- कक्षा 1 से 8 तक पढ़ाई मात्र दो शिक्षकों के भरोसे, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर प्रश्नचिन्ह
जेबी लाइव, रिपोर्टर
पाथरी पंचायत के मोधाबेड़ा मध्य विद्यालय में शैक्षणिक अराजकता की स्थिति गंभीर रूप से बनी हुई है। विद्यालय में KG से लेकर कक्षा आठवीं तक पढ़ाई के लिए नामांकित 100 से अधिक छात्रों को मात्र दो शिक्षकों के भरोसे छोड़ दिया गया है। यह स्थिति न केवल शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि बच्चों के बुनियादी ज्ञान और विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डाल रही है। अभिभावक इस मामले में प्रशासन से तत्काल हस्तक्षेप की मांग कर रहे हैं। ऐसे अनुपातहीन शिक्षक-छात्र संरचना से बच्चों का पाठ्यक्रम अधूरा रह जाता है और उन्हें विषयों की गहन समझ नहीं मिल पाती।
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उच्च प्राथमिक कक्षाओं का दबाव, बहु-वर्गीय शिक्षण की समस्या

विद्यालय की सबसे बड़ी समस्या यह है कि दोनों शिक्षक केवल प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 1 से 5) के लिए नियुक्त हैं, लेकिन उन्हें उच्च प्राथमिक कक्षाओं (कक्षा 6 से 8) की पढ़ाई भी संभालनी पड़ रही है। गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों के लिए विषय विशेषज्ञ की आवश्यकता होने के बावजूद, शिक्षक बहु-वर्गीय शिक्षण प्रणाली अपनाने को मजबूर हैं। इसका परिणाम यह होता है कि पाठ्यक्रम समय पर पूरा नहीं होता और छात्रों को विषयों की गहराई से जानकारी नहीं मिल पाती। शिक्षकों की भारी कमी ने शिक्षा की गुणवत्ता पर गंभीर ग्रहण लगा दिया है।
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ग्रामीणों की चिंता, प्रशासन से शिक्षकों की नियुक्ति की मांग
स्थानीय अभिभावकों ने कहा कि इतनी कम शिक्षक संख्या से बच्चों का भविष्य दांव पर है। उनका कहना है कि विज्ञान और गणित के विषयों में बच्चों को आवश्यक मार्गदर्शन नहीं मिल रहा। ग्रामीणों ने प्रशासन से तुरंत अतिरिक्त शिक्षकों की नियुक्ति करने की अपील की है। यह मामला केवल मोधाबेड़ा तक ही सीमित नहीं है, बल्कि राज्य के अन्य ग्रामीण और पिछड़े क्षेत्रों में भी शिक्षा विभाग की अनुपातहीन शिक्षक-छात्र व्यवस्था और ढीली कार्यशैली को उजागर करता है। ऐसे हालातों में हजारों बच्चों का शैक्षणिक भविष्य संकट में है और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करना चुनौतीपूर्ण बन गया है।
























