भाजपा जिला अध्यक्ष द्वारा कुणाल षड़ंगी पर उठाए गए सवालों के विरोध में JMM नेताओं ने चंपई सोरेन और पार्टी पर बोला हमला, निजी रिश्तों की अनदेखी का आरोप।
जेबी लाइव, रिपोर्टर
बीते दिन घाटशिला में भारतीय जनता पार्टी के जिला अध्यक्ष चंडी चरण साव द्वारा की गई प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूर्व विधायक कुणाल षड़ंगी पर उनके चाचा (स्व. रामदास सोरेन) के प्रति संवेदनशीलता को लेकर उठाए गए सवालों ने राजनीतिक हलकों में हलचल मचा दी है। इस बयान का झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) ने कड़ा विरोध किया है। जेएमएम के मुसाबनी प्रखंड अध्यक्ष प्रधान सोरेन ने पलटवार करते हुए कहा कि चंडी चरण साव का परिवार के साथ वर्षों पुराना व्यक्तिगत संबंध रहा है, ऐसे में उन्हें यह बात कहने से पहले सोचने की जरूरत थी। प्रधान सोरेन ने चार तारीखों (20 जून, 5 नवंबर, 10 दिसंबर, 18 दिसंबर 2022) का हवाला देते हुए बताया कि कुणाल षड़ंगी अपने चाचा के साथ तबीयत खराब होने पर लगातार संपर्क में रहे, यहाँ तक कि निधन के बाद पार्थिव शरीर को खुद पैतृक आवास तक लाए। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर वाकई निष्पक्ष सवाल करना था, तो कुणाल के चचेरे भाई ऋषि षड़ंगी से भी पूछा जाना चाहिए था कि उन्होंने अपने पिता के लिए क्या किया?
घाटशिला प्रखंड अध्यक्ष दुर्गा चरण मुर्मू ने भी चंडी चरण साव की आलोचना करते हुए कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि उन्होंने उस परिवार पर आरोप लगाए, जिसने कभी उन्हें राजनीतिक पहचान और व्यक्तिगत सहयोग दिया था। उन्होंने याद दिलाया कि जब साव के पुत्र को डेंगू हुआ था, तब यही परिवार उनके साथ खड़ा रहा और इलाज में मदद की थी। “आपकी ये बयानबाज़ी दर्शाती है कि आप भी अब वही राह पकड़ चुके हैं, जिसपर आज चंपई सोरेन चल रहे हैं,” उन्होंने कहा। वहीं जेएमएम नेता काजल डॉन ने पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन को आड़े हाथों लेते हुए पूछा कि वे दिल्ली जाकर सर गंगा राम हॉस्पिटल में अपने राजनैतिक गुरु की तबियत पूछने क्यों नहीं गए, जब वे चश्मा बनवाने दिल्ली जा सकते थे? उन्होंने आरोप लगाया कि निजी संबंधों और कर्तव्यों की पूरी तरह अनदेखी की गई और शोक व्यक्त करने तक की संवेदनशीलता नहीं दिखाई गई।
जेएमएम प्रवक्ता सोमेन मिश्रा ने भाजपा पर तीखा तंज कसते हुए कहा कि सवाल स्पष्ट था, लेकिन घाटशिला की भाजपा टीम गोलमोल जवाब देकर बचने की कोशिश कर रही है। उन्होंने सरायकेला जिले में कुणाल षड़ंगी पर की गई व्यक्तिगत टिप्पणियों की भी निंदा की और कहा कि भाजपा नेताओं को पहले खुद से सवाल पूछने की जरूरत है कि वे कितनी बार जनता की मदद के लिए खड़े हुए हैं? स्कूलों में एडमिशन से लेकर अस्पतालों में इलाज तक, कुणाल ने आम लोगों की सहायता की है, और ऐसे में उन पर उंगलियां उठाना सिर्फ अवसरवादिता और चाटुकारिता को दर्शाता है। अंत में मिश्रा ने चंपई सोरेन की तुलना ‘पुत्र मोह में फंसे धृतराष्ट्र’ से की और सवाल किया कि वे किस मुंह से अब आदिवासी मूलवासी के हितों की बात करते हैं? जेएमएम ने स्पष्ट किया कि यदि भाजपा ने ऐसे ही झूठे बयानों और व्यक्तिगत हमलों का सहारा लिया, तो उन्हें करारा जवाब दिया जाएगा।
























