पोटका, जमशेदपुर और डुमरिया में एक साथ प्रदर्शन, केंद्र सरकार के खिलाफ सौंपा गया ज्ञापन
34 पंचायतों से पहुंचे कार्यकर्ता, संगठन की एकजुटता का प्रदर्शन
जेबी लाइव, रिपोर्टर
पोटका : पोटका विधानसभा क्षेत्र में शनिवार को खान एवं खनिज (संशोधन) विधेयक (एमएमडीआर) के विरोध में झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) ने व्यापक प्रदर्शन किया। पोटका, जमशेदपुर और डुमरिया प्रखंड मुख्यालयों में आयोजित धरना-प्रदर्शन में हजारों महिला-पुरुष शामिल हुए। पोटका प्रखंड मुख्यालय में सबसे बड़ी भीड़ देखने को मिली, जहां करीब पांच हजार लोगों के शामिल होने का दावा किया गया। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की और विधेयक वापस लेने की मांग उठाई। बाद में बीडीओ और सीओ को राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन सौंपकर विरोध दर्ज कराया गया। ग्रामीण क्षेत्रों से बड़ी संख्या में लोगों की भागीदारी ने कार्यक्रम को जनआंदोलन का स्वरूप दे दिया।
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तीन प्रखंडों में एक साथ प्रदर्शन, झामुमो ने दिखाई ताकत
धरना-सभा को संबोधित करते हुए पोटका विधायक संजीव सरदार ने केंद्र सरकार पर झारखंड के अधिकारों को कमजोर करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि झारखंड की खनिज संपदा राज्य की सबसे बड़ी पूंजी है और इस पर पहला अधिकार यहां की जनता का होना चाहिए। विधायक ने कहा कि जल, जंगल, जमीन और खनिज झारखंड की पहचान हैं तथा इनके संरक्षण और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष जारी रहेगा। उन्होंने लोगों से लोकतांत्रिक तरीके से अपनी आवाज बुलंद करने और राज्यहित के मुद्दों पर एकजुट रहने की अपील की।
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खनिज संपदा पर झारखंड के अधिकार की उठी मांग
सभा के दौरान संजीव सरदार ने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार की नीतियां राज्य के हितों को प्रभावित कर सकती हैं। उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता ने अपने अधिकारों के लिए लंबे संघर्ष के बाद अलग राज्य हासिल किया है और अब खनिज संसाधनों से जुड़े मुद्दों पर भी जनता को जागरूक रहना होगा। उन्होंने कहा कि राज्य के विकास और ग्रामीण क्षेत्रों की प्रगति में खनिज संपदा से मिलने वाले संसाधनों की महत्वपूर्ण भूमिका है। इस कारण राज्य के अधिकारों और हितों की रक्षा को लेकर जनता को संगठित रहना चाहिए।
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राज्यहित के मुद्दों पर एकजुट रहने का आह्वान
विधायक ने अपने संबोधन में राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि मंइयां सम्मान योजना, अबुआ आवास योजना, पेंशन योजना तथा अन्य सामाजिक कल्याण कार्यक्रमों का लाभ बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंच रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि एमएमडीआर विधेयक का असर राज्य की आर्थिक संरचना और विकास योजनाओं पर पड़ सकता है। इस दौरान उन्होंने कहा कि झारखंड की जनता के सहयोग से सड़क से लेकर सदन तक लोकतांत्रिक आंदोलन जारी रहेगा और राज्य के हितों से जुड़ा कोई भी मुद्दा मजबूती से उठाया जाएगा।
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जनकल्याणकारी योजनाओं पर प्रभाव को लेकर जताई चिंता
प्रदर्शन में पोटका विधानसभा क्षेत्र की 34 पंचायतों से कार्यकर्ता और ग्रामीण शामिल हुए। कार्यक्रम में पर्यवेक्षक मोहन कर्मकार, राजू गिरि, सुनील महतो, बबलू चौधरी, चंद्रावती महतो, हीरामनी मुर्मू, रजनी षांडगी, भुगलु टुडू, कार्तिक मुर्मू, बाघराय सोरेन, दुखु मार्डी, सुधीर सोरेन, भुवनेश्वर सरदार, हितेश भगत, चक्रधर महतो, मो. जमाल, भूपति महतो, बनमाली महतो और बीरेन पात्र समेत कई नेता एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे। तीनों प्रखंडों में एक साथ हुए कार्यक्रम को झामुमो ने अपनी संगठनात्मक एकजुटता और जनभागीदारी का प्रतीक बताया।