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Dumaria : खैरबानी-बाँकिशोल का संपर्क प्रभावित, ग्रामीणों ने श्रमदान से फिर बनाया लकड़ी का पुल

  • शंक नदी के तेज बहाव से पुल का पहुंच पथ बहा, स्कूली बच्चों और मरीजों की बढ़ी परेशानी
  • स्थायी पुल निर्माण की मांग, हर बरसात में दोहराती है पुरानी समस्या

जेबी लाइव, रिपोर्टर

डुमरिया : डुमरिया प्रखंड में लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद शंक नदी का जलस्तर बढ़ने से खैरबानी और बाँकिशोल गांव को जोड़ने वाला पुल एक बार फिर ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। नदी में तेज बहाव के कारण पुल के एक छोर का मिट्टीयुक्त पहुंच पथ पूरी तरह कटकर बह गया है। इससे इस मार्ग पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। पुल का रास्ता क्षतिग्रस्त होने से स्कूली बच्चों, मरीजों, बुजुर्गों और आम राहगीरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रखंड कार्यालय, बैंक, बाजार और अस्पताल जाने वाले ग्रामीणों को अब दूसरे रास्ते का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करने के साथ समय और ईंधन भी खर्च करना पड़ रहा है।

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बारिश के बाद पुल का रास्ता कटा, दूसरे मार्ग से जाने को मजबूर ग्रामीण

ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या नई नहीं है। पिछले वर्ष भी बारिश के दौरान पुल के एक हिस्से का मिट्टीयुक्त पहुंच पथ इसी तरह नदी के तेज बहाव में बह गया था। उस समय कई दिनों तक ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल पहल की उम्मीद की, लेकिन समय पर समाधान नहीं होने के कारण ग्रामीणों को खुद आगे आना पड़ा था। उन्होंने श्रमदान कर लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार किया था। इसी अस्थायी रास्ते से ग्रामीणों और स्कूली बच्चों का आवागमन कई दिनों तक जारी रहा। बाद में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान समस्या की ओर गया और पुल के कटे हिस्से में मिट्टी भरकर किसी तरह आवागमन बहाल कराया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश में उन्हें इसी समस्या का सामना करना पड़ता है।

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पिछले साल भी ग्रामीणों ने श्रमदान से बहाल किया था आवागमन

इस बार भी रास्ता कटने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन की पहल का इंतजार करने के बजाय स्वयं मोर्चा संभाल लिया। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह बंद न हो, इसके लिए लोगों ने श्रमदान कर दोबारा लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार कर दिया है। ग्रामीणों की इस पहल से फिलहाल पैदल आवागमन का रास्ता खुल गया है। हालांकि अस्थायी लकड़ी का पुल होने के कारण सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए इस रास्ते से गुजरना जोखिम भरा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में वे हर साल अस्थायी व्यवस्था करते हैं, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।

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बच्चों की पढ़ाई न रुके, इसलिए ग्रामीणों ने फिर संभाली कमान

खैरबानी पंचायत के मुखिया सुरेंद्रनाथ हेम्ब्रम ने बताया कि पुल के पहुंच पथ के कट जाने की जानकारी संज्ञान में ली गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही कटे हुए हिस्से में मिट्टी भरकर आवागमन सुचारु कराने का प्रयास किया जाएगा। मुखिया के अनुसार, नए पुल के निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थायी पुल का निर्माण समय पर हो जाता है तो हर वर्ष बारिश के दौरान उत्पन्न होने वाली समस्या से छुटकारा मिल सकता है। फिलहाल लोग अस्थायी लकड़ी के पुल के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं।

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नए पुल का टेंडर पूरा, निर्माण शुरू होने का ग्रामीणों को इंतजार

बारिश के मौसम में हर वर्ष पहुंच पथ के कटने की समस्या ने ग्रामीणों के सामने स्थायी समाधान की जरूरत को उजागर कर दिया है। पुल क्षतिग्रस्त होने से सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की आवाजाही और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि कटे हुए पहुंच पथ की तत्काल मरम्मत कराने के साथ नए पुल का निर्माण जल्द शुरू कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि हर बरसात में लकड़ी का अस्थायी पुल बनाना किसी स्थायी व्यवस्था का विकल्प नहीं हो सकता। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नए पुल का निर्माण कब शुरू होता है और खैरबानी-बाँकिशोल के ग्रामीणों को कब सुरक्षित एवं स्थायी आवागमन की सुविधा मिलती है।

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Ranchi : रांची में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा क्षतिग्रस्त करने का आरोप, भाजपा ने दर्ज कराई FIR

हरमू में प्रतिमा पर कालिख पोतने और नुकसान पहुंचाने का आरोप, पुलिस से दोषियों की गिरफ्तारी की मांग प्रतिमा की

  • हरमू में प्रतिमा पर कालिख पोतने और नुकसान पहुंचाने का आरोप, पुलिस से दोषियों की गिरफ्तारी की मांग
  • प्रतिमा की सुरक्षा और दोषियों पर कार्रवाई की उठी मांग

जेबी लाइव, रिपोर्टर

रांची : हरमू स्थित डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की प्रतिमा को कथित रूप से क्षतिग्रस्त करने और चेहरे पर कालिख पोतने का मामला सामने आया है। घटना के बाद भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं ने विरोध जताते हुए सोमवार को अरगोड़ा थाना पहुंचकर अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई। पार्टी प्रतिनिधिमंडल ने पुलिस से मामले की गंभीरता से जांच कर आरोपियों की जल्द पहचान और गिरफ्तारी की मांग की। प्रतिनिधिमंडल में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष दीपक प्रकाश, प्रदेश उपाध्यक्ष राकेश प्रसाद व बालमुकुंद सहाय, प्रदेश महामंत्री गणेश मिश्रा और विधायक नवीन जायसवाल समेत अन्य नेता शामिल रहे।

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अरगोड़ा थाने पहुंचा भाजपा प्रतिनिधिमंडल, कार्रवाई की मांग

भाजपा नेताओं ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी पार्टी के प्रमुख प्रेरणास्रोतों में रहे हैं और उनकी प्रतिमा के साथ कथित छेड़छाड़ गंभीर मामला है। पुलिस से घटना से जुड़े सभी पहलुओं की जांच करने तथा दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, भाजपा की ओर से प्रतिमा की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग भी उठाई गई है। पुलिस मामले की जांच में जुटी है और आरोपियों की पहचान की जा रही है।

Ranchi : SIR पर JMM का विरोध तेज, 24 जिला मुख्यालयों पर CEC का पुतला दहन

झामुमो ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग चुनाव आयोग ने

  • झामुमो ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने की मांग
  • चुनाव आयोग ने फैसलों पर सर्वसम्मति की बात कही

जेबी लाइव, रिपोर्टर

रांची : विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर झारखंड में राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली के विरोध में 28 सितंबर को राज्य के सभी 24 जिला मुख्यालयों पर प्रदर्शन और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला दहन करने का कार्यक्रम आयोजित किया। पार्टी के केंद्रीय महासचिव विनोद कुमार पांडेय ने कहा कि इस कार्यक्रम के जरिए JMM अपनी आपत्तियां दर्ज कराएगी और मुख्य चुनाव आयुक्त को पद से हटाने की मांग उठाएगी। पार्टी ने राष्ट्रपति से भी इस संबंध में कार्रवाई की मांग करने की बात कही है।

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JMM ने SIR प्रक्रिया और मतदाता सूची को लेकर उठाए सवाल

झामुमो का कहना है कि SIR और चुनाव आयोग की आंतरिक कार्यप्रणाली को लेकर सामने आई रिपोर्टों के बाद पारदर्शिता और प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठे हैं। पार्टी ने दावा किया है कि दो अन्य चुनाव आयुक्तों ने कुछ निर्णयों पर लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। वहीं, चुनाव आयोग की ओर से कहा गया है कि SIR समेत महत्वपूर्ण फैसले तीनों चुनाव आयुक्तों की मंजूरी से लिए गए। इस बीच JMM ने मामले को लेकर अपना विरोध जारी रखने और मुख्य चुनाव आयुक्त की पद से हटाने की मांग राष्ट्रपति के समक्ष रखने की बात कही है।

Chandil : चौकीदार बहाली संघर्ष मोर्चा का गठन, जल्द प्रक्रिया शुरू नहीं हुई तो आंदोलन

30 सितंबर की हाई कोर्ट सुनवाई पर अभ्यर्थियों की नजर, 357 पदों की भर्ती लंबे समय से अटकी 30 सितंबर

  • 30 सितंबर की हाई कोर्ट सुनवाई पर अभ्यर्थियों की नजर, 357 पदों की भर्ती लंबे समय से अटकी
  • 30 सितंबर की सुनवाई के बाद आंदोलन की रणनीति तय करेंगे अभ्यर्थी

जेबी लाइव, रिपोर्टर

चांडिल : सरायकेला-खरसावां जिले में चौकीदार बहाली प्रक्रिया में हो रही देरी से नाराज अभ्यर्थियों ने एकजुट होकर चौकीदार बहाली संघर्ष मोर्चा का गठन किया है। मोर्चा ने स्पष्ट किया है कि यदि 30 सितंबर को झारखंड हाई कोर्ट में होने वाली सुनवाई के दौरान मामले का ठोस समाधान नहीं होता है, तो अभ्यर्थी आंदोलन का रास्ता अपनाएंगे। जिला प्रशासन ने वर्ष 2024 में चौकीदार के 357 पदों पर नियुक्ति के लिए विज्ञापन जारी किया था। इसके लिए जिलेभर से 15 हजार से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया है। आवेदन प्रक्रिया पूरी होने के बावजूद न्यायालय में मामला लंबित रहने के कारण भर्ती की आगे की प्रक्रिया शुरू नहीं हो सकी है।

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357 पदों पर भर्ती का इंतजार, 15 हजार से अधिक अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में

अभ्यर्थियों का कहना है कि राज्य के कई अन्य जिलों में पुराने अवैतनिक चौकीदारों को लिखित परीक्षा एवं शारीरिक दक्षता परीक्षा में दो अतिरिक्त अंक देने के प्रावधान के तहत नियुक्ति प्रक्रिया पूरी की जा चुकी है। वहीं सरायकेला-खरसावां जिले में पुराने अवैतनिक चौकीदारों की सीधी भर्ती की मांग को लेकर हाई कोर्ट में याचिका लंबित है। लगातार अगली तारीख मिलने के कारण मामले का अंतिम निस्तारण नहीं हो पा रहा है। अभ्यर्थियों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में लगातार हो रही देरी से वे मानसिक और आर्थिक परेशानी का सामना कर रहे हैं। उनका कहना है कि लंबे समय से नियुक्ति का इंतजार कर रहे युवाओं के भविष्य को लेकर जल्द निर्णय जरूरी है।

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हाई कोर्ट में लंबित याचिका के कारण रुकी बहाली प्रक्रिया

चौकीदार बहाली संघर्ष मोर्चा ने मांग की है कि अन्य जिलों की तरह सरायकेला-खरसावां में भी मामले की शीघ्र सुनवाई कर इसका निष्पादन किया जाए और नियुक्ति प्रक्रिया को जल्द आगे बढ़ाया जाए। मोर्चा के अनुसार, अभ्यर्थी लंबे समय से भर्ती प्रक्रिया शुरू होने की प्रतीक्षा कर रहे हैं। 30 सितंबर की सुनवाई को लेकर अभ्यर्थियों में उम्मीद बनी हुई है। उनका कहना है कि यदि सुनवाई के बाद भी कोई ठोस निर्णय नहीं होता है और बहाली प्रक्रिया शुरू नहीं की जाती है, तो अभ्यर्थी सड़क पर उतरकर आंदोलन करेंगे। मोर्चा ने कहा कि जरूरत पड़ने पर आंदोलन को चरणबद्ध तरीके से तेज किया जाएगा।

Gua : कारो नदी का पानी हुआ काला, ग्रामीणों के सामने गहराया जल संकट

प्रदूषण बढ़ने से नहाने-धोने तक में दिक्कत, जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा जलीय जीवों पर भी दिखने लगा

  • प्रदूषण बढ़ने से नहाने-धोने तक में दिक्कत, जलीय जीवों के अस्तित्व पर भी खतरा
  • जलीय जीवों पर भी दिखने लगा प्रदूषण का असर

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : गुवा क्षेत्र से होकर बहने वाली कारो नदी का पानी इन दिनों गंभीर रूप से प्रदूषित होकर काला पड़ गया है। नदी के पानी की बिगड़ती स्थिति से इसके किनारे बसे गांवों और बस्तियों के लोगों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार कारो नदी लंबे समय से क्षेत्र के लोगों के लिए महत्वपूर्ण जलस्रोत रही है और कई परिवार अपनी दैनिक जरूरतों के लिए इसी नदी पर निर्भर हैं। लेकिन पानी का रंग बदलने और उसमें गंदगी बढ़ने के कारण अब इसका उपयोग करना मुश्किल हो गया है। ग्रामीणों का कहना है कि नदी का पानी इतना दूषित हो चुका है कि नहाने, कपड़े धोने और अन्य घरेलू कार्यों में भी इसका उपयोग नहीं किया जा सकता।

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दूषित पानी के कारण ग्रामीणों को दूर-दराज से लाना पड़ रहा पानी

नदी के पानी पर निर्भर रहने वाले परिवारों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिन गांवों में वैकल्पिक जलस्रोत उपलब्ध नहीं हैं, वहां लोगों को पीने और घरेलू उपयोग के लिए दूर-दराज के क्षेत्रों से पानी लाना पड़ रहा है। इससे महिलाओं, बच्चों और बुजुर्गों की कठिनाइयां और बढ़ गई हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द ही समस्या का समाधान नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में पेयजल संकट और गंभीर रूप ले सकता है। लोगों ने प्रशासन से प्रभावित गांवों में वैकल्पिक पेयजल व्यवस्था सुनिश्चित करने की मांग की है ताकि ग्रामीणों को राहत मिल सके।

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पेयजल संकट से प्रभावित गांवों में वैकल्पिक व्यवस्था की मांग तेज

स्थानीय लोगों ने यह भी बताया कि नदी के प्रदूषित होने का असर जलीय जीव-जंतुओं पर पड़ रहा है। मछलियों सहित अन्य जलीय प्रजातियों के जीवन पर खतरा मंडरा रहा है, जिससे पर्यावरणीय संतुलन प्रभावित होने की आशंका है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से कारो नदी के पानी की वैज्ञानिक जांच कराने, प्रदूषण के स्रोतों की पहचान करने तथा नदी को प्रदूषण मुक्त बनाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। उनका कहना है कि समय रहते प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

Jadugoda : 13 साल बाद 226 पूर्व ठेका मजदूरों को मिली बड़ी राहत, ट्रिब्यूनल कोर्ट ने ढाई करोड़ भुगतान का दिया आदेश

धनबाद ट्रिब्यूनल के फैसले से जश्न का माहौल, यूसिल प्रबंधन को सौंपी जाएगी आदेश की प्रति श्रमिक अधिकारों की लड़ाई

  • धनबाद ट्रिब्यूनल के फैसले से जश्न का माहौल, यूसिल प्रबंधन को सौंपी जाएगी आदेश की प्रति
  • श्रमिक अधिकारों की लड़ाई आगे भी जारी रखने का यूनियन ने किया ऐलान

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जादूगोड़ा : जादूगोड़ा स्थित यूसिल की तुरामडीह यूरेनियम परियोजना के मुख्य गेट पर सोमवार का दिन बादू हुरांग यूरेनियम प्रोजेक्ट के 226 पूर्व ठेका मजदूरों के लिए ऐतिहासिक और खुशी भरा रहा। लगभग 13 वर्षों के लंबे कानूनी संघर्ष के बाद धनबाद ट्रिब्यूनल कोर्ट ने यूसिल की पूर्व ठेका कंपनी गल्फ ऑयल कॉरपोरेशन लिमिटेड को 226 मजदूरों के पक्ष में करीब ढाई करोड़ रुपये का भुगतान करने का आदेश दिया है। फैसले की प्रति मिलने के बाद मजदूरों ने मिठाइयां बांटकर खुशी जाहिर की। झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के केंद्रीय महासचिव डी.सी. गुहाई ने मौके पर उपस्थित मजदूरों को कोर्ट के आदेश की प्रतिलिपि पढ़कर सुनाई और इसे श्रमिक एकता तथा संघर्ष की बड़ी जीत बताया।

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13 वर्षों के संघर्ष के बाद मजदूरों को मिला न्याय

डी.सी. गुहाई ने कहा कि धनबाद ट्रिब्यूनल कोर्ट के आदेश की प्रति जल्द ही यूसिल के उपमहाप्रबंधक राकेश कुमार को सौंपी जाएगी, ताकि अदालत के निर्देशानुसार भुगतान प्रक्रिया शुरू हो सके। उन्होंने स्पष्ट कहा कि यदि आदेश का पालन नहीं किया गया तो संबंधित पक्षों के खिलाफ न्यायालय में अवमानना का मामला दायर किया जाएगा। इसके साथ ही फैसले को लागू कराने की रणनीति को लेकर कोल्हान समिति की एक महत्वपूर्ण बैठक भी आयोजित की गई। बैठक में यूनियन के पदाधिकारियों और प्रभावित मजदूरों ने निर्णय लिया कि आदेश के क्रियान्वयन तक संघर्ष जारी रखा जाएगा। मजदूरों ने इस फैसले को वर्षों की मेहनत और कानूनी लड़ाई का परिणाम बताया।

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यूसिल प्रबंधन को जल्द सौंपी जाएगी न्यायालय के आदेश की प्रति

जानकारी के अनुसार वर्ष 2013 में बादू हुरांग यूरेनियम माइंस में कार्यरत 226 ठेका मजदूरों ने अपने बकाया भुगतान, सेवा लाभ और वैधानिक अधिकारों को लेकर कानूनी लड़ाई शुरू की थी। मजदूरों का आरोप था कि उन्हें उनके श्रम के अनुरूप भुगतान और अन्य लाभ नहीं दिए गए। लंबे समय तक चली सुनवाई के बाद धनबाद ट्रिब्यूनल कोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुनाते हुए लगभग 2.50 करोड़ रुपये भुगतान का आदेश दिया। यह निर्णय उन सभी श्रमिकों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है जो वर्षों से अपने अधिकारों के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यूनियन नेताओं ने कहा कि यह फैसला श्रमिकों के संवैधानिक और वैधानिक अधिकारों की जीत का प्रतीक है।

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बकाया भुगतान और श्रम अधिकारों को लेकर चली थी लंबी कानूनी लड़ाई

झारखंड क्रांतिकारी मजदूर यूनियन के संयुक्त महासचिव सागर बेसरा ने कहा कि ठेका मजदूर किसी भी उद्योग और खनन परियोजना की उत्पादन व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा होते हैं। उनके श्रम का उचित मूल्य और वैधानिक अधिकार सुनिश्चित करना नियोक्ता और ठेका प्रतिष्ठानों की जिम्मेदारी है। वहीं यूनियन उपाध्यक्ष बाबूलाल मुर्मू ने मांग की कि न्यायालय के आदेश का बिना किसी विलंब के पालन करते हुए सभी 226 मजदूरों को पारदर्शी तरीके से भुगतान किया जाए। उन्होंने कहा कि अदालत के आदेश के बाद अब किसी प्रकार की देरी न्याय के साथ अन्याय होगी।

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यूनियन ने पारदर्शी भुगतान और आदेश के तत्काल अनुपालन की मांग उठाई

बैठक को संबोधित करते हुए डी.सी. गुहाई ने कहा कि संगठन भविष्य में भी यूसिल की विभिन्न खदानों और परियोजनाओं में कार्यरत मजदूरों के वेतन, बोनस, सामाजिक सुरक्षा, सेवा शर्तों, इंक्रीमेंट, बर्खास्तगी और अन्य श्रम अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष करता रहेगा। उन्होंने कहा कि यह फैसला सभी श्रमिकों के लिए प्रेरणा है कि संगठित और कानूनी संघर्ष के माध्यम से अपने अधिकार प्राप्त किए जा सकते हैं। बैठक में सागर बेसरा, राजू कुंकल, ममता देवी, विद्या शर्मा, सुमन झा, सुपाई सोरेन, ओराम माझी, गोविंद मार्डी, श्यामल कोड़ा, जासई सोरेन, संग्राम मुर्मू सहित बड़ी संख्या में मजदूर उपस्थित रहे।

Manoharpur : मिनी बिरसा चौक आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका चयन प्रक्रिया स्थगित

कागजी प्रक्रिया अधूरी मिलने पर चयन समिति ने अगले आदेश तक रोकी नियुक्ति 12 महिला अभ्यर्थियों का लिया गया साक्षात्कार,

  • कागजी प्रक्रिया अधूरी मिलने पर चयन समिति ने अगले आदेश तक रोकी नियुक्ति
  • 12 महिला अभ्यर्थियों का लिया गया साक्षात्कार, दस्तावेजों की हुई जांच

जेबी लाइव, रिपोर्टर

मनोहरपुर : मनोहरपुर प्रखंड के पश्चिम पंचायत अंतर्गत मिनी बिरसा चौक आंगनबाड़ी केंद्र में सेविका पद के चयन को लेकर सोमवार को आयोजित चयन समिति की बैठक स्थगित कर दी गई। बैठक की अध्यक्षता मुखिया ज्योतिष ओड़िया ने की। इस दौरान प्रखंड विकास पदाधिकारी सह प्रभारी बाल विकास परियोजना पदाधिकारी, शक्तिकुंज तथा प्रखंड कल्याण पदाधिकारी सन्नी शेखर सहित चयन समिति के अन्य सदस्य उपस्थित रहे। सेविका के एक पद के लिए स्थानीय 12 महिला अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। चयन प्रक्रिया के तहत सभी उम्मीदवारों का साक्षात्कार लिया गया और उनके आवेदन पत्रों की जांच की गई।

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चयन समिति ने दस्तावेजों की प्रक्रिया पूरी होने के बाद नई तिथि तय करने की बात कही

जांच के दौरान चयन समिति ने पाया कि चयन से संबंधित कागजी प्रक्रिया अभी पूर्ण नहीं हुई है। आवश्यक दस्तावेजों एवं औपचारिकताओं के अधूरे रहने के कारण समिति ने सर्वसम्मति से चयन प्रक्रिया को अगले आदेश तक स्थगित करने का निर्णय लिया। अधिकारियों ने बताया कि सभी आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद पुनः तिथि निर्धारित कर चयन समिति की बैठक बुलाई जाएगी। इस निर्णय की जानकारी सभी अभ्यर्थियों को दे दी गई है। अब उम्मीदवारों को अगली बैठक और नई चयन तिथि की घोषणा का इंतजार रहेगा।

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