फुलडुंगरी में आयोजित चर्चा-परिचर्चा में जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रखे विचार, राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्री तक ज्ञापन भेजने
फुलडुंगरी में आयोजित चर्चा-परिचर्चा में जनप्रतिनिधियों, बुद्धिजीवियों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने रखे विचार, राष्ट्रपति से लेकर मुख्यमंत्री तक ज्ञापन भेजने की बनी रणनीति
परिसीमन के फायदे-नुकसान पर हुई विस्तृत चर्चा
जेबी लाइव, रिपोर्टर
घाटशिला : घाटशिला के फुलडुंगरी स्थित बाबा तिलका माझी भवन में रविवार को झारखंडी भाषा भाषी मूलनिवासी संघ की ओर से झारखंड में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा-परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में समाज के विभिन्न वर्गों से जुड़े जनप्रतिनिधियों, राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं, शिक्षाविदों, छात्र नेताओं, अधिवक्ताओं, पत्रकारों और जागरूक नागरिकों को आमंत्रित किया गया था। बैठक में परिसीमन से झारखंड के सामाजिक, राजनीतिक और संवैधानिक ढांचे पर पड़ने वाले प्रभावों को लेकर गंभीर मंथन हुआ। वक्ताओं ने परिसीमन से होने वाले संभावित लाभ और नुकसान पर अपने विचार रखे तथा यह सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई कि किसी भी परिस्थिति में अनुसूचित जनजाति और अन्य पारंपरिक समुदायों के अधिकार प्रभावित न हों। कार्यक्रम में झारखंड आंदोलनकारी सुराई बास्के, समाजसेवी कृष्णा बास्के, संघ के केंद्रीय प्रवक्ता रामचंद्र सोरेन, समाजसेवी सह पूर्व विधायक प्रत्याशी इंद्र मुर्मू, बहादुर सोरेन, शिक्षक राम दुलार टुडू, मनसा राम हांसदा और अजीत मुर्मू समेत कई वक्ताओं ने भाग लिया।
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राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपने की तैयारी
बैठक में यह निर्णय लिया गया कि झारखंडी भाषा भाषी मूलनिवासी संघ के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति, झारखंड के राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा जाएगा। इस ज्ञापन में आरक्षित पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, विधायकों, सांसदों, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदायों के प्रतिनिधियों, परंपरागत स्वशासन व्यवस्था के अगुवाओं तथा कॉलेज और विश्वविद्यालयों के छात्र-छात्राओं की व्यापक भागीदारी सुनिश्चित करने की मांग की जाएगी। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष संजय बेहरा ने कहा कि प्राप्त सुझावों के आधार पर जल्द ही रणनीति तैयार की जाएगी और इस विषय पर आगे भी चरणबद्ध कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। वक्ताओं ने कहा कि परिसीमन केवल जनसंख्या आधारित प्रक्रिया न होकर सामाजिक न्याय और संवैधानिक संरक्षण को ध्यान में रखकर किया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से इस विषय पर व्यापक जनपरामर्श की भी मांग की।
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आरक्षित सीटों में कटौती हुई तो होगा विरोध
संघ के केंद्रीय प्रवक्ता रामचंद्र सोरेन ने कहा कि यदि परिसीमन के बाद आरक्षित सीटों की संख्या में समानुपातिक वृद्धि होती है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन यदि आरक्षित सीटों में कटौती की जाती है तो इसका पुरजोर विरोध होगा। उन्होंने कहा कि पांचवीं अनुसूचित क्षेत्र के अधिकारों से किसी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा। बहादुर सोरेन ने कहा कि सरकार अब तक पेशा कानून के अनुरूप मानकी-मुंडा, ढोकलो पड़हा, माझी महाल और आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के लिए स्पष्ट प्रशासनिक नियमावली नहीं बना सकी है। वहीं झारखंड आंदोलनकारी सुराई बास्के ने आशंका जताई कि यदि परिसीमन के कारण आरक्षित सीटों में कमी आती है तो झारखंड आंदोलन की मूल भावना प्रभावित हो सकती है। जिला अध्यक्ष सह पूर्व प्रत्याशी आनंद हेम्ब्रम ने बताया कि पूर्वी सिंहभूम के सभी प्रखंडों में परिसीमन विषय पर चर्चा कार्यक्रम आयोजित कर आगे की रणनीति तय की जाएगी। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुकेश कर्मकार, प्रकाश मुखी, संजय नायक, सुनील मुखी, मनोज मुखी, महेश करूवा, सुंदर टुडू, सुजाता मंडी और मंगल टुडू सहित कई लोगों की महत्वपूर्ण भूमिका रही।