शिक्षा मंत्रालय के निर्देश पर आयोजित पांच दिवसीय कार्यक्रम में छात्र कल्याण
मानसिक स्वास्थ्य और परिणाम-आधारित शिक्षा पर विशेष जोर
उच्च शिक्षा में छात्र-केंद्रित वातावरण निर्माण की दिशा में महत्वपूर्ण पहल
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : भारत सरकार के शिक्षा मंत्रालय (MoE) के निर्देशों के अनुरूप राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एनआईटी) जमशेदपुर में पांच दिवसीय फैकल्टी अपग्रेडेशन कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। कार्यक्रम का उद्देश्य छात्र मार्गदर्शन, मनोसामाजिक कल्याण, परामर्श सहायता प्रणाली, परिणाम-आधारित शिक्षण तथा समावेशी शैक्षणिक प्रक्रियाओं को और अधिक सुदृढ़ बनाना है। संस्थान के निदेशक प्रो. गौतम सूत्रधार के नेतृत्व में आयोजित इस कार्यक्रम का दूसरा दिवस 4 जून 2026 को डीजेएलएचसी कक्ष संख्या-212 में संपन्न हुआ। कार्यक्रम के अंतर्गत स्टूडेंट मेंटरिंग स्किल वर्कशॉप के तहत विभिन्न विशेषज्ञ सत्रों का आयोजन किया गया, जिनमें शिक्षकों को विद्यार्थियों के समग्र विकास और प्रभावी मार्गदर्शन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं की जानकारी दी गई। कार्यक्रम का उद्देश्य उच्च शिक्षा संस्थानों में छात्र-केंद्रित और सहयोगात्मक शिक्षण वातावरण को बढ़ावा देना है।
इसे भी पढ़ें : Gua : गुवा में नाबालिग लड़की ने फांसी लगाकर की आत्महत्या, जांच में जुटी पुलिस
छात्र कल्याण और समावेशी शिक्षा को मजबूत बनाने की पहल

कार्यक्रम के प्रथम तकनीकी सत्र का विषय “छात्रों द्वारा सामना की जाने वाली दृश्य एवं अदृश्य बाधाओं की पहचान” था। यह सत्र सेंट्रल इंस्टीट्यूट ऑफ साइकियाट्री (सीआईपी), रांची के साइकियाट्रिक सोशल वर्क ट्यूटर विष्णु सुरेश द्वारा प्रस्तुत किया गया। उन्होंने विद्यार्थियों की शैक्षणिक, व्यवहारिक, भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की। सत्र में छात्रों की समस्याओं की प्रारंभिक पहचान, मनोसामाजिक हस्तक्षेप रणनीतियों और साक्ष्य-आधारित मार्गदर्शन पद्धतियों पर विशेष जोर दिया गया। उन्होंने बताया कि शिक्षकों और मेंटर्स की भूमिका केवल अकादमिक मार्गदर्शन तक सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में मानसिक दृढ़ता, भावनात्मक संतुलन और आत्मविश्वास विकसित करने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका होती है। साथ ही शिक्षण संस्थानों में मनोवैज्ञानिक रूप से सुरक्षित और समावेशी वातावरण तैयार करने की आवश्यकता पर भी बल दिया गया।
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : विधायक मंगल कालिंदी के हस्तक्षेप के बाद खासमहल-गोविंदपुर सड़क निर्माण को मिली रफ्तार
विद्यार्थियों की मानसिक और भावनात्मक चुनौतियों पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
दूसरा तकनीकी सत्र “आउटकम-बेस्ड एजुकेशन (OBE) एवं सक्रिय शिक्षण पद्धति” विषय पर आयोजित किया गया, जिसका संचालन कोलकाता की साइकियाट्रिक प्रोफेशनल एन. टी. रूपा ने किया। उन्होंने परिणाम-आधारित शिक्षा को शिक्षार्थी-केंद्रित शिक्षण पद्धतियों के साथ जोड़ने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। सत्र में पाठ्यक्रम परिणामों के रचनात्मक संरेखण, दक्षता मानचित्रण, सक्रिय अधिगम तकनीकों, सहयोगात्मक एवं अनुभवात्मक शिक्षण मॉडल तथा प्रारूपिक मूल्यांकन रणनीतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। उन्होंने कहा कि आधुनिक शिक्षा प्रणाली में केवल पाठ्यक्रम पूरा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में आलोचनात्मक चिंतन, समस्या-समाधान क्षमता और व्यावहारिक कौशल विकसित करना भी उतना ही आवश्यक है। इस दौरान शिक्षण-अधिगम प्रक्रियाओं में सतत गुणवत्ता सुधार और नवाचारपूर्ण शिक्षण हस्तक्षेपों पर भी विचार-विमर्श किया गया।
इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : जुगसलाई में अवैध हथियार सप्लाई गिरोह का पर्दाफाश, दो आरोपी गिरफ्तार
आउटकम-बेस्ड एजुकेशन से बेहतर होंगे अधिगम परिणाम
कार्यक्रम का आयोजन प्रो. सरोज कुमार सारंगी, अधिष्ठाता (छात्र कल्याण) एवं कुलसचिव (प्रभारी), तथा प्रो. दिलीप कुमार यादव, अधिष्ठाता (संकाय कल्याण) की अध्यक्षता में किया गया। कार्यक्रम के संयोजक डॉ. कुमारी नम्रता एवं डॉ. एस. सक्थिवेल रहे, जबकि डॉ. विजय कुमार डल्ला, डॉ. कुणाल सिंह, डॉ. संगीता कुमारी और डॉ. पौलामी माजी ने समन्वयक के रूप में अपनी भूमिका निभाई। कार्यक्रम में उप-निदेशक प्रो. आर. वी. शर्मा, सभी अधिष्ठाता, विभागाध्यक्ष तथा विभिन्न विभागों के संकाय सदस्यों ने सक्रिय सहभागिता की। अंत में संसाधन व्यक्तियों, आयोजकों और प्रतिभागियों को उनके योगदान के लिए धन्यवाद दिया गया। यह कार्यक्रम शिक्षा मंत्रालय की उस परिकल्पना को साकार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है, जिसका उद्देश्य उच्च शिक्षा में समग्र छात्र विकास, शैक्षणिक उत्कृष्टता और उत्तरदायी संस्थागत वातावरण का निर्माण करना है।






















