- लकड़ी ढेकी से बनी गुड़ी और गौ माता की पूजा के साथ श्रद्धा और उत्साह से मनाया गया पर्व
- गौ माता की साज-सज्जा और रांगोली से खिला लुपुंगडीह गांव
जेबी लाइव, रिपोर्टर
सरायकेला-खरसावां जिले के चांडिल अनुमंडल क्षेत्र के लुपुंगडीह गांव में बुधवार को गिरिगोवर्धन पूजा का आयोजन बड़ी श्रद्धा और हर्षोल्लास के साथ किया गया। भगवान कृष्ण द्वारा गोवर्धन पर्वत उठाने की पौराणिक कथा से जुड़ा यह पर्व दीपावली के दूसरे दिन मनाया जाता है। ग्रामीण महिलाओं ने पारंपरिक लकड़ी ढेकी से चावल पीसकर देशी घी में गुड़ी तैयार की और मंदिर में पहुंचकर भगवान कृष्ण एवं गिरिगोवर्धन पर्वत की पूजा-अर्चना की। पूजा के दौरान महिलाओं ने ओहिर गीत गाए, जिससे पूरा गांव भक्तिमय वातावरण में डूब गया। इस दिन गौ माता की पूजा विशेष रूप से की जाती है, जिसे ग्रामीण परंपरा और कृषि संस्कृति से जुड़ा हुआ माना जाता है।
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भक्ति और परंपरा का संगम—लुपुंगडीह में महिलाओं ने गाया ओहिर गीत, की गोवर्धन पूजा
गांव की महिलाएं इस अवसर पर अपने घरों के आंगन को रंग-बिरंगी रांगोली से सजाती हैं और गौ माता एवं बछड़ों को उसके ऊपर चलाती हैं, जो आकर्षक दृश्य प्रस्तुत करता है। गौ माता को धान की मड़ और प्राकृतिक रंगों से सजाया जाता है। शाम को विशेष पूजा-अर्चना के बाद मिष्ठान खिलाने की परंपरा निभाई जाती है। यह पर्व न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि प्रकृति, पशु और कृषि जीवन के प्रति सम्मान का संदेश भी देता है। स्थानीय लोगों ने बताया कि इस पूजा के अगले दिन पारंपरिक सोहराय पर्व मनाया जाता है, जो पशुधन के प्रति कृतज्ञता का प्रतीक है।
























