- 03 से 23 दिसंबर तक गांव-गांव घूमकर बाल विवाह उन्मूलन का संदेश देगा जागरूकता रथ
- बाल संरक्षण कानूनों की जानकारी भी देगा जागरूकता रथ
जेबी लाइव, रिपोर्टर
सरायकेला समाहरणालय परिसर से बुधवार को उपायुक्त नितिश कुमार सिंह ने बाल विवाह मुक्त भारत अभियान के तहत जागरूकता रथ को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया। यह विशेष जन-जागरूकता अभियान 03 दिसंबर से 23 दिसंबर 2025 तक जिले के विभिन्न गांवों में संचालित होगा। कार्यक्रम की शुरुआत हस्ताक्षर अभियान के साथ हुई, जिसके माध्यम से उपायुक्त ने जनता से बाल विवाह के उन्मूलन के लिए सामाजिक प्रतिबद्धता निभाने का आग्रह किया। जागरूकता रथ ग्रामीण क्षेत्रों में पहुँचकर बाल विवाह के दुष्परिणामों और कानूनी प्रावधानों को लोगों तक पहुंचाएगा।
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बाल विवाह रोकथाम को लेकर प्रशासन का विशेष जागरूकता अभियान शुरू
उपायुक्त ने कहा कि बाल विवाह एक गंभीर सामाजिक कुरीति है, जिसे समाप्त करने के लिए सामूहिक प्रयास अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने बताया कि बाल विवाह के खिलाफ स्पष्ट कानूनी प्रावधान होने के बावजूद समाज के कुछ हिस्सों में यह परंपरा अब भी जारी है, जो चिंता का विषय है। उपायुक्त के अनुसार, बाल विवाह न केवल कानूनन अपराध है बल्कि यह बच्चों के भविष्य, स्वास्थ्य और विकास को गंभीर रूप से प्रभावित करता है। इसलिए जन-जागरूकता बढ़ाना और समुदाय को इस मुद्दे पर संवेदनशील बनाना अत्यंत जरूरी है।
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उपायुक्त ने बताया—कानूनी प्रावधानों के बावजूद जारी है कुप्रथा
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि कम उम्र में गर्भधारण होने पर जच्चा और बच्चा दोनों को जान का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, छोटी उम्र में वैवाहिक जिम्मेदारियाँ संभालने के कारण बालिकाओं में मानसिक तनाव बढ़ता है और उनकी शिक्षा एवं विकास बाधित होता है। बाल विवाह जैसी कुप्रथाएँ समाज की जनसांख्यिकीय संरचना को भी प्रभावित करती हैं, जिससे दीर्घकालिक विकास प्रक्रिया को नुकसान पहुँचता है। इसी वजह से बाल विवाह पर रोक लगाने के लिए प्रशासन लगातार जागरूकता कार्यक्रम चला रहा है।
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कम उम्र में विवाह से बढ़ते स्वास्थ्य जोखिम पर प्रशासन का जोर
उपायुक्त ने जिलेवासियों से अपील की कि वे बाल विवाह रोकने में प्रशासन को सहयोग दें और कहीं भी ऐसी घटना या आशंका दिखे तो तुरंत सूचना दें। उन्होंने कहा कि विवाह के लिए लड़कों की न्यूनतम आयु 21 वर्ष और लड़कियों की 18 वर्ष निर्धारित है। इन कानूनी प्रावधानों का उल्लंघन करने पर एक लाख रुपये तक का जुर्माना, दो वर्ष तक की जेल या दोनों की सजा का प्रावधान है। जागरूकता रथ के माध्यम से बाल श्रम, बाल तस्करी, बाल यौन शोषण तथा बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम 2006 से संबंधित जानकारी भी जनता तक पहुंचाई जाएगी। कार्यक्रम में एसडीओ निवेदिता नियति, जिला समाज कल्याण पदाधिकारी सत्या ठाकुर सहित कई विभागों के पदाधिकारी व कर्मी मौजूद रहे।
























