- कृषि और उद्योगों के विकास में बिजली आपूर्ति की चुनौती, हरित ऊर्जा उत्पादन के बावजूद वितरण व्यवस्था अधूरी
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : भारत में तेजी से बढ़ती बिजली की मांग को पूरा करने में हरित ऊर्जा उत्पादन अहम भूमिका निभा रहा है, लेकिन वितरण व्यवस्था की कमी गंभीर चुनौती बनी हुई है। भाजपा किसान मोर्चा झारखंड प्रदेश के नेता और झारखंड हिन्दू धर्म रक्षा मंच के प्रदेश मंत्री जय प्रकाश पांडेय ने कहा कि बिजली की कमी विकास की गति को रोक रही है। सिंचाई और औद्योगिक क्षेत्रों में उद्योग स्थापित करने वाले लोग प्रभावित हो रहे हैं। भारत सरकार ने 2030 तक 500 मेगावाट गैर-जीवाश्म ऊर्जा उत्पादन का लक्ष्य रखा है, लेकिन ट्रांसमिशन लाइन की कमी से बिजली घरों को उत्पादन घटाना पड़ रहा है। यह स्थिति न केवल निंदनीय है बल्कि हरित ऊर्जा डेवलपर्स को भी भारी नुकसान पहुंचा रही है।
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राजस्थान, गुजरात, महाराष्ट्र और लद्दाख जैसे राज्यों में हरित ऊर्जा से प्राप्त बिजली की सप्लाई गंभीर समस्या बनी हुई है। पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया ने वर्षों तक बिजली लाइनों का मजबूत जाल खड़ा किया है, लेकिन वर्तमान हालात में नवीकरणीय ऊर्जा उत्पादन बढ़ने के बावजूद ट्रांसमिशन व्यवस्था पर्याप्त नहीं है। इससे कृषि और औद्योगिक विकास पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। पांडेय ने कहा कि यदि बिजली उत्पादन पहले पूरा हो जाए और वितरण व्यवस्था अधूरी रहे तो यह देश के विकास के लिए बड़ी बाधा है।
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इस समस्या के समाधान के लिए पांडेय ने सुझाव दिया कि ट्रांसमिशन कार्य अधिक कंपनियों को दिया जाए और जमीन की मंजूरी जल्दी दी जाए। साथ ही जहां बड़े पैमाने पर सोलर या पवन पार्क बने हैं, वहां पावर ट्रांसमिशन का कार्य प्राथमिकता से किया जाए। इससे हरित ऊर्जा से प्राप्त बिजली को बैटरी स्टोरेज और स्थानीय स्तर पर सुरक्षित किया जा सकेगा। भारत को हरित ऊर्जा के माध्यम से वैकल्पिक बिजली उत्पादन में सक्षम बनाकर जल्द ही विकसित राष्ट्रों की श्रेणी में खड़ा किया जा सकता है।
























