पोटका के भाजपा बूथ अध्यक्ष मंगल हेंब्रम ने प्रशासन से निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई की मांग की
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार, निष्पक्ष जांच की मांग तेज
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : पूर्वी सिंहभूम जिले के पोटका प्रखंड से लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक स्वतंत्रता से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। पोटका विधानसभा क्षेत्र के बूथ संख्या-98 के भाजपा अध्यक्ष मंगल हेंब्रम ने अपने परिवार के सामाजिक बहिष्कार और जान से मारने की धमकी दिए जाने का आरोप लगाते हुए गुरुवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर न्याय की गुहार लगाई। तालसा गांव निवासी मंगल हेंब्रम ने प्रशासन को सौंपे गए आवेदन में कहा है कि उन्हें और उनके परिवार को केवल भाजपा से जुड़े होने तथा विस्थापितों के अधिकारों की लड़ाई में सक्रिय भूमिका निभाने के कारण निशाना बनाया जा रहा है। उन्होंने प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच कर उचित कार्रवाई की मांग की है।
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राजनीतिक गतिविधियों के कारण प्रताड़ना का आरोप
मंगल हेंब्रम ने आरोप लगाया कि गांव के पारंपरिक प्रधान और कुछ ग्रामीणों द्वारा उन पर भाजपा छोड़कर झारखंड मुक्ति मोर्चा में शामिल होने का दबाव बनाया गया। जब उन्होंने ऐसा करने से इनकार किया तो उनके खिलाफ सामाजिक बहिष्कार का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि 1 जून को तुरामडीह यूसिल माइंस में विस्थापितों और प्रभावित ग्रामीणों की मांगों को लेकर आयोजित आंदोलन में उन्होंने भाग लिया था, जिसमें भाजपा के कई वरिष्ठ नेता भी मौजूद थे। आरोप है कि इसी बात से नाराज होकर उसी रात गांव में एक बैठक आयोजित की गई और उनके खिलाफ कार्रवाई का निर्णय लिया गया। ड्यूटी पर होने के कारण वह बैठक में शामिल नहीं हो सके, लेकिन बैठक में मौजूद लोगों के सामने कथित रूप से उनके सामाजिक बहिष्कार का फैसला लिया गया।
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यूसिल आंदोलन में भागीदारी के बाद बढ़ा विवाद
भाजपा नेता के अनुसार, बैठक के बाद देर रात बड़ी संख्या में लोग उनके घर पहुंचे और उनकी मां को सामाजिक बहिष्कार का फरमान सुनाया। उन्होंने आरोप लगाया कि परिवार को गांव के सामाजिक कार्यक्रमों से अलग करने, ग्रामीणों को उनसे बातचीत नहीं करने, चापाकल और तालाब के उपयोग पर रोक लगाने तथा बिजली-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित करने की धमकी दी गई। साथ ही उनके करीबी लोगों को भी गांव छोड़ने की चेतावनी दी गई और विरोध करने पर गंभीर परिणाम भुगतने की बात कही गई। मंगल हेंब्रम ने कहा कि इस घटना के बाद उनका पूरा परिवार भय और असुरक्षा के माहौल में जीवन व्यतीत कर रहा है।
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सामाजिक बहिष्कार के आरोप से गांव में बढ़ी चर्चा
उपायुक्त को सौंपे गए आवेदन में मंगल हेंब्रम ने सवाल उठाया है कि किसी राजनीतिक विचारधारा या दल से जुड़े होने के कारण किसी व्यक्ति और उसके परिवार का सामाजिक बहिष्कार किस कानून और अधिकार के तहत किया जा सकता है। उन्होंने प्रशासन से दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने, परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। यह मामला अब केवल एक परिवार का नहीं, बल्कि लोकतांत्रिक अधिकारों, राजनीतिक स्वतंत्रता और सामाजिक न्याय से जुड़े व्यापक प्रश्नों का विषय बन गया है। ऐसे में प्रशासन की आगामी कार्रवाई पर क्षेत्रवासियों की नजरें टिकी हुई हैं।






















