ट्रीय हित से तय होती है। नया भारत सम्मान चाहता है, आदेश नहीं। यही कारण है कि आज भारत आत्मविश्वास के साथ दुनिया के देशों से बराबरी की बात करता है। भारत टैरिफ के मार को झेलने के लिए पूरी तरह तैयार है और उसकी आर्थिक नीतियां तीव्र गति से बढ़ते हुए अपने लक्ष्य को प्राप्त करेंगी।


























