- जमशेदपुर में श्रमिक संगठनों की प्रेस वार्ता, न्यूनतम मजदूरी और अधिकारों की सुरक्षा को लेकर आंदोलन का ऐलान
- मजदूर दिवस पर बड़े आंदोलन की तैयारी तेज
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : जमशेदपुर में विभिन्न श्रमिक संगठनों द्वारा एक संयुक्त प्रेस वार्ता आयोजित कर स्थायी एवं लगातार चलने वाले कार्यों में ठेका प्रथा को समाप्त करने की जोरदार मांग उठाई गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्ष 1991 के बाद से सरकार की मजदूर विरोधी नीतियों के कारण उत्पादन और सेवा से जुड़े स्थायी कार्यों को बड़े पैमाने पर ठेके के माध्यम से कराया जाने लगा है। इससे मजदूरों के अधिकारों का हनन हो रहा है। पहले जहां स्थायी मजदूरों को बेहतर वेतन, आवास, चिकित्सा, शिक्षा और बोनस जैसी सुविधाएं मिलती थीं, वहीं अब ठेका मजदूरों को इन बुनियादी सुविधाओं से वंचित रखा जा रहा है।
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ठेका प्रथा के खिलाफ श्रमिकों की एकजुटता बढ़ी
श्रमिक नेताओं ने बताया कि ठेका मजदूरों के लिए मजदूरी दर का कोई निश्चित मानक नहीं है और कई जगहों पर 8 घंटे से अधिक काम कराने के बावजूद उन्हें उचित भुगतान नहीं मिलता। ओवरटाइम का भुगतान भी नहीं किया जाता, जबकि छुट्टी, बोनस और अन्य सुविधाएं ठेकेदारों की इच्छा पर निर्भर रहती हैं। सबसे गंभीर बात यह है कि इन मजदूरों के पास अपने काम का कोई ठोस प्रमाण नहीं होता, जिससे वे न्यायालय या सरकारी कार्यालयों में अपने अधिकारों के लिए दावा भी प्रस्तुत नहीं कर पाते। गेट पास और पहचान पत्र तक सही तरीके से उपलब्ध नहीं कराए जाते, जिससे उनकी स्थिति और भी असुरक्षित हो जाती है।
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ठेका मजदूरों की समस्याओं पर उठी गंभीर चिंता
इस प्रेस वार्ता में चार प्रमुख श्रमिक संगठनों—झारखंड श्रमिक संघ (JMM), झारखंड असंगठित मजदूर यूनियन (AITUC), झारखंड वर्कर्स यूनियन और सिंहभूम ठेकेदार कामगार यूनियन—ने मिलकर मजदूरों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए संयुक्त आंदोलन की घोषणा की। संगठनों ने मांग की कि स्थायी और निरंतर कार्यों को ठेका के माध्यम से कराना गैरकानूनी घोषित कर इसे दंडनीय अपराध बनाया जाए। इसके अलावा पूरे देश में अकुशल मजदूरों के लिए न्यूनतम मासिक वेतन 25,000 रुपये तय करने की मांग भी की गई। साथ ही मजदूरों को हाजिरी कार्ड, गेट पास और पहचान पत्र देने को कानूनी अधिकार बनाने की बात कही गई।
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श्रमिक संगठनों ने रखी प्रमुख मांगें और सुझाव
प्रेस वार्ता के दौरान मजदूर संगठनों ने सभी श्रमिकों से एकजुट होकर अपने अधिकारों के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। विशेष रूप से जमशेदपुर के नोवोको सीमेंट प्लांट में कार्यरत ठेका मजदूरों का उदाहरण देते हुए बताया गया कि वे अपने अधिकारों के लिए संगठित होकर आंदोलन चला रहे हैं और इस संबंध में उन्होंने झारखंड हाई कोर्ट में मामला भी दायर किया है। यह भी निर्णय लिया गया कि आगामी मजदूर दिवस (1 मई) के अवसर पर सभी संगठन एकजुट होकर अगले चरण के आंदोलन की घोषणा करेंगे। प्रेस वार्ता में शैलेन्द्र मैथी, एस. के. घोषाल, ओम प्रकाश सिंह और नाग राजू सहित कई श्रमिक नेता उपस्थित रहे और मजदूरों के हित में संघर्ष को तेज करने का संकल्प लिया गया।























