- कायस्थ समाज ने कलम-दवात की पूजा कर मांगी बुद्धि और समृद्धि का आशीर्वाद
- जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता हैं भगवान चित्रगुप्त – भूषण लाल
- पापों से मुक्ति और अच्छे कर्मों की प्रेरणा का प्रतीक है यह पूजा
- चित्रगुप्त पूजा में समाज के लोगों की रही सक्रिय भागीदारी, भक्ति और आस्था का अनूठा संगम
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा में गुरुवार को भाई दूज और चित्रगुप्त पूजा का पर्व पूरे हर्षोल्लास और पारंपरिक रीति-रिवाज के साथ मनाया गया। सुबह से ही गुवा के विभिन्न इलाकों — योग नगर, सेवा नगर, स्टेशन कालोनी, विवेक नगर, कैलाश नगर और हिरजीहाटिंग में भाई दूज की पूजा की धूम रही। बहनों ने अपने भाइयों की लंबी उम्र और सुख-समृद्धि की कामना करते हुए पारंपरिक गीत गाए और पूजा-अर्चना की। पूजा के दौरान बहनों ने गाय के गोबर से बने गोधन की लाठी और डंडों से कुटाई की तथा चना और रेघनी के कांटे को चढ़ाया। इसके बाद रेघनी के कांटे को जीभ में चुभाकर भाई को बजरी और लड्डू खिलाया गया, जो पारंपरिक आस्था का प्रतीक है।
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भाई दूज पर बहनों ने निभाई परंपरा, भाइयों की दीर्घायु के लिए की विशेष पूजा
वहीं, कायस्थ समाज के लोगों ने गुवा के योग नगर स्थित चित्रगुप्त मंदिर में भगवान चित्रगुप्त की पूजा की। समाज के सदस्यों ने पारंपरिक रीति से कलम-दवात, बही-खाता और लेखन सामग्री की पूजा-अर्चना की। इस अवसर पर बड़ाजामदा स्थित चित्रगुप्त मंदिर में भी विशेष पूजा का आयोजन किया गया, जहां समाज के सदस्यों ने सामूहिक रूप से आरती उतारी और भक्ति भाव से भगवान चित्रगुप्त की वंदना की।
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कायस्थ समाज ने की कलम-दवात की पूजा, ज्ञान और लेखन में उन्नति की कामना
पूजोत्सव के दौरान गुवा के सेल कर्मी सह समाजसेवी भूषण लाल ने कहा कि भगवान चित्रगुप्त जीवों के कर्मों का लेखा-जोखा रखने वाले देवता हैं। उनकी पूजा न केवल पापों से मुक्ति का मार्ग दिखाती है, बल्कि अच्छे कर्म करने की प्रेरणा भी देती है। उन्होंने बताया कि व्यापार, लेखन और प्रशासन जैसे क्षेत्रों में उन्नति के लिए यह पूजा विशेष महत्व रखती है। इस अवसर पर पुजारी नागेंद्र पाठक, अजीत श्रीवास्तव, इंद्राणी वर्मा, राकेश नंदकोलियर, संजीव सिंहा, अरुण वर्मा, सतीश श्रीवास्तव, निरंजन प्रसाद, मनीष वर्मा और अनुराग सिंहा सहित कई लोग उपस्थित रहे।
























