श्मशान घाट और पुश्तैनी जमीन के दावे को लेकर बढ़ा तनाव, पुलिस ने शांति बनाए रखने की अपील की
पुलिस ने दोनों पक्षों को राजस्व विभाग से संपर्क करने की दी सलाह
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : बड़ाजामदा फुटबॉल मैदान क्षेत्र में जमीन को लेकर दो पक्षों के बीच विवाद गहरा गया, जिसके बाद मामला थाना तक पहुंच गया। हो आदिवासी समाज के लोगों ने आरोप लगाया कि विवादित भूमि का उपयोग उनके पूर्वज चार पीढ़ियों से श्मशान घाट के रूप में करते आ रहे हैं और वहां समुदाय के लोगों के शव दफनाए जाते हैं। उनका कहना है कि दूसरे पक्ष द्वारा बुलडोजर चलाकर जमीन की साफ-सफाई की जा रही थी और उस भूमि को निजी संपत्ति बताया जा रहा था, जिसका स्थानीय लोगों ने विरोध किया। विरोध के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं भी मौके पर पहुंच गईं, जिससे क्षेत्र में तनाव की स्थिति उत्पन्न हो गई।
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श्मशान घाट की जमीन बताकर ग्रामीणों ने जताया विरोध

दूसरे पक्ष के मनोज वर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि विवादित भूमि कुल एक एकड़ 19 डिसमिल है और यह उनके पूर्वजों की पुश्तैनी जमीन है। उन्होंने बताया कि वर्ष 1976 में जमीन की विधिवत रजिस्ट्री कराई गई थी तथा वे लगातार मालगुजारी टैक्स का भुगतान करते आ रहे हैं। मनोज वर्मा के अनुसार उनके पास जमीन से संबंधित सभी वैध दस्तावेज और रजिस्ट्री कागजात मौजूद हैं। उन्होंने कहा कि जमीन की बंदोबस्ती के लिए मापी कराई गई थी और उसके बाद बाउंड्री वॉल निर्माण की तैयारी की जा रही थी। इसी दौरान कुछ लोगों ने निर्माण कार्य का विरोध शुरू कर दिया। मनोज वर्मा ने यह भी आरोप लगाया कि हो आदिवासी समाज के लोगों ने बड़ाजामदा मुखिया दिगंबर चातोम्बा की अध्यक्षता में ग्रामसभा कर उनकी जमीन पर दावा करने की कोशिश की है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर वे न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे।
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पुश्तैनी जमीन होने का दावा कर कोर्ट जाने की चेतावनी
इधर, बड़ाजामदा थाना पुलिस ने दोनों पक्षों की शिकायत सुनने के बाद मामले को राजस्व विभाग से जुड़ा विवाद बताया। पुलिस ने दोनों पक्षों को अंचल अधिकारी के समक्ष लिखित आवेदन देने की सलाह दी और शांति बनाए रखने की अपील की। थाना प्रभारी ने स्पष्ट किया कि किसी भी पक्ष को कानून हाथ में लेने की अनुमति नहीं दी जाएगी। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराया और बाद में उन्हें अपने-अपने घर भेज दिया। फिलहाल क्षेत्र में स्थिति सामान्य बताई जा रही है, लेकिन विवाद को लेकर स्थानीय लोगों में चर्चा बनी हुई है।





















