- प्रकृति पूजा कर खुशहाली और समृद्धि की मांगी गई कामना
- सरहुल पर्व ने दिया प्रकृति और संस्कृति से जुड़ने का संदेश
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : गुवा के हिरजी हटिंगा स्थित सरना स्थल पर उरांव समाज के लोगों ने पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ सरहुल पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया। इस अवसर पर पाहन गोकुल बरुवा और शंकर टोप्पो ने विधि-विधान से धरती, जल और जंगल की पूजा-अर्चना की। समाज के लोगों ने देवी-देवताओं से सुख-शांति और समृद्धि की कामना की। सरहुल को उरांव समाज का नया साल भी माना जाता है, जिसे चैत्र नवरात्रि के महीने में मनाया जाता है। इस दौरान पुरुषों, महिलाओं और बच्चों ने पारंपरिक वेशभूषा धारण कर पर्व की शोभा बढ़ाई। पुरुषों ने कानों में फूल सजाए, जबकि महिलाओं ने भी फूलों से खुद को सजाया और एक-दूसरे को रंग लगाकर खुशी साझा की।
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पारंपरिक वेशभूषा और रीति-रिवाजों से सजा सरहुल पर्व
इस अवसर पर पारंपरिक जुलूस भी निकाला गया, जिसमें लोग घर-घर जाकर झंडा लगाते हुए शुभकामनाएं देते नजर आए। पंचायत सदस्य भादो टोप्पो ने बताया कि सरहुल झारखंड की जनजातियों का प्रमुख प्रकृति पर्व है, जो साल वृक्षों में नए फूल आने पर मनाया जाता है। यह पर्व धरती और सूर्य के मिलन, प्रकृति के प्रति आभार और कृषि कार्य की शुरुआत का प्रतीक है। कार्यक्रम में चुन्नू टोप्पो, अजय लकड़ा, संजय टोप्पो, राजेश मिंज, रोहित लकड़ा, साबित्रा लकड़ा, लालीन टोप्पो और धनमित मिंज सहित कई लोग उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में उत्साह और श्रद्धा का अद्भुत संगम देखने को मिला।























