पर्यावरण संरक्षण के साथ मानसिक शुद्धता और नव्य मानवतावाद का दिया संदेश
पर्यावरण संकट के लिए मानवीय स्वार्थ को बताया जिम्मेदार
नव्य मानवतावाद के माध्यम से प्रकृति और जीव-जंतुओं के प्रति अपनत्व का आह्वान
पौधारोपण के साथ प्रकृति के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने पर जोर
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : आनंद मार्ग यूनिवर्सल रिलीफ टीम ग्लोबल (AMURT) एवं प्रीवेंशन ऑफ क्रुएलिटी टू एनिमल्स एंड प्लांट्स (PCAP) जमशेदपुर की ओर से जोजोबेड़ा स्थित राजकीय हरिजन मध्य विद्यालय में विद्यार्थियों के बीच 200 फलदार एवं फूलदार पौधों का वितरण किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाना तथा विद्यार्थियों को प्रकृति से जोड़ना था। इस अवसर पर विद्यार्थियों को पौधों के महत्व, उनके संरक्षण और पर्यावरण संतुलन में उनकी भूमिका के बारे में जानकारी दी गई। आयोजकों ने कहा कि पौधारोपण केवल पर्यावरण संरक्षण का माध्यम नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और स्वस्थ वातावरण सुनिश्चित करने का भी महत्वपूर्ण प्रयास है।
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विद्यार्थियों को पौधों के संरक्षण और पर्यावरण संतुलन का दिया संदेश
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए आनंद मार्ग के सुनील आनंद ने कहा कि पर्यावरण की समस्या मनुष्य द्वारा उत्पन्न की गई समस्या है और इसका समाधान भी मनुष्य को ही खोजना होगा। उन्होंने कहा कि स्वार्थ, भौतिक लालसा और प्रकृति के प्रति संवेदनहीनता के कारण पर्यावरण प्रदूषण बढ़ा है। केवल पेड़ लगाने से ही समस्या का समाधान संभव नहीं है, बल्कि मन के प्रदूषण को भी दूर करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य अपने मन को निर्मल और व्यापक नहीं बनाएगा, तब तक प्रकृति के प्रति उसका दृष्टिकोण नहीं बदलेगा। पर्यावरण संरक्षण के लिए आंतरिक चेतना और सामाजिक जिम्मेदारी दोनों आवश्यक हैं।
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मन के प्रदूषण को दूर किए बिना संभव नहीं पर्यावरण का संरक्षण
सुनील आनंद ने नव्य मानवतावाद की अवधारणा पर प्रकाश डालते हुए कहा कि इस पृथ्वी पर केवल मनुष्य ही नहीं, बल्कि पेड़-पौधे, पशु-पक्षी और अन्य जीव-जंतु भी समान रूप से इस धरती रूपी परिवार के सदस्य हैं। उन्होंने कहा कि जब तक मनुष्य इन सभी को अपने परिवार का हिस्सा मानकर उनके संरक्षण और सम्मान की भावना नहीं अपनाएगा, तब तक पर्यावरण का वास्तविक कल्याण संभव नहीं है। उन्होंने विद्यार्थियों से अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का आह्वान किया। कार्यक्रम के अंत में विद्यार्थियों को पौधे वितरित किए गए और पर्यावरण संरक्षण की शपथ भी दिलाई गई।

























