- ग्लास ब्रिज और रोपवे निर्माण पर वन दोहन का आरोप, ग्राम सभा सुरक्षा मंच ने दी आंदोलन की चेतावनी
- स्थाई विकास की मांग, बड़े आंदोलन की तैयारी में ग्रामीण
जेबी लाइव, रिपोर्टर
सरायकेला जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र स्थित दलमा अभ्यारण्य में प्रस्तावित 200 फीट लंबे ग्लास ब्रिज, रोपवे और अन्य पर्यटन परियोजनाओं को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और ग्राम सभाओं में नाराज़गी लगातार बढ़ती जा रही है। दलमा क्षेत्र ग्राम सभा सुरक्षा मंच, कोल्हान ने इन परियोजनाओं को “पर्यटन के नाम पर वन दोहन” बताते हुए तीखा विरोध जताया है। मंच के सचिव दलमा टाइगर सुकलाल पहाड़िया का आरोप है कि वन विभाग पर्यटन विकास के नाम पर जंगलों की कटाई, पर्यावरणीय हानि और वनाधिकार कानून की अनदेखी करते हुए ग्राम सभा की अनुमति के बिना ही कार्य आगे बढ़ा रहा है। उन्होंने कहा कि विभाग स्थानीय समुदायों को योजनाओं से दूर रख रहा है, जबकि अभ्यारण्य क्षेत्र आदिवासी समाज की सांस्कृतिक धरोहर और जीवन शैली से गहराई से जुड़ा है।
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स्थानीयों का आरोप—पर्यटन के नाम पर हो रही है जंगलों की कटाई
ग्रामीणों का स्पष्ट आरोप है कि वन विभाग ने किसी भी ग्राम सभा से लिखित सहमति नहीं ली और न ही परियोजना से जुड़ी संभावित पर्यावरणीय व सामाजिक प्रभावों पर कोई चर्चा की। ग्रामीणों का कहना है कि दलमा अभ्यारण्य सदियों से आदिवासी समुदायों की आस्था, जीविका और परंपरागत अधिकारों का केंद्र रहा है। ऐसे में बिना सहमति किसी भी निर्माण कार्य को अधिकारों का सीधा हनन माना जाएगा। कई ग्रामीणों ने बताया कि वे बार-बार लिखित आपत्तियाँ दे रहे हैं, लेकिन विभाग से कोई जवाब नहीं आता। इससे समुदाय में वन विभाग पर अविश्वास और नाराज़गी और गहराती जा रही है।
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ग्राम सभा की सहमति बिना शुरू हुए काम पर ग्रामीणों की कड़ी आपत्ति
पर्यावरणविदों ने भी ग्लास ब्रिज और रोपवे परियोजना पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका मानना है कि हजारों पर्यटकों की आवाजाही से दलमा के वन्यजीवों, विशेषकर हाथियों के प्राकृतिक विचरण मार्गों पर गंभीर असर पड़ेगा। मंच के सचिव सुकलाल पहाड़िया ने बताया कि निर्माण क्षेत्र में भारी मशीनरी के उपयोग से पहाड़ों की प्राकृतिक संरचना प्रभावित हो सकती है, जबकि पेड़ों की कटाई के चलते वन्यजीवों की गतिविधियाँ पहले ही घटने लगी हैं। उन्होंने दावा किया कि पिछले पाँच वर्षों में दलमा गज परियोजना सेंचुरी से हाथियों का पलायन बढ़ा है और वर्तमान में सेंचुरी में एक भी हाथी स्थायी रूप से नहीं रुक रहा। विभाग इस मुद्दे पर मौन है और इसके विपरीत सेंचुरी को पर्यटक स्थल बनाने की तैयारियाँ तेज कर दी गई हैं।
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वन्यजीवों की गतिविधियाँ घटने का दावा, हाथियों के पलायन पर चिंता
स्थानीय संगठनों का कहना है कि वन विभाग “ऊपर से आदेश” का हवाला देकर अपनी जिम्मेदारियों से बचने की कोशिश कर रहा है। सुकलाल पहाड़िया ने आरोप लगाया कि कभी इको-टूरिज्म तो कभी पर्यटन विकास के नाम पर पर्यावरणीय संतुलन बिगाड़ने वाले कदम उठाए जा रहे हैं। उनका कहना है कि ग्राम सभा सर्वोच्च इकाई है और उसकी अनुमति के बिना किसी भी प्रकार की परियोजना शुरू करना कानूनन गलत है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि वन विभाग ने जल्द ही ग्राम सभा से औपचारिक वार्ता शुरू नहीं की और विवादित परियोजनाओं को रोका नहीं गया तो आंदोलन तेज किया जाएगा।
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वन विभाग पर जिम्मेदारी से बचने का आरोप, ग्राम सभाओं की अनदेखी से गुस्सा
ग्राम सभा सुरक्षा मंच और ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि वे विकास के विरोधी नहीं हैं, लेकिन विकास पर्यावरणीय और सामाजिक संतुलन की कीमत पर नहीं होना चाहिए। उनका कहना है कि किसी भी प्रकार के पर्यटन विकास कार्य से पहले पर्यावरणीय प्रभाव मूल्यांकन (EIA), सामाजिक सर्वे और ग्राम सभा की पूर्व अनुमति अनिवार्य है। ग्रामीणों द्वारा बड़े पैमाने पर धरना, रैली और जन-जागरूकता अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। दलमा अभ्यारण्य में पर्यटन परियोजनाओं को लेकर यह बढ़ता संघर्ष आने वाले दिनों में प्रशासन और आदिवासी समुदायों के बीच बड़ा टकराव बन सकता है, जिसका प्रभाव व्यापक क्षेत्र में देखने को मिल सकता है।
























