शंक नदी के तेज बहाव से पुल का पहुंच पथ बहा, स्कूली बच्चों और मरीजों की बढ़ी परेशानी
स्थायी पुल निर्माण की मांग, हर बरसात में दोहराती है पुरानी समस्या
जेबी लाइव, रिपोर्टर
डुमरिया : डुमरिया प्रखंड में लगातार हुई मूसलाधार बारिश के बाद शंक नदी का जलस्तर बढ़ने से खैरबानी और बाँकिशोल गांव को जोड़ने वाला पुल एक बार फिर ग्रामीणों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। नदी में तेज बहाव के कारण पुल के एक छोर का मिट्टीयुक्त पहुंच पथ पूरी तरह कटकर बह गया है। इससे इस मार्ग पर आवागमन बुरी तरह प्रभावित हो गया है। पुल का रास्ता क्षतिग्रस्त होने से स्कूली बच्चों, मरीजों, बुजुर्गों और आम राहगीरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रखंड कार्यालय, बैंक, बाजार और अस्पताल जाने वाले ग्रामीणों को अब दूसरे रास्ते का सहारा लेना पड़ रहा है। इससे उन्हें अतिरिक्त दूरी तय करने के साथ समय और ईंधन भी खर्च करना पड़ रहा है।
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बारिश के बाद पुल का रास्ता कटा, दूसरे मार्ग से जाने को मजबूर ग्रामीण
ग्रामीणों के अनुसार, यह समस्या नई नहीं है। पिछले वर्ष भी बारिश के दौरान पुल के एक हिस्से का मिट्टीयुक्त पहुंच पथ इसी तरह नदी के तेज बहाव में बह गया था। उस समय कई दिनों तक ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से तत्काल पहल की उम्मीद की, लेकिन समय पर समाधान नहीं होने के कारण ग्रामीणों को खुद आगे आना पड़ा था। उन्होंने श्रमदान कर लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार किया था। इसी अस्थायी रास्ते से ग्रामीणों और स्कूली बच्चों का आवागमन कई दिनों तक जारी रहा। बाद में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों का ध्यान समस्या की ओर गया और पुल के कटे हिस्से में मिट्टी भरकर किसी तरह आवागमन बहाल कराया गया था। ग्रामीणों का कहना है कि हर साल बारिश में उन्हें इसी समस्या का सामना करना पड़ता है।
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पिछले साल भी ग्रामीणों ने श्रमदान से बहाल किया था आवागमन
इस बार भी रास्ता कटने के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन की पहल का इंतजार करने के बजाय स्वयं मोर्चा संभाल लिया। बच्चों की पढ़ाई प्रभावित न हो और ग्रामीणों का आवागमन पूरी तरह बंद न हो, इसके लिए लोगों ने श्रमदान कर दोबारा लकड़ी का अस्थायी पुल तैयार कर दिया है। ग्रामीणों की इस पहल से फिलहाल पैदल आवागमन का रास्ता खुल गया है। हालांकि अस्थायी लकड़ी का पुल होने के कारण सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। खासकर छोटे बच्चों, बुजुर्गों और मरीजों के लिए इस रास्ते से गुजरना जोखिम भरा हो सकता है। ग्रामीणों का कहना है कि मजबूरी में वे हर साल अस्थायी व्यवस्था करते हैं, लेकिन यह स्थायी समाधान नहीं है।
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बच्चों की पढ़ाई न रुके, इसलिए ग्रामीणों ने फिर संभाली कमान
खैरबानी पंचायत के मुखिया सुरेंद्रनाथ हेम्ब्रम ने बताया कि पुल के पहुंच पथ के कट जाने की जानकारी संज्ञान में ली गई है। उन्होंने कहा कि जल्द ही कटे हुए हिस्से में मिट्टी भरकर आवागमन सुचारु कराने का प्रयास किया जाएगा। मुखिया के अनुसार, नए पुल के निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया भी पूरी हो चुकी है और जल्द ही निर्माण कार्य शुरू होने की उम्मीद है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थायी पुल का निर्माण समय पर हो जाता है तो हर वर्ष बारिश के दौरान उत्पन्न होने वाली समस्या से छुटकारा मिल सकता है। फिलहाल लोग अस्थायी लकड़ी के पुल के सहारे आवागमन करने को मजबूर हैं।
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नए पुल का टेंडर पूरा, निर्माण शुरू होने का ग्रामीणों को इंतजार
बारिश के मौसम में हर वर्ष पहुंच पथ के कटने की समस्या ने ग्रामीणों के सामने स्थायी समाधान की जरूरत को उजागर कर दिया है। पुल क्षतिग्रस्त होने से सबसे अधिक असर बच्चों की पढ़ाई, मरीजों की आवाजाही और रोजमर्रा के काम से आने-जाने वाले लोगों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि कटे हुए पहुंच पथ की तत्काल मरम्मत कराने के साथ नए पुल का निर्माण जल्द शुरू कराया जाए। ग्रामीणों का कहना है कि हर बरसात में लकड़ी का अस्थायी पुल बनाना किसी स्थायी व्यवस्था का विकल्प नहीं हो सकता। अब लोगों की नजर इस बात पर है कि नए पुल का निर्माण कब शुरू होता है और खैरबानी-बाँकिशोल के ग्रामीणों को कब सुरक्षित एवं स्थायी आवागमन की सुविधा मिलती है।























