- ग्रामीण महिलाओं ने जताया भरोसा, सोमेश सोरेन के समर्थन में उमड़ा उत्साह
- महिलाओं ने कहा — शिक्षित, सरल और संवेदनशील नेता हैं सोमेश चन्द्र सोरेन
- उनके नेतृत्व में क्षेत्र की उम्मीदें हुईं मजबूत
- कशीदा पंचायत में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से झामुमो का जनसंपर्क हुआ मजबूत
जेबी लाइव, रिपोर्टर
झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की महिला मोर्चा की नेत्रियों ने आज घाटशिला विधानसभा क्षेत्र के कशीदा पंचायत में पैदल जनसंपर्क अभियान चलाया। अभियान के दौरान उन्होंने गांव-गांव जाकर ग्रामीण महिलाओं से संवाद किया और झामुमो प्रत्याशी सोमेश चन्द्र सोरेन के पक्ष में समर्थन मांगा। नेत्रियों ने राज्य सरकार की विभिन्न योजनाओं — मईया सम्मान योजना, सर्वजन पेंशन योजना, सावित्रीबाई फुले किशोरी सम्मान योजना, 200 यूनिट मुफ्त बिजली योजना और कृषि ऋण माफी योजना — की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि झामुमो की सरकार सदैव गरीब, किसान, महिला और युवाओं के कल्याण के लिए समर्पित रही है।
इसे भी पढ़ें : Ghatsila : माझी पारगना महाल ने झामुमो प्रत्याशी सोमेश सोरेन को दिया समर्थन
महिला सशक्तिकरण के जरिए बढ़ रहा झामुमो का जनाधार
वरिष्ठ नेत्री छाया रानी साहू ने ग्रामीण महिलाओं को संबोधित करते हुए कहा कि “सोमेश चन्द्र सोरेन एक पढ़े-लिखे, विनम्र और ईमानदार युवा नेता हैं, जो अपने पिता स्व. रामदास सोरेन के अधूरे सपनों को पूरा करेंगे। जैसे किसी नौकरी में शिक्षित व्यक्ति को प्राथमिकता दी जाती है, वैसे ही अब हमारे क्षेत्र को एक शिक्षित जनसेवक की ज़रूरत है, और वह हैं सोमेश सोरेन।” उन्होंने कहा कि झामुमो की सरकार ने महिलाओं को सम्मान और स्वावलंबन दिया है, इसलिए हर महिला को इस बार एकजुट होकर पार्टी का समर्थन करना चाहिए।
इसे भी पढ़ें : Jadugoda : पहली नवंबर से शुरू होगी छह दिवसीय राधा-कृष्ण रास पूजा, तैयारी में जुटा उत्कल समाज
छाया रानी साहू ने कहा — पढ़ा-लिखा जनसेवक ही बदल सकता है क्षेत्र की तस्वीर
वहीं, युवा नेत्री लक्ष्मी सिंह ने कहा कि “स्व. रामदास सोरेन जी के निधन के बाद सोमेश सोरेन ने पूरे क्षेत्र से आत्मीय रिश्ता जोड़ा है। गांव-गांव में उन्हें अपार स्नेह और आशीर्वाद मिल रहा है। यह इस बात का संकेत है कि आने वाले 11 नवंबर के उपचुनाव में सोमेश सोरेन अपने पिता से भी अधिक मतों से ऐतिहासिक जीत दर्ज करेंगे।” इस जनसंपर्क अभियान में लिली भकत भी शामिल रहीं। कशीदा पंचायत में महिला मोर्चा का यह अभियान एकता और विश्वास का प्रतीक बन गया, जिसमें ग्रामीण महिलाओं की सक्रिय भागीदारी दिखी।
























