- छोटू कर्मकार की मौत के बाद जनता दल (यू) ने उठाई आवाज़, सरकार से की सख्त कार्रवाई और सुधार की मांग
- JDU नेता की मांग—दोषियों पर कार्रवाई और स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार को लेकर सरकार जागे
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर में स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। बाबूडीह, लाल भट्टा निवासी युवक छोटू कर्मकार की दर्दनाक मौत के बाद जनता दल (यू) के महानगर सचिव विकास कुमार ने विभाग पर सीधा हमला बोला है। विकास कुमार ने कहा कि छोटू कर्मकार की मौत “लचर स्वास्थ्य व्यवस्था” की देन है। परसुडीह में कार दुर्घटना में घायल होने के बाद परिजन उसे लेकर सदर अस्पताल से एमजीएम अस्पताल तक भटकते रहे, लेकिन उचित इलाज न मिलने से उसकी असामयिक मृत्यु हो गई। उन्होंने इसे स्वास्थ्य विभाग की “घोर लापरवाही” और “असंवेदनशील रवैये” का नतीजा बताया।
इसे भी पढ़ें : Gua : संयुक्त यूनियनों का सेल प्रबंधन के खिलाफ मोर्चा, स्थानीय रोजगार और मजदूर हितों को लेकर गरजे श्रमिक
फिर उजागर हुई स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही, युवक की मौत से लोगों में आक्रोश
विकास कुमार ने कहा कि यह घटना बेहद शर्मनाक है कि दीपावली जैसे उत्सव के बीच एक परिवार अपने बेटे की मौत का शोक मना रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार जहां योजनाओं के नाम पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, वहीं ज़मीनी स्तर पर अस्पतालों में बुनियादी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। मरीजों को इमरजेंसी स्थिति में सही इलाज न मिलना, पूरे स्वास्थ्य तंत्र की नाकामी को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि एक ओर शहर रोशनी से जगमगा रहा था, वहीं छोटू कर्मकार का घर स्वास्थ्य विभाग की उदासीनता के कारण अंधेरे में डूब गया।
इसे भी पढ़ें : Seraikela : शहीद अजीत धनंजय महतो की 43वीं शहादत दिवस पर श्रद्धांजलि सभा, मोटरसाइकिल जुलूस के साथ किया गया नमन
दीपावली की रोशनी में अंधेरा—अस्पतालों की बदइंतजामी से बुझा एक घर का चिराग
जनता दल (यू) महानगर सचिव ने इस मामले में तीन सूत्रीय मांगें रखीं। पहली, दुर्घटनास्थल के सीसीटीवी फुटेज के आधार पर जिम्मेदार लोगों की पहचान कर उनके खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। दूसरी, मृतक के आश्रितों को तत्काल उचित मुआवजा दिया जाए। तीसरी, सरकार अस्पतालों में आपातकालीन सेवाओं को मजबूत करे और इमरजेंसी चिकित्सा व्यवस्था को दुरुस्त करने के ठोस कदम उठाए। विकास कुमार ने कहा कि यह मामला केवल एक व्यक्ति की मौत का नहीं, बल्कि पूरे सिस्टम की विफलता का प्रतीक है, जिस पर सरकार को तुरंत संज्ञान लेना चाहिए।
























