- आजसू प्रवक्ता अप्पू तिवारी बोले—पीड़ितों को तुरंत आश्रय और पुनर्वास दे जिला प्रशासन, वरना सड़कों पर उतरेगी पार्टी
- पीड़ितों के पुनर्वास की मांग, आजसू बोली—नहीं रुका अन्याय तो होगा बड़ा आंदोलन
जेबी लाइव, रिपोर्टर
भुइयाडीह में अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को लेकर राजनीतिक घमासान तेज हो गया है। गुरुवार को आजसू पार्टी के प्रवक्ता अप्पू तिवारी ने प्रेस विज्ञप्ति जारी कर टाटा स्टील और जेएनएससी पर संयुक्त रूप से गरीबों के खिलाफ कार्रवाई करने का गंभीर आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि जिस तरह से बिना किसी जनप्रतिनिधि की मौजूदगी में गरीब परिवारों के आशियाने उजाड़े गए, वह साफ दर्शाता है कि गरीबों को हटाने का “टेंडर” निकाला गया था। तिवारी ने आरोप लगाया कि शहर में बड़ी-बड़ी अवैध इमारतों को नहीं छुआ जा रहा, जबकि झोपड़ी और कच्चे घरों में रहने वाले गरीबों को निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार की नीति “खाता न बही, जो माल दे दिया वही सही” जैसी है, जो शहर में नहीं चलने दी जाएगी।
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गरीबों के आशियाने पर बुलडोजर, बड़े अवैध निर्माण सुरक्षित—आजसू का आरोप
अप्पू तिवारी ने कहा कि हाईकोर्ट कई बार शहर की अव्यवस्थाओं और प्रदूषण को लेकर सरकार एवं प्रशासन को चेतावनी दे चुका है, लेकिन अधिकारी खुद को राजा समझ बैठे हैं और कोई सुधार करने को तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जब लाल बाबा फाउंड्री को तोड़ने की तैयारी हुई थी, तब सभी दलों ने एकजुट होकर उसका विरोध कर उसे बचा लिया, जबकि भुइयाडीह के गरीब लोगों के लिए कोई नेतृत्व आगे नहीं आया। तिवारी ने आरोप लगाया कि लाल बाबा फाउंड्री से जुड़े व्यवसायियों के टाटा स्टील से प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष संबंध हैं, इसलिए वहां कार्रवाई रोक दी गई, लेकिन गरीबों पर बुलडोजर चलाकर दोहरी नीति अपनाई गई। उन्होंने कहा कि शहर में इस तरह की असमानता को लोग भूलेंगे नहीं और आजसू सही समय पर आवाज उठाएगी।
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लाल बाबा फाउंड्री बची, गरीबों के घर टूटे—आजसू ने दोहरी नीति पर उठाए सवाल
अप्पू तिवारी ने जिला प्रशासन से मांग की कि भुइयाडीह के प्रभावित परिवारों को तत्काल आश्रय की व्यवस्था उपलब्ध कराई जाए और उनके पुनर्वास के लिए उचित कदम उठाए जाएं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन पीड़ित परिवारों के लिए राहत और पुनर्वास की ठोस व्यवस्था नहीं करता, तो आजसू पार्टी सड़क पर उतरकर उग्र आंदोलन करेगी। तिवारी ने कहा कि आजसू गरीबों, दलितों, आदिवासियों और मूलवासियों के हक की लड़ाई लड़ने के लिए प्रतिबद्ध है और आने वाले समय में यह संघर्ष सड़क से सदन तक जारी रहेगा।
























