- पोटका में प्रेस वार्ता कर कांग्रेस नेताओं ने मिल प्रबंधन पर लगाए गंभीर आरोप
- धान खरीद में अवैध कटौती का आरोप, किसानों को हो रहा भारी नुकसान
जेबी लाइव, रिपोर्टर
पोटका : पोटका में कांग्रेस पार्टी की ओर से एक प्रेस वार्ता का आयोजन किया गया, जिसमें धान खरीद प्रक्रिया में हो रही कथित अनियमितताओं को लेकर तीखा विरोध दर्ज किया गया। प्रेस वार्ता में कांग्रेस जिला सचिव जयराम हांसदा, वरिष्ठ नेता सुबोध सरदार, आनंद पाल, लालटू दास, किसान चंदन मंडल, सीताराम सोरेन, शंकर दत्त एवं किसान सुधन्या मंडल उपस्थित थे। नेताओं ने आरोप लगाया कि धान खरीद के दौरान नमी के नाम पर किसानों से प्रति क्विंटल 7 से 10 प्रतिशत तक की अवैध कटौती की जा रही है। इसका अर्थ यह है कि किसानों से 7 से 10 किलो धान सीधे काट लिया जा रहा है, जिससे उन्हें गंभीर आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। कांग्रेस जिला सचिव जयराम हांसदा ने कहा कि किंग राइस मिल और धामधूम स्थित शक्ति राइस मिल में किसानों का खुलेआम शोषण किया जा रहा है।
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भुगतान में देरी से किसान परेशान, आंदोलन की चेतावनी
किसान नेता चंदन मंडल ने बताया कि उन्होंने 29 दिसंबर को धान दिया था, लेकिन एक महीने से अधिक समय बीत जाने के बावजूद अब तक न तो भुगतान किया गया है और न ही राशि ऑनलाइन की गई है। लैंप्स में जगह नहीं होने का हवाला देकर किसानों को सीधे मिल में धान पहुंचाने को कहा जा रहा है, जबकि नियमों के अनुसार 48 घंटे के भीतर भुगतान अनिवार्य है। इसके बावजूद न तो धान का समुचित रजिस्ट्रेशन किया जा रहा है और न ही किसानों को समय पर भुगतान मिल रहा है। कांग्रेस नेताओं ने चेतावनी दी कि यदि एक सप्ताह के भीतर धान कटौती और भुगतान प्रक्रिया में सुधार नहीं किया गया तो पार्टी आंदोलन और धरना प्रदर्शन करने को बाध्य होगी।
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प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग, मिल मालिकों ने आरोपों से किया इनकार
वरिष्ठ कांग्रेस नेता सुबोध सरदार ने कहा कि मिल मालिकों द्वारा किसानों का शोषण महाजनी प्रथा की तरह किया जा रहा है। नियमों के अनुसार नमी के नाम पर 2 से 4 किलो तक ही कटौती की जा सकती है, लेकिन यहां 7 प्रतिशत से अधिक कटौती की जा रही है, जिससे पोटका क्षेत्र के किसानों में भारी नाराजगी है। कांग्रेस पार्टी द्वारा जिले के उपायुक्त को पत्र लिखकर अविलंब कार्रवाई की मांग की गई है। वहीं दूसरी ओर दोनों मिल मालिक संतोष अग्रवाल और राजेश कवरा ने धान कटौती के आरोपों से साफ इनकार किया है। उनका कहना है कि धान में नमी या डस्ट पाए जाने पर सरकारी नियमों के अनुसार ही कटौती की जाती है। फिलहाल प्रशासन के हस्तक्षेप का इंतजार है।























