फोटो कैप्शन : यूसिल में निकाली बहाली का विरोध जताते यूसिल नरवा पहाड़ विस्थापित कमिटी
- विस्थापित कमिटी की मांग- पहले प्रशिक्षित कर स्थानीय लोगों को मिले नौकरी, अन्यथा बहाली रद्द हो
- ऑल इंडिया स्तर की बहाली से स्थानीय लोग वंचित: विस्थापितों का आक्रोश
- शिक्षित बेरोजगारों ने उठाए सवाल : अपनी ही जमीन पर नौकरी क्यों नहीं?
- विस्थापितों ने एकजुट होकर कंपनी प्रबंधन को दिया कड़ा संदेश
जेबी लाइव, रिपोर्टर
भारत सरकार की प्रतिष्ठित संस्था, यूरेनियम कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड (UCIL), द्वारा माइनिंग मेट, वाइंडिंग ड्राइवर समेत 107 पदों के लिए निकाली गई बहाली का विरोध तेज हो गया है। आज सोमवार को जादूगोड़ा स्थित हाड़तोपा पंचायत भवन में नरवा पहाड़ विस्थापित कमिटी के अध्यक्ष बुधराय किस्कू की अगुवाई में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक की अध्यक्षता झामुमो के जिला प्रमुख संयोजक बाघराय मार्डी ने की, जिसमें महुलडीह माइंस के विस्थापितों ने भी हिस्सा लिया। कमिटी के अध्यक्ष बुधराय किस्कू ने यूसील प्रबंधन से कड़ी मांग करते हुए कहा कि थर्ड और फोर्थ ग्रेड की बहाली में पहले विस्थापितों, प्रभावितों और स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित (Trained) किया जाए और उसके बाद ही बहाली प्रक्रिया शुरू की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसा करने से ही विस्थापित और मूलवासियों को कंपनी के नियोजन में उचित लाभ मिल पाएगा, अन्यथा वे नौकरियों से वंचित हो जाएंगे। किस्कू ने आरोप लगाया कि वर्तमान विज्ञापन में जो प्रावधान किए गए हैं, उससे यूसील की सातों यूरेनियम खदानों के रैयतों के परिवार और प्रभावित क्षेत्र के लोग नौकरी पाने से वंचित हो जाएंगे।
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : धालभूमगढ़ एयरपोर्ट का नाम ‘दिशोम गुरु शिबू सोरेन इंटरनेशनल एयरपोर्ट’ हो – विजय आनंद मूनका
यूसील पर नियोजन के मुद्दे पर सौतेला व्यवहार करने का आरोप
विस्थापित नेता बुधराय किस्कू ने आरोप लगाया कि यूसील प्रबंधन वर्षों से आदिवासियों के साथ नियोजन के मुद्दे पर सौतेला व्यवहार करता आ रहा है, ताकि नियोजन का फायदा विस्थापितों व प्रभावितों को नहीं मिल सके। उन्होंने कड़ा रुख अपनाते हुए ऑल इंडिया स्तर पर निकाली गई इस बहाली को तत्काल रद्द करने की मांग उठाई है, अन्यथा जोरदार आंदोलन की चेतावनी दी गई है। इस दौरान, झामुमो जिला प्रमुख संयोजक बाघराय मार्डी ने भी विस्थापितों के आंदोलन के साथ एकजुटता दिखाई। उन्होंने कहा कि यूसील की सात यूरेनियम खदानों के विस्थापितों को एकजुट कर आंदोलन की पृष्ठभूमि तैयार की जा रही है, ताकि आगे एक बड़ा आंदोलन खड़ा करके बहाली को रद्द कराया जा सके। मार्डी ने कहा कि कंपनी विस्थापितों को बिना प्रशिक्षण दिलाए 107 पदों की बहाली निकालकर स्थानीय लोगों की नौकरी छीनना चाहती है, और प्रबंधन की यह मनमानी किसी भी कीमत पर नहीं चलने दी जाएगी।
इसे भी पढ़ें : Ghatsila : लिली फ़ाउंडेशन का 22वाँ वार्षिक एडकॉन समारोह 2025: शिक्षा, सेवा और संवेदना का भव्य उत्सव
झामुमो नेता बाघराय मार्डी ने आंदोलन का किया समर्थन
बैठक में शामिल स्थानीय शिक्षित बेरोजगार विस्थापित महिला प्रीति मार्डी ने अपनी व्यथा व्यक्त करते हुए कहा कि जब कंपनी उनके गांव में ही स्थापित है, तो उन्हें नौकरी के लिए बाहर क्यों जाना पड़े? उन्होंने मांग की कि नियोजन में स्थानीय लोगों को प्रशिक्षित कर कंपनी कुशल बनाए, ताकि उन्हें अपनी ही जमीन पर नौकरी मिल सके। एक अन्य ग्रामीण वर्षा टुडू ने कहा कि उन्हें यूसील से रोजगार की उम्मीद है, ताकि वे आगे बढ़ सकें। उन्होंने आरोप लगाया कि विस्थापितों को बिना प्रशिक्षण दिए बहाली निकालना विस्थापितों के साथ घोर अन्याय है। उन्होंने कंपनी से मांग की कि वह अपनी बहाली में 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को नियोजन सुनिश्चित करे। इस दौरान, बैठक में शामिल विस्थापित नेताओं ने यह स्पष्ट कर दिया कि यदि उनकी मांगों पर तत्काल विचार नहीं किया गया, तो यूसील के खिलाफ एक व्यापक और अनिश्चितकालीन आंदोलन शुरू किया जाएगा।
इसे भी पढ़ें : Ranchi : मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने कुणाल षाडंगी के ट्वीट पर लिया संज्ञान, मॉरीशस से पार्थिव शरीर लाने के दिए निर्देश
स्थानीय महिलाओं ने 75% नियोजन की रखी मांग, बैठक में विस्थापित नेताओं की व्यापक उपस्थिति
नरवा पहाड़ विस्थापित कमिटी अध्यक्ष बुधराय किस्कू की अगुवाई में आयोजित इस महत्वपूर्ण बैठक में झामुमो जिला प्रमुख बाघराय मार्डी, पाथर चाकरी ग्राम प्रधान दसमत मुर्मू, कमिटी के महासचिव मोची राम सोरेन, हड़तोपा के ग्राम प्रधान पर्वत किस्कू, कोषाध्यक्ष मदन मोहन दास, विद्या सागर दास, बुढन मुर्मू समेत भारी संख्या में विस्थापितों ने भाग लिया। विस्थापित नेताओं ने एकजुट होकर कंपनी प्रबंधन को यह संदेश दिया कि वे अब अपने अधिकारों के लिए किसी भी स्तर तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि स्थानीय लोगों और विस्थापितों को उनका हक देना यूसील की नैतिक और सामाजिक जिम्मेदारी है।
























