- लोक-संस्कृति, परंपरा और भाईचारे का प्रतीक बनेगा टुसु परब
- अंतिम तैयारी बैठक में हुई व्यवस्थाओं पर चर्चा
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : आगामी 4 जनवरी को डिमना से साकची (आमबागान) तक आयोजित होने वाले विशाल डहरे टुसु परब को लेकर आज बालिगुमा स्थित करम आँकड़ा में अंतिम तैयारी बैठक संपन्न हुई। बैठक में आयोजन समिति, बृहद झारखंड कला–संस्कृति मंच एवं विभिन्न सामाजिक-सांस्कृतिक संगठनों से जुड़े प्रतिनिधियों ने कार्यक्रम की पूरी रूपरेखा, मार्ग, समय-सारिणी और व्यवस्थाओं पर विस्तृत चर्चा की। बैठक में यह तय किया गया कि जुलूस सुबह 11 बजे डिमना से प्रारंभ होगा और साकची (आमबागान) तक पहुंचेगा। इस दौरान ढोल-नगाड़ा, मांदर, लोकगीत और पारंपरिक वेशभूषा के साथ टुसु गीतों की प्रस्तुति दी जाएगी, जिससे पूरे मार्ग में लोकपर्व का जीवंत वातावरण बनेगा।
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डहरे टुसु परब की तैयारी में जुटी समिति

बैठक में सहभागियों की सुविधा और पारंपरिक अतिथि-संस्कार की भावना को ध्यान में रखते हुए मार्ग में जलपान की व्यवस्थाओं का विवरण भी दिया गया। संकोसाई स्थित चना मानगो चौक में चाय, पुल के सामने सामूहिक रूप से खिचड़ी और पुराना कोर्ट के सामने मुड़ी-घुगनी की व्यवस्था की गई है। समिति ने कहा कि डहरे टुसु परब लोक-प्रकृति-धान (डिनी) आधारित पर्व है, जो कृषि संस्कृति, सामूहिक श्रम और आपसी भाईचारे का प्रतीक है। कार्यक्रम को पूरी तरह पारंपरिक, शांतिपूर्ण और अनुशासित रूप में सम्पन्न कराने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि इसकी मौलिक पहचान बनी रहे और किसी भी प्रकार का विकृतिकरण न हो।
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व्यापक सहभागिता और लोक-संस्कृति से जोड़ने का उद्देश्य
आयोजन समिति ने बताया कि इस कार्यक्रम में पूर्वी सिंहभूम जिला सहित संपूर्ण झारखंड एवं बृहद झारखंड क्षेत्र से बड़ी संख्या में ग्रामीण, महिला समूह, युवा और सांस्कृतिक दल शामिल होंगे। इसका उद्देश्य टुसु परब को व्यापक पहचान दिलाना और नई पीढ़ी को अपनी लोक-संस्कृति, परंपरा और सामाजिक एकता से जोड़ना है। समिति ने आम नागरिकों, सामाजिक संगठनों और संस्कृति प्रेमियों से अपील की कि वे 4 जनवरी को डिमना से साकची तक आयोजित इस कार्यक्रम में सहभागी बनकर इसे सफल और यादगार बनाएं।
























