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Jamshedpur : जुगसलाई में फायरिंग से सनसनी : अज्ञात अपराधियों ने युवक पर बरसाई गोलियां, टीएमएच में भर्ती

  • मिल्लत नगर में ताबड़तोड़ फायरिंग से दहशत, जांच में जुटी पुलिस

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जुगसलाई थाना क्षेत्र के मिल्लत नगर में शुक्रवार देर शाम उस समय अफरा-तफरी मच गई जब अज्ञात अपराधियों ने ज़ाफर अली नामक युवक पर ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी। गोली लगने से ज़ाफर गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसे स्थानीय लोगों की मदद से तत्काल टीएमएच में भर्ती कराया गया। बताया गया कि ज़ाफर गोलमुरी बाजार में चिकन की दुकान चलाता है और शुक्रवार की शाम वह अपने साथी के साथ किसी निजी कार्य से मिल्लत नगर स्थित जुगसलाई फाटक के पास पहुंचा था। तभी घात लगाए अपराधियों ने अचानक फायरिंग शुरू कर दी और तीन गोलियां ज़ाफर को लगीं। वारदात के बाद हमलावर मौके से फरार हो गए। घटना के बाद इलाके में दहशत फैल गई और लोगों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी।

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सूचना मिलते ही जुगसलाई थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है ताकि आरोपियों की पहचान की जा सके। फिलहाल पुलिस हर एंगल से मामले की जांच कर रही है — यह हमला पुरानी रंजिश का परिणाम है या किसी आपराधिक गिरोह की साजिश, इसका पता लगाया जा रहा है। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में भय और तनाव का माहौल है। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है और अपराधियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है।

Jamshedpur : डालसा का तीन दिवसीय सामुदायिक मध्यस्थता प्रशिक्षण शुरू, वाद-मुक्त ग्रामीण भारत पर जोर

10 अगस्त तक चलने वाले प्रशिक्षण में सामुदायिक विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के गुर सीख रहे मध्यस्थ वाद-मुक्त ग्रामीण भारत

  • 10 अगस्त तक चलने वाले प्रशिक्षण में सामुदायिक विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के गुर सीख रहे मध्यस्थ
  • वाद-मुक्त ग्रामीण भारत के लक्ष्य की ओर बढ़ता कदम

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) एवं झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (JHALSA) के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (डालसा), पूर्वी सिंहभूम द्वारा तीन दिवसीय आधारभूत सामुदायिक मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ शुक्रवार को किया गया। “सामुदायिक मध्यस्थता : वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की ओर” विषय पर आयोजित यह प्रशिक्षण 8 से 10 अगस्त तक चलेगा। कार्यक्रम का उद्देश्य समुदाय स्तर पर उत्पन्न होने वाले विवादों का न्यायालय पहुंचने से पहले ही सौहार्दपूर्ण और संवाद आधारित समाधान सुनिश्चित करना है। प्रशिक्षण में चयनित सामुदायिक मध्यस्थों को विवाद निपटारे की प्रक्रिया, मध्यस्थता की मूल अवधारणाओं तथा समाज में उनकी भूमिका के बारे में विस्तार से जानकारी दी जा रही है।

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मध्यस्थों को सिखाए जा रहे संवाद और निष्पक्षता के कौशल

प्रशिक्षण कार्यक्रम का संचालन जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के प्रशिक्षित मध्यस्थों द्वारा किया जा रहा है। इस दौरान प्रतिभागियों को मध्यस्थ की भूमिका, निष्पक्षता, तटस्थता, गोपनीयता, सक्रिय श्रवण और प्रभावी संवाद जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर प्रशिक्षण दिया जा रहा है। प्रशिक्षकों ने बताया कि एक सफल मध्यस्थ का कार्य किसी पक्ष के पक्ष या विपक्ष में निर्णय देना नहीं, बल्कि दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित कर उन्हें स्वीकार्य समाधान तक पहुंचाने में सहायता करना होता है। प्रतिभागियों को पक्षकारों के हितों की पहचान करने और विभिन्न समाधान विकल्पों पर विचार करने की तकनीकों से भी अवगत कराया जा रहा है।

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केस स्टडी और रोल प्ले से मिल रहा व्यवहारिक अनुभव

प्रशिक्षण के दौरान प्रतिभागियों को केवल सैद्धांतिक जानकारी ही नहीं, बल्कि व्यावहारिक अभ्यास, केस स्टडी, संवादात्मक सत्र और भूमिका-अभिनय (रोल प्ले) के माध्यम से वास्तविक परिस्थितियों में विवाद समाधान की प्रक्रिया को समझाया जा रहा है। डालसा का मानना है कि ग्रामीण और सामुदायिक स्तर पर छोटे-छोटे विवादों का समय रहते समाधान होने से मुकदमों की संख्या में कमी आएगी और सामाजिक सौहार्द भी मजबूत होगा। यह पहल “वाद-मुक्त ग्रामीण भारत” की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। प्रशिक्षण कार्यक्रम का समापन 10 अगस्त को होगा, जिसके बाद प्रशिक्षित मध्यस्थ अपने-अपने क्षेत्रों में सामुदायिक विवादों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाएंगे।

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मामूली बुखार और दस्त के इलाज के दौरान बिगड़ी हालत, परिजनों ने झोलाछाप चिकित्सक पर लगाया लापरवाही का आरोप जेबी

  • मामूली बुखार और दस्त के इलाज के दौरान बिगड़ी हालत, परिजनों ने झोलाछाप चिकित्सक पर लगाया लापरवाही का आरोप

जेबी लाइव, रिपोर्टर

बहरागोड़ा : पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत मौदा गांव में एक 40 वर्षीय युवक की इलाज के दौरान मौत हो जाने से क्षेत्र में शोक और आक्रोश का माहौल है। मृतक की पहचान नाडु सीट के रूप में हुई है। परिजनों का आरोप है कि बुखार और दस्त की शिकायत होने पर उन्हें स्थानीय स्तर पर इलाज के लिए ले जाया गया था, जहां एक कथित झोलाछाप चिकित्सक द्वारा इंजेक्शन दिए जाने के बाद उनकी तबीयत अचानक बिगड़ गई। परिजनों का कहना है कि इंजेक्शन लगने के बाद मरीज ने शरीर में तेज जलन और बेचैनी की शिकायत की, लेकिन उसकी स्थिति पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। कुछ ही देर में वह अचेत हो गया, जिसके बाद उसे तत्काल बहरागोड़ा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया।

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पुलिस ने शुरू की जांच, ग्रामीणों में आक्रोश

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचने पर चिकित्सकों ने नाडु सीट को मृत घोषित कर दिया। घटना की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और शव का पंचनामा कर पोस्टमार्टम के लिए घाटशिला अनुमंडल अस्पताल भेज दिया। पुलिस मामले की जांच कर रही है तथा आरोपों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा रही है। घटना के बाद ग्रामीणों ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। मृतक अपने पीछे पत्नी, दो बच्चों और बुजुर्ग माता-पिता को छोड़ गए हैं। इस घटना से पूरे गांव में शोक का माहौल है और ग्रामीणों ने क्षेत्र में स्वास्थ्य सेवाओं की निगरानी तथा अवैध रूप से इलाज करने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है।

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डुमरिया के पोड़ाडीहा टोला में चार-पांच गांवों के लोग वर्षों से जोखिम उठाकर कर रहे आवागमन जेबी लाइव, रिपोर्टर डुमरिया

  • डुमरिया के पोड़ाडीहा टोला में चार-पांच गांवों के लोग वर्षों से जोखिम उठाकर कर रहे आवागमन

जेबी लाइव, रिपोर्टर

डुमरिया : पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत आस्ताकोवाली पंचायत के आस्ताकोवाली गांव स्थित पोड़ाडीहा टोला में आज भी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। नाले पर स्थायी पुल का निर्माण नहीं होने के कारण ग्रामीण वर्षों से बांस की अस्थायी पुलिया बनाकर आवागमन करने को मजबूर हैं। यह पुलिया केवल पोड़ाडीहा टोला ही नहीं, बल्कि आसपास के चार से पांच गांवों के लोगों के लिए भी एकमात्र संपर्क मार्ग बनी हुई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अधिकारियों को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस पहल नहीं हुई। ग्रामीणों के अनुसार विकास योजनाओं की चर्चा तो होती है, लेकिन उनके गांव की यह मूलभूत समस्या वर्षों से अनदेखी की जा रही है।

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बरसात में बढ़ जाता है हादसे का खतरा

ग्रामीणों ने बताया कि प्रतिदिन स्कूली बच्चे, किसान, मजदूर, महिलाएं और बुजुर्ग इसी बांस की पुलिया के सहारे नाला पार करते हैं। सामान्य दिनों में भी पुलिया पर चलना आसान नहीं होता, जबकि बरसात के मौसम में स्थिति और अधिक भयावह हो जाती है। नाले का जलस्तर बढ़ते ही पुलिया फिसलनभरी और बेहद जोखिमपूर्ण हो जाती है। ऐसे समय में लोगों को जान जोखिम में डालकर आवागमन करना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि किसी भी दिन कोई बड़ा हादसा हो सकता है, लेकिन इसके बावजूद समस्या के समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। बच्चों और बुजुर्गों को सबसे अधिक परेशानी का सामना करना पड़ता है।

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पुल निर्माण नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय लोगों ने कहा कि देश को आजाद हुए दशकों बीत चुके हैं, लेकिन उनके गांव तक विकास की किरण नहीं पहुंच सकी है। एक स्थायी पुल के अभाव में हजारों लोगों को रोजाना कठिनाइयों और जोखिमों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों ने प्रशासन से अविलंब पक्का पुल निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द निर्माण कार्य प्रारंभ नहीं किया गया तो क्षेत्र के लोग आंदोलन का रास्ता अपनाने को बाध्य होंगे। ग्रामीणों ने स्पष्ट कहा कि किसी भी संभावित दुर्घटना या जनआक्रोश की पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और संबंधित विभाग की होगी।

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केंद्रीय मंत्री से मिले सांसद विद्युत वरण महतो सुरदा, केंदाडीह और राखा खदानों में उत्पादन बढ़ाने के साथ बंद परियोजनाओं

  • केंद्रीय मंत्री से मिले सांसद विद्युत वरण महतो
  • सुरदा, केंदाडीह और राखा खदानों में उत्पादन बढ़ाने के साथ बंद परियोजनाओं को शुरू करने पर दिया जोर

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : जमशेदपुर के सांसद विद्युत वरण महतो ने नई दिल्ली में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी से मुलाकात कर घाटशिला स्थित हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल) की तांबा खदानों तथा मौभंडार स्थित स्मेल्टर-रिफाइनरी संयंत्र को पूर्ण क्षमता से संचालित कराने की मांग की। सांसद ने कहा कि जमशेदपुर संसदीय क्षेत्र के अंतर्गत आने वाला एचसीएल का इंडियन कॉपर कॉम्प्लेक्स देश के प्रमुख सार्वजनिक क्षेत्र के तांबा उत्पादक उपक्रमों में शामिल है। उन्होंने बताया कि उनके लगातार प्रयासों के परिणामस्वरूप सुरदा, केंदाडीह और राखा तांबा खदानों का संचालन दोबारा शुरू हुआ, लेकिन वर्तमान में इन खदानों में अपेक्षित स्तर पर उत्पादन नहीं हो पा रहा है। वहीं मौभंडार स्थित स्मेल्टर एवं रिफाइनरी संयंत्र भी अब तक पूरी तरह चालू नहीं हो सका है, जिससे क्षेत्र के औद्योगिक विकास और रोजगार सृजन पर असर पड़ रहा है।

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लंबित खदान परियोजनाओं को शुरू करने की उठी मांग

सांसद विद्युत वरण महतो ने केंद्रीय मंत्री को बताया कि पिछले दस वर्षों के दौरान राखा माइंस की यूसीआईएल के साथ लीज ओवरलैपिंग, भूमि उपलब्धता, माइनिंग लीज, पर्यावरण एवं वन स्वीकृति जैसी कई महत्वपूर्ण समस्याओं के समाधान के लिए लगातार प्रयास किए गए हैं। इसके बावजूद मुसाबनी क्षेत्र की धौबनी, किसनगढ़िया और पाथरगोड़ा तांबा खदानें अब तक शुरू नहीं हो सकी हैं। सांसद ने मांग की कि सुरदा, केंदाडीह और राखा खदानों में पूर्ण उत्पादन सुनिश्चित कराया जाए तथा सिद्धेश्वर खान ब्लॉक में लंबित खनन कार्य को जल्द शुरू किया जाए। उन्होंने कहा कि इन परियोजनाओं के शुरू होने से क्षेत्र में आर्थिक गतिविधियों को गति मिलेगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर उपलब्ध होंगे।

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सितंबर में होगी समीक्षा बैठक, मंत्री ने दिया आश्वासन

केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने सांसद की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए अपने निजी सचिव कार्तिकेन को निर्देश दिया कि सितंबर के प्रथम सप्ताह में एचसीएल के सीएमडी के साथ एक समीक्षा बैठक आयोजित की जाए। बैठक में खदानों और स्मेल्टर-रिफाइनरी परियोजनाओं की प्रगति तथा लंबित मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यदि राज्य सरकार के स्तर पर किसी प्रकार की बाधा आती है तो आवश्यकता पड़ने पर वे स्वयं राज्य सरकार से बातचीत करेंगे। उन्होंने सांसद को आश्वस्त किया कि तांबा खदानों और मौभंडार स्मेल्टर-रिफाइनरी संयंत्र को जल्द पूर्ण क्षमता से संचालित करने की दिशा में आवश्यक कदम उठाए जाएंगे। मंत्री के इस आश्वासन से क्षेत्र के लोगों और एचसीएल से जुड़े कर्मचारियों में नई उम्मीद जगी है।

Gua : सेंडेल घाटी में धंसने लगी सड़क, बारिश के बीच बढ़ा बड़े हादसे का खतरा

बड़ाजामदा–मनोहरपुर मुख्य मार्ग पर गहरी दरारें, भारी वाहनों की आवाजाही के बीच लोगों में चिंता जेबी लाइव, रिपोर्टर गुवा :

  • बड़ाजामदा–मनोहरपुर मुख्य मार्ग पर गहरी दरारें, भारी वाहनों की आवाजाही के बीच लोगों में चिंता

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : लगातार हो रही बारिश ने बड़ाजामदा–मनोहरपुर मुख्य मार्ग पर स्थित सेंडेल घाटी की सड़क को खतरनाक बना दिया है। घाटी से नीचे उतरने वाले हिस्से में सड़क कई जगहों से धंसने लगी है और लंबी-गहरी दरारें उभर आई हैं। सड़क किनारे की मिट्टी लगातार खिसकने से मार्ग का आधार कमजोर पड़ता जा रहा है, जिससे किसी भी समय सड़क का बड़ा हिस्सा क्षतिग्रस्त हो सकता है। स्थिति इतनी गंभीर हो चुकी है कि सड़क के किनारे लगाए गए सुरक्षा बैरियर के नीचे की जमीन भी धंसने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द मरम्मत कार्य नहीं कराया गया तो बारिश के दौरान सड़क का हिस्सा टूटकर बह सकता है। यह मार्ग क्षेत्र की जीवनरेखा माना जाता है, क्योंकि इसी रास्ते से प्रतिदिन सैकड़ों लोग आवागमन करते हैं। ऐसे में सड़क की मौजूदा स्थिति वाहन चालकों और यात्रियों के लिए गंभीर खतरा बन गई है। बारिश के मौसम में फिसलन और कमजोर सड़क के कारण दुर्घटना की आशंका और बढ़ गई है।

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मरम्मत और सुरक्षा इंतजाम की मांग हुई तेज

सेंडेल घाटी का यह मार्ग बड़ाजामदा, मनोहरपुर समेत आसपास के कई गांवों को जोड़ने वाला प्रमुख संपर्क मार्ग है। प्रतिदिन इस सड़क से भारी मालवाहक ट्रक, बसें, एंबुलेंस, निजी वाहन और दोपहिया वाहन गुजरते हैं। ऐसे में सड़क के धंसने की खबर ने स्थानीय लोगों और वाहन चालकों की चिंता बढ़ा दी है। ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार संबंधित विभाग और प्रशासन को सड़क की खराब स्थिति से अवगत कराया है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। लोगों का आरोप है कि समय रहते मरम्मत नहीं होने से समस्या लगातार बढ़ती जा रही है। स्थानीय नागरिकों और वाहन चालकों ने प्रशासन से क्षतिग्रस्त हिस्से की तत्काल मरम्मत कराने, सड़क किनारे मजबूत सुरक्षा दीवार और बैरिकेडिंग लगाने तथा चेतावनी संकेतक स्थापित करने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि जल्द आवश्यक कदम नहीं उठाए गए तो यह मार्ग किसी बड़े सड़क हादसे का कारण बन सकता है और यातायात भी पूरी तरह प्रभावित हो सकता है।

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सिर्फ दो घंटे की जलापूर्ति पर निर्भर ग्रामीण, अतिरिक्त पाइपलाइन की मांग तेज जेबी लाइव, रिपोर्टर गुवा : किरीबुरू थाना

  • सिर्फ दो घंटे की जलापूर्ति पर निर्भर ग्रामीण, अतिरिक्त पाइपलाइन की मांग तेज

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : किरीबुरू थाना क्षेत्र स्थित गाड़ा हाटिंग बस्ती में पेयजल संकट लगातार गंभीर होता जा रहा है। बस्ती में करीब 300 परिवार निवास करते हैं, लेकिन उनके लिए सेल प्रबंधन की ओर से केवल एक पानी सप्लाई पाइपलाइन की व्यवस्था की गई है। इसी एकमात्र पाइपलाइन से प्रतिदिन सुबह 9 बजे से 11 बजे तक केवल दो घंटे जलापूर्ति की जाती है। सीमित समय तक मिलने वाले पानी के कारण सभी परिवारों की जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही हैं। जलापूर्ति शुरू होते ही पानी भरने के लिए लोगों की लंबी कतार लग जाती है। महिलाओं का कहना है कि कई बार निर्धारित समय समाप्त होने से पहले ही पर्याप्त पानी नहीं मिल पाता, जिससे घरेलू कार्यों के साथ-साथ पेयजल की आवश्यकता पूरी करने में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। गर्मी और उमस भरे मौसम में यह समस्या और गंभीर रूप ले रही है, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।

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ग्रामीणों ने प्रशासन और सेल प्रबंधन से लगाई गुहार

स्थानीय लोगों ने बताया कि वे लंबे समय से सेल प्रबंधन से एक अतिरिक्त पानी सप्लाई पाइपलाइन उपलब्ध कराने की मांग कर रहे हैं, ताकि बस्ती के सभी परिवारों को नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति सुनिश्चित हो सके। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार मांग उठाने के बावजूद अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। लोगों ने प्रशासन को भी आवेदन देकर पेयजल संकट के स्थायी समाधान की मांग की है, लेकिन स्थिति जस की तस बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आने वाले दिनों में समस्या और विकराल हो सकती है। बस्तीवासियों ने सेल प्रबंधन और जिला प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप कर अतिरिक्त जलापूर्ति व्यवस्था शुरू करने तथा पेयजल संकट के स्थायी समाधान की दिशा में प्रभावी कदम उठाने की मांग की है, ताकि लोगों को राहत मिल सके।

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