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Musabani : सुरदा माइंस में ठेका मजदूरों का प्रदर्शन, 15 दिनों में मांगें नहीं मानी गईं तो ‘हुडका जाम’ की चेतावनी

  • श्रम कानून उल्लंघन और मूलभूत सुविधाओं की कमी का आरोप, मजदूरों ने सौंपा मांग पत्र
  • मजदूरों ने सुविधाओं और सामाजिक सुरक्षा की उठाई मांग

जेबी लाइव, रिपोर्टर

मुसाबनी : हिंदुस्तान कॉपर लिमिटेड (एचसीएल/आईसीसी) के अधीन संचालित सुरदा माइंस में कार्यरत ठेका मजदूरों का आक्रोश अब खुलकर सामने आने लगा है। बुधवार को ठेका कंपनी आर के अर्थ रिसोर्सेस प्राइवेट लिमिटेड के खिलाफ मजदूरों ने जोरदार प्रदर्शन करते हुए अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज बुलंद की। आंदोलन का नेतृत्व झामुमो नेता एवं पूर्व जिला परिषद सदस्य बाघराय मार्डी ने किया। इस दौरान सुरदा बाजार हाट में आयोजित बैठक में मजदूरों ने कंपनी प्रबंधन पर श्रम कानूनों की अनदेखी और शोषणकारी नीतियां अपनाने का आरोप लगाया। वक्ताओं ने कहा कि लंबे समय से मजदूरों की समस्याओं को नजरअंदाज किया जा रहा है, जिससे कर्मचारियों में असंतोष लगातार बढ़ रहा है।

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ठेका मजदूरों ने श्रम कानून उल्लंघन का लगाया आरोप

बैठक को संबोधित करते हुए बाघराय मार्डी ने कहा कि यदि 15 दिनों के भीतर मजदूरों की समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो सुरदा माइंस का ‘हुडका जाम’ किया जाएगा। उन्होंने चेतावनी दी कि आंदोलन की पूरी जिम्मेदारी कंपनी प्रबंधन की होगी। मजदूरों ने कहा कि उन्हें मूलभूत सुविधाओं से भी वंचित रखा जा रहा है। मांग पत्र में कैंटीन, शुद्ध पेयजल, यूनिफॉर्म, ड्रेसिंग रूम, मेडिकल डिस्पेंसरी, समय पर वेतन भुगतान और ओवरटाइम का दोगुना भुगतान सुनिश्चित करने की मांग की गई है। साथ ही एचआरए, कन्वेयंस, महंगाई भत्ता, वॉशिंग अलाउंस, अंडरग्राउंड एवं नाइट शिफ्ट भत्ता सहित अन्य सुविधाएं देने की भी मांग रखी गई है।

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15 दिनों की मोहलत, फिर होगा बड़ा आंदोलन

मजदूरों ने अपने मांग पत्र में राष्ट्रीय अवकाश, अर्जित अवकाश (ईएल), आकस्मिक अवकाश (सीएल), सिकल लीव और फेस्टिवल लीव की सुविधा उपलब्ध कराने की मांग भी की है। इसके अलावा पीएफ, बोनस, ईएसआई, बीमा, ड्यूटी के दौरान दुर्घटना या मृत्यु होने पर उचित मुआवजा और आश्रित को नौकरी देने की व्यवस्था करने की बात कही गई है। मजदूरों ने ज्वाइनिंग लेटर में वेतन संरचना स्पष्ट करने, पहचान पत्र जारी करने, 60 वर्ष तक सेवा की सीमा तय करने, बचे हुए मजदूरों का अपग्रेडेशन करने तथा मोटरसाइकिल स्टैंड की व्यवस्था करने की भी मांग रखी है। बैठक में बड़ी संख्या में मजदूर शामिल हुए और अपने अधिकारों के लिए एकजुट होकर संघर्ष जारी रखने का संकल्प लिया।

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Potka : उद्घाटन से पहले ही जर्जर हुआ 11 करोड़ का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जांच और कार्रवाई की उठी मांग

पोटका में करोड़ों की लागत से बने नए सीएचसी की गुणवत्ता पर उठे सवाल, मरम्मत कार्य शुरू जेबी लाइव, रिपोर्टर

  • पोटका में करोड़ों की लागत से बने नए सीएचसी की गुणवत्ता पर उठे सवाल, मरम्मत कार्य शुरू

जेबी लाइव, रिपोर्टर

पोटका : प्रखंड परिसर में लगभग 11 करोड़ रुपये की लागत से निर्मित नया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) उद्घाटन से पहले ही जर्जर अवस्था में पहुंच गया है। क्षेत्र की स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से बनाए गए इस भवन से लोगों को काफी उम्मीदें थीं, लेकिन निर्माण पूरा होने के बाद ही इसकी गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। हालत यह है कि भवन के विभिन्न हिस्सों में क्षति दिखाई देने के बाद मरम्मत कार्य भी शुरू कर दिया गया है। करोड़ों रुपये की लागत से तैयार इस स्वास्थ्य केंद्र की वर्तमान स्थिति को देखकर स्थानीय लोगों में निराशा और आक्रोश दोनों देखने को मिल रहा है।

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दरारें, उखड़ता प्लास्टर और तकनीकी खामियों से बढ़ी चिंता

जानकारी के अनुसार केंद्र एवं राज्य सरकार के अंशदान से इस अत्याधुनिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया था। भवन निर्माण कार्य पूरा होने के साथ ही इसकी दीवारों में दरारें पड़ने, कई स्थानों पर प्लास्टर उखड़ने तथा अन्य तकनीकी खामियों की शिकायतें सामने आने लगीं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिस भवन का उद्देश्य क्षेत्रवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराना है, उसकी संरचनात्मक स्थिति ही सवालों के घेरे में है। उद्घाटन से पहले ही भवन की मरम्मत की आवश्यकता पड़ना निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है। लोगों का मानना है कि यदि समय रहते इसकी जांच नहीं हुई तो भविष्य में और भी बड़ी समस्याएं सामने आ सकती हैं।

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राजनीतिक दलों ने पहले भी उठाए थे निर्माण गुणवत्ता के मुद्दे

भवन निर्माण में कथित अनियमितताओं और घटिया सामग्री के उपयोग को लेकर पहले भी कई बार विरोध प्रदर्शन हो चुके हैं। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (जेएलकेएम) तथा कांग्रेस पार्टी ने समय-समय पर धरना-प्रदर्शन कर निर्माण कार्य की उच्च स्तरीय जांच की मांग की थी। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया था कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता मानकों की अनदेखी की गई, जिसके कारण भवन उद्घाटन से पहले ही क्षतिग्रस्त होने लगा है। स्थानीय लोगों के बीच भी यह चर्चा का विषय बना हुआ है कि जब नया भवन ही सुरक्षित नहीं दिख रहा है, तो वहां इलाज कराने आने वाले मरीज और उनके परिजन खुद को कितना सुरक्षित महसूस करेंगे। इससे स्वास्थ्य केंद्र की विश्वसनीयता पर भी असर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

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दोषियों पर कार्रवाई और तकनीकी जांच की मांग तेज

कांग्रेस के जिला सचिव जयराम हांसदा ने मामले को गंभीर बताते हुए सरकार और जिला प्रशासन से पूरे निर्माण कार्य की निष्पक्ष एवं उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कहा कि यदि करोड़ों रुपये की सरकारी राशि खर्च होने के बावजूद भवन उद्घाटन से पहले ही जर्जर हो रहा है, तो यह निर्माण एजेंसी और संबंधित ठेकेदार की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़ा करता है। उन्होंने दोषी ठेकेदार को तत्काल ब्लैकलिस्ट करने, निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराने तथा जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कार्रवाई करने की मांग की। वहीं क्षेत्र के लोगों ने भी प्रशासन से पारदर्शी जांच की अपेक्षा जताई है, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि निर्माण कार्य में किस स्तर पर लापरवाही बरती गई। लोगों को उम्मीद है कि जांच के बाद दोषियों पर कार्रवाई होगी और स्वास्थ्य केंद्र को पूरी तरह सुरक्षित एवं गुणवत्तापूर्ण बनाकर जनता को समर्पित किया जाएगा।

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डुमरिया के ईचाकुटी गांव में महीनों से ठप पेयजल व्यवस्था, जल संकट से जूझ रहे ग्रामीण जेबी लाइव, रिपोर्टर डुमरिया

  • डुमरिया के ईचाकुटी गांव में महीनों से ठप पेयजल व्यवस्था, जल संकट से जूझ रहे ग्रामीण

जेबी लाइव, रिपोर्टर

डुमरिया : पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड की केंदुआ पंचायत अंतर्गत बोमरो टोला ईचाकुटी गांव में भीषण जल संकट ने ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं। गांव में स्थापित दो प्रमुख जलमीनार महीनों से खराब पड़ी हैं, जिसके कारण लोगों को शुद्ध पेयजल नहीं मिल पा रहा है। ईचाकुटी बाड़ेटोला में जलमीनार नहीं होने के कारण प्राथमिक विद्यालय ईचाकुटी में बने जलमीनार से पाइपलाइन के माध्यम से पानी आपूर्ति की व्यवस्था की गई थी, लेकिन लंबे समय से पाइपलाइन से जलापूर्ति ठप है। नतीजतन ग्रामीणों को पेयजल के लिए भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। प्रशासनिक उदासीनता और समस्या के समाधान में हो रही देरी से ग्रामीणों में नाराजगी लगातार बढ़ती जा रही है।

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खेतों के कच्चे कुएं का गंदा पानी पीने को विवश हैं ग्रामीण

ग्रामीणों का कहना है कि क्षेत्र में शुद्ध पेयजल की कोई वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। ऐसे में महिलाएं, बुजुर्ग और बच्चे खेतों में बने कच्चे कुओं से पानी लाने को मजबूर हैं। इन कुओं का पानी दूषित होने के बावजूद लोग अपनी प्यास बुझाने के लिए उसी का उपयोग कर रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि इस पानी के सेवन से स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं बढ़ रही हैं और कई लोग बीमार पड़ चुके हैं। कुछ मामलों में लोगों को मलेरिया और अन्य जलजनित बीमारियों के इलाज के लिए अस्पताल तक जाना पड़ा है। भीषण गर्मी के बीच जल संकट ने ग्रामीणों की चिंता और बढ़ा दी है, जबकि जिम्मेदार विभाग अब तक समस्या के समाधान के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा सका है।

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समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया कि कई बार शिकायत और गुहार लगाने के बावजूद न तो कोई जनप्रतिनिधि गांव पहुंचा और न ही किसी अधिकारी ने समस्या का स्थायी समाधान करने की पहल की। ग्रामीणों का कहना है कि चुनाव के समय बड़े-बड़े वादे करने वाले नेता अब उनकी परेशानी से मुंह मोड़ चुके हैं। इस बीच मौके पर पहुंचे समाजसेवी सह जदयू जिला महासचिव बीरसिंह देवगाम ने स्थिति पर गहरी नाराजगी जताई। उन्होंने कहा कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा से लोगों को वंचित रखना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने प्रशासन से तत्काल जलमीनारों की मरम्मत कर जलापूर्ति बहाल करने की मांग की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो ग्रामीणों के साथ मिलकर प्रखंड सह अंचल कार्यालय डुमरिया के समक्ष बड़ा आंदोलन किया जाएगा।

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पूजा-अर्चना के दौरान खेलते-खेलते नदी किनारे पहुंचा था बच्चा, परिवार में पसरा मातम जेबी लाइव, रिपोर्टर राजनगर : राजनगर प्रखंड

  • पूजा-अर्चना के दौरान खेलते-खेलते नदी किनारे पहुंचा था बच्चा, परिवार में पसरा मातम

जेबी लाइव, रिपोर्टर

राजनगर : राजनगर प्रखंड के प्रसिद्ध धार्मिक एवं पर्यटन स्थल भीमखंदा स्थित बोंगबोंगा नदी में रविवार को एक दर्दनाक हादसे में चार वर्षीय बालक की डूबने से मौत हो गई। घटना के बाद पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई, जबकि परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। जानकारी के अनुसार गम्हरिया पंचायत के सोलगड़िया गांव से 8 से 10 महिलाएं एवं कुछ बच्चे पूजा-अर्चना के लिए भीमखंदा पहुंचे थे। धार्मिक अनुष्ठान के दौरान उनके साथ आए बच्चे आसपास खेल रहे थे। इसी बीच तीन छोटे बच्चे खेलते-खेलते नदी घाट के समीप पहुंच गए, जहां अचानक एक मासूम का पैर फिसल गया और वह गहरे पानी में चला गया।

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स्थानीय लोगों ने किया बचाव का प्रयास, अस्पताल में डॉक्टरों ने किया मृत घोषित

घटना को देख अन्य बच्चों ने तत्काल इसकी सूचना परिजनों को दी। सूचना मिलते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई और परिवार के सदस्य नदी की ओर दौड़ पड़े। स्थानीय ग्रामीणों और परिजनों ने मिलकर बच्चे को नदी से बाहर निकाला तथा उसकी जान बचाने के लिए हरसंभव प्रयास किया। इसके बाद उसे तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, राजनगर ले जाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने बच्चे की जांच की, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। यह खबर सुनते ही अस्पताल परिसर में मातम छा गया और परिजनों की चीख-पुकार से माहौल गमगीन हो गया।

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गर्मी की छुट्टियां मनाने आया था ननिहाल, सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की उठी मांग

बताया जा रहा है कि मृत बालक धनबाद जिले का निवासी था और गर्मी की छुट्टियों में अपनी मां के साथ सोलगड़िया स्थित अपने मामा के घर आया हुआ था। किसी ने कल्पना भी नहीं की थी कि छुट्टियों की खुशियां इस तरह दुख में बदल जाएंगी। इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर नदी घाटों, जलाशयों और धार्मिक स्थलों पर बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि ऐसे संवेदनशील स्थलों पर चेतावनी बोर्ड, सुरक्षा घेराबंदी और निगरानी की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके।

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गुवा में संयुक्त यूनियन की बैठक, आंदोलन तेज करने का लिया निर्णय जेबी लाइव, रिपोर्टर गुवा : झारखंड मजदूर संघर्ष

  • गुवा में संयुक्त यूनियन की बैठक, आंदोलन तेज करने का लिया निर्णय

जेबी लाइव, रिपोर्टर

गुवा : झारखंड मजदूर संघर्ष संघ कार्यालय में शुक्रवार देर शाम संघ के केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे की अध्यक्षता में संयुक्त यूनियन की बैठक आयोजित की गई। बैठक में सेल प्रबंधन द्वारा बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली लागू किए जाने के निर्णय का कड़ा विरोध किया गया। यूनियन नेताओं ने सर्वसम्मति से निर्णय लिया कि शनिवार शाम पांच बजे गुवा सेल के जनरल ऑफिस के समक्ष सेल प्रबंधन का पुतला दहन कर विरोध-प्रदर्शन किया जाएगा। नेताओं ने बताया कि इस कार्यक्रम में संयुक्त यूनियन के पदाधिकारियों के साथ बड़ी संख्या में सेलकर्मी एवं ठेका मजदूर शामिल होंगे। उनका कहना है कि बायोमेट्रिक व्यवस्था को लेकर कर्मचारियों के बीच व्यापक असंतोष है, लेकिन प्रबंधन उनकी आपत्तियों पर ध्यान नहीं दे रहा है।

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न्यायालय के निर्णय तक यथास्थिति बनाए रखने की मांग

बैठक को संबोधित करते हुए केंद्रीय अध्यक्ष रामा पांडे ने कहा कि सेल में बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने के मामले में न्यायालय में वाद विचाराधीन है। उन्होंने दावा किया कि न्यायालय ने आगामी 15 जून तक यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। ऐसे में अंतिम निर्णय से पहले बायोमेट्रिक प्रणाली लागू करने का प्रयास न्यायालय की अवमानना तथा संविधान की भावना के विपरीत होगा। उन्होंने कहा कि संयुक्त यूनियन न्यायपालिका का सम्मान करती है और 15 जून को आने वाले न्यायालय के फैसले को स्वीकार करेगी। हालांकि तब तक बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू करने के किसी भी प्रयास का लोकतांत्रिक तरीके से विरोध जारी रहेगा। बैठक में उपस्थित नेताओं ने कर्मचारियों से आंदोलन में अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की।

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वन विभाग ने मृतक की पत्नी नंदी जोजो को सौंपा मुआवजा चेक, ग्रामीणों ने सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की

  • वन विभाग ने मृतक की पत्नी नंदी जोजो को सौंपा मुआवजा चेक, ग्रामीणों ने सुरक्षा उपाय बढ़ाने की मांग की
  • ग्रामीणों ने हाथियों की निगरानी और सुरक्षा बढ़ाने की मांग उठाई

जेबी लाइव, रिपोर्टर

मनोहरपुर : जंगली हाथी के हमले में जान गंवाने वाले समठा गांव निवासी चंदन जोजो के परिवार को वन विभाग की ओर से अनुग्रह सहायता राशि प्रदान की गई। शुक्रवार को आयोजित एक कार्यक्रम में विभागीय अधिकारियों ने मृतक की पत्नी नंदी जोजो को 4 लाख रुपये का मुआवजा चेक सौंपा। जानकारी के अनुसार, 20 दिसंबर 2025 को चंदन जोजो जंगल से लकड़ी लाने गए थे। इसी दौरान घर से करीब एक किलोमीटर दूर उनका सामना एक जंगली हाथी से हो गया। हाथी के हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं और घटनास्थल पर ही उनकी मौत हो गई थी। घटना के बाद वन विभाग ने आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर आश्रित परिवार को सहायता राशि उपलब्ध कराई।

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वन विभाग ने नियमानुसार दी अनुग्रह सहायता राशि

मुआवजा वितरण कार्यक्रम में समाजसेवी सदस्य संदीप गुड़िया, वनपाल कमल, वनकर्मी बासुदेव सहित वन विभाग के कई अधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। इस दौरान ग्रामीणों ने क्षेत्र में लगातार बढ़ रही जंगली हाथियों की गतिविधियों पर चिंता जताई। ग्रामीणों का कहना है कि हाथियों के कारण जान-माल का खतरा लगातार बना रहता है और कई बार लोग भय के माहौल में जीवन यापन करने को मजबूर होते हैं। उन्होंने वन विभाग से हाथियों की नियमित निगरानी, समय पर चेतावनी व्यवस्था और प्रभावी सुरक्षा उपाय सुनिश्चित करने की मांग की, ताकि भविष्य में इस प्रकार की दुखद घटनाओं को रोका जा सके।

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प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गंभीर आरोप, कहा– वीडियो में लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार और प्रतिष्ठा को नुकसान

  • प्रेस कॉन्फ्रेंस में लगाए गंभीर आरोप, कहा– वीडियो में लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह निराधार और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले
  • कमरों के कब्जे को लेकर प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : साकची स्थित होटल ग्रैंड की ओनर शबनम सिंह ने यूट्यूबर विनोद सिंह के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की घोषणा की है। शुक्रवार को होटल ग्रैंड में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने कहा कि विनोद सिंह द्वारा सोशल मीडिया और यूट्यूब पर उनके तथा होटल के खिलाफ लगाए गए सभी आरोप पूरी तरह फर्जी, बेबुनियाद और प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने वाले हैं। प्रेस वार्ता में उनके पति संजय सिंह भी मौजूद थे। शबनम सिंह ने कहा कि वीडियो के माध्यम से उनके व्यवसाय और सामाजिक छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया है, जिसके कारण उन्हें मानसिक और सामाजिक परेशानियों का सामना करना पड़ा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि मामले को लेकर वे कानूनी प्रक्रिया का सहारा ले रही हैं और जल्द ही नया मानहानि का मुकदमा दायर किया जाएगा।

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होटल ग्रैंड की ओनर ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर रखी अपनी बात

शबनम सिंह ने मोहन कॉम्प्लेक्स स्थित अपार्टमेंट पर कब्जे के आरोपों को भी सिरे से खारिज किया। उन्होंने दावा किया कि संबंधित फ्लैट उन्होंने वर्ष 2003 और 2005 में सौरेंद्र मोहन बनर्जी तथा ज्योतिका बनर्जी से विधिवत खरीदा था और इसकी रजिस्ट्री व सेल डीड उनके पास उपलब्ध है। उन्होंने कहा कि संपत्ति पर अवैध कब्जे का आरोप पूरी तरह तथ्यहीन है। प्रेस कॉन्फ्रेंस में उन्होंने दस्तावेजों के आधार पर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि सभी संपत्तियां वैधानिक प्रक्रिया के तहत खरीदी गई हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सोशल मीडिया के माध्यम से गलत सूचनाएं फैलाकर उन्हें विवादों में घसीटने का प्रयास किया जा रहा है।

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अपार्टमेंट खरीद से जुड़े दस्तावेज होने का किया दावा

शबनम सिंह ने दावा किया कि 4 अप्रैल 2022 को विनोद सिंह कुछ लोगों के साथ होटल ग्रैंड पहुंचे थे और स्वयं को एक समाचार पोर्टल का पत्रकार बताया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान होटल संचालन के बदले 12 लाख रुपये की मांग की गई थी। उनके अनुसार रकम नहीं देने पर होटल को बदनाम करने के उद्देश्य से सोशल मीडिया पर वीडियो प्रसारित किए गए, जिनमें होटल में अनैतिक गतिविधियों के संचालन जैसे आरोप लगाए गए। शबनम सिंह ने कहा कि इन आरोपों का कोई आधार नहीं है और यदि ऐसा कुछ होता तो पुलिस प्रशासन द्वारा कार्रवाई की जाती। उन्होंने बताया कि इस मामले में वर्ष 2023 में भी कानूनी शिकायत दर्ज कराई गई थी और वर्तमान में अदालत में मानहानि से जुड़े मामले विचाराधीन हैं।

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सोशल मीडिया वीडियो को लेकर पुराने मामलों का भी जिक्र

प्रेस कॉन्फ्रेंस में शबनम सिंह ने होटल के दो कमरों को लेकर चल रहे विवाद का भी उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि एक महिला और एक स्थानीय राजनीतिक नेता द्वारा कमरों पर कब्जा किया गया है। उनके अनुसार संबंधित महिला पूर्व में वहां रहती थी और कमरा खाली करने के बाद होटल प्रबंधन ने ताला लगा दिया था, लेकिन बाद में ताला तोड़कर कमरे में प्रवेश कर लिया गया। उन्होंने कहा कि इस मामले की शिकायत प्रशासनिक अधिकारियों से की गई है और निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। शबनम सिंह ने कहा कि उन्हें न्यायपालिका और प्रशासन पर पूरा भरोसा है तथा सभी विवादों का समाधान कानूनी प्रक्रिया के माध्यम से किया जाएगा।

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