प्रदूषण बढ़ने से नहाने-धोने तक में दिक्कत, जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा
जलीय जीवों पर भी दिखने लगा प्रदूषण का असर
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : गुवा क्षेत्र से होकर बहने वाली कारो नदी का पानी इन दिनों गंभीर रूप से प्रदूषित होकर काला पड़ गया है। नदी के पानी की बिगड़ती स्थिति से इसके किनारे बसे गांवों और बस्तियों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कारो नदी लंबे समय से क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत रही है और कई परिवार अपनी दैनिक जरूरतों के लिए इसी नदी पर निर्भर हैं। लेकिन पानी का रंग बदलने और उसमें गंदगी बढ़ने के कारण अब इसका उपयोग करना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का पानी इतना दूषित हो चुका है कि नहाने, कपड़े धोने और अन्य घरेलू कार्यों में भी इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।
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दूषित पानी के कारण ग्रामीणों को दूर-दराज से लाना पड़ रहा पानी
नदी के पानी पर निर्भर रहने वाले परिवारों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिन गांवों में वैकल्पिक जलस्रोत उपलब्ध नहीं हैं, वहां लोगों को पीने और घरेलू उपयोग के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है। इससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की कठिनाइयां और बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गंभीर रूप ले सकता है। लोगों ने प्रशासन से प्रभावित गांवों में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।
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पेयजल संकट से प्रभावित गांवों में वैकल्पिक व्यवस्था की मांग तेज
स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि नदी के प्रदूषित होने का असर जलीय जीव-जंतुओं पर पड़ रहा है। मछलियों सहित अन्य जलीय प्रजातियों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से कारो नदी के पानी की वैज्ञानिक जांच कराने, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने तथा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।























