- NALSA (ASHA) योजना के तहत बैठक, JMFC को निषेधाज्ञा अधिकार पर विशेष जोर
- 100 दिवसीय एक्शन प्लान से बदलेगा बाल संरक्षण का परिदृश्य
जेबी लाइव, रिपोर्टर
बाल विवाह की रोकथाम और बच्चों के मौलिक अधिकारों की रक्षा को लेकर सरायकेला-खरसावां जिले में एक महत्वपूर्ण पहल देखने को मिली। Society for Enlightenment and Voluntary Action एवं अन्य बनाम भारत संघ मामले में माननीय सर्वोच्च न्यायालय द्वारा जारी दिशानिर्देशों के आलोक में जिले में गहन विचार-विमर्श किया गया। यह चर्चा NALSA (ASHA) योजना के अंतर्गत आयोजित बैठक में हुई, जिसमें बाल विवाह को सामाजिक कुरीति बताते हुए इसे जड़ से समाप्त करने की आवश्यकता पर बल दिया गया। बैठक का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना रहा कि न्यायिक और प्रशासनिक तंत्र समय रहते हस्तक्षेप कर बच्चों को कानूनी संरक्षण उपलब्ध करा सके और बाल विवाह जैसी घटनाओं को होने से पहले ही रोका जा सके।
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बाल अधिकारों की सुरक्षा पर सुप्रीम कोर्ट की सख्त टिप्पणी
यह बैठक माननीय झारखंड राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, रांची के दिशा-निर्देशों के अनुपालन में तथा प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश-सह-अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, सरायकेला-खरसावां रामाशंकर सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता Learned Secretary, DLSA सरायकेला-खरसावां तौसीफ मेराज ने की। उन्होंने उपस्थित अधिकारियों और प्रतिनिधियों को NALSA (ASHA) योजना के उद्देश्यों, इसकी कार्य-प्रणाली और समाज पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभावों के बारे में विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह योजना विशेष रूप से बच्चों, महिलाओं और कमजोर वर्गों तक न्याय की पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक सशक्त माध्यम है।
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NALSA (ASHA) योजना से कैसे बदलेगी जमीनी हकीकत
बैठक में सुप्रीम कोर्ट द्वारा जारी मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) पर विशेष चर्चा की गई। इसमें यह स्पष्ट किया गया कि न्यायालय ने ज्यूडिशियल मजिस्ट्रेट फर्स्ट क्लास (JMFC) तक के न्यायिक अधिकारियों को बाल विवाह के मामलों में निषेधाज्ञा जारी करने का अधिकार दिया है। इसका अर्थ यह है कि संभावित बाल विवाह की सूचना मिलने पर न्यायिक अधिकारी स्वतः संज्ञान लेते हुए तत्काल आदेश पारित कर सकते हैं, जिससे विवाह को संपन्न होने से पहले ही रोका जा सके। उपस्थित अधिकारियों ने इस प्रावधान को त्वरित न्याय और प्रभावी हस्तक्षेप की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम बताया, जो बच्चों के शिक्षा, स्वास्थ्य, गरिमा और स्वतंत्र जीवन के अधिकारों की रक्षा करेगा।
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JMFC को मिले नए अधिकार, बाल विवाह पर लगेगी लगाम
बैठक के दौरान दो ऐसे बच्चों की पहचान की गई, जिन्हें NALSA (ASHA) योजना के अंतर्गत तत्काल सहायता की आवश्यकता है। Secretary, DLSA ने बताया कि इन बच्चों के लिए कानूनी सहायता, संरक्षण, परामर्श और पुनर्वास से संबंधित प्रक्रिया शीघ्र प्रारंभ की जाएगी। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाएगा कि उन्हें सरकार द्वारा संचालित विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं का लाभ समय पर मिले। इस अवसर पर जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी (DCPO), बाल कल्याण समिति (CWC) के सदस्य, तथा अन्य संबंधित विभागों और सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि भी मौजूद रहे। सभी ने बच्चों के हित में आपसी समन्वय और सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई।
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बाल संरक्षण के लिए विभागों के बीच बढ़ेगा समन्वय
बैठक में NALSA (ASHA) 100 दिवसीय एक्शन प्लान पर भी विस्तृत चर्चा हुई। Secretary, DLSA ने कहा कि यह एक्शन प्लान समाज के सबसे कमजोर और वंचित वर्ग तक न्याय पहुंचाने का एक सशक्त अभियान है। उन्होंने सभी विभागों, संस्थाओं और सामाजिक संगठनों से इसमें सक्रिय भागीदारी निभाने का आह्वान किया। बैठक के अंत में सभी प्रतिभागियों ने यह सामूहिक संकल्प लिया कि वे सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों और NALSA (ASHA) योजना को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करेंगे। यह बैठक जिले में बाल विवाह की रोकथाम, बच्चों के संरक्षण और न्याय तक पहुंच सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण और सकारात्मक कदम के रूप में देखी जा रही है।
























