स्थानीय रोजगार, गांवों के विकास और पूर्व समझौतों के अनुपालन की मांग पर चल रहा था आंदोलन
75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार और ट्रांसपोर्टिंग में भागीदारी की मांग
प्राकृतिक जलस्रोत और खेती पर पड़ रहा असर
प्रशासन के आश्वासन पर टला आंदोलन, आगे की कार्रवाई पर रहेगी नजर
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : स्थानीय युवाओं को रोजगार, खदान प्रभावित गांवों के विकास तथा पूर्व में हुए लिखित समझौतों को लागू कराने की मांग को लेकर सेल की रांजाबुरु खदान में 10 अगस्त से चल रहा अनिश्चितकालीन आंदोलन मंगलवार को 22 दिनों बाद फिलहाल स्थगित कर दिया गया। आंदोलनकारियों और प्रशासन के बीच हुई सकारात्मक वार्ता के बाद यह निर्णय लिया गया। जगन्नाथपुर के अनुमंडल पदाधिकारी (एसडीओ) अरुण उरांव और नोवामुंडी के प्रखंड विकास पदाधिकारी (बीडीओ) पप्पू रजक आंदोलन स्थल पहुंचे और ग्रामीणों के साथ विस्तृत चर्चा की। अधिकारियों ने समस्याओं के समाधान की दिशा में पहल करने का भरोसा दिलाया, जिसके बाद आंदोलनकारियों को जूस पिलाकर आंदोलन स्थगित कराया गया। हालांकि ग्रामीणों ने स्पष्ट कर दिया है कि यह केवल अस्थायी स्थगन है और मांगों पर कार्रवाई नहीं होने की स्थिति में आंदोलन दोबारा शुरू किया जा सकता है।
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स्थानीय रोजगार और खदान प्रभावित गांवों के विकास की उठी मांग

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगों में मां सरला नामक ठेका कंपनी के साथ पूर्व में हुए लिखित समझौते को पूरी तरह लागू करना शामिल है। इसके अलावा खदान प्रभावित 18 गांवों के युवाओं को रोजगार में प्राथमिकता देने, 75 प्रतिशत स्थानीय रोजगार सुनिश्चित करने, रैक लोडिंग और ट्रांसपोर्टिंग कार्यों में स्थानीय लोगों की भागीदारी बढ़ाने तथा अन्य कार्यों में ग्रामीणों को अवसर देने की मांग की गई है। आंदोलन का नेतृत्व कर रहे मुखिया राजू सांडिल ने कहा कि क्षेत्र के लोग वर्षों से रोजगार और विकास के मुद्दे पर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अपेक्षित परिणाम नहीं मिले हैं। उन्होंने कहा कि खनन गतिविधियों से प्रभावित होने के बावजूद स्थानीय लोगों को उनका उचित अधिकार नहीं मिल पा रहा है।
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लाल पानी की समस्या और बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा भी उठा
वार्ता के दौरान ग्रामीणों ने खदान से निकलने वाले कथित लाल पानी की समस्या को भी प्रमुखता से उठाया। ग्रामीणों का कहना है कि इससे आसपास के प्राकृतिक जलस्रोत और कृषि भूमि प्रभावित हो रही है, जिससे किसानों को नुकसान उठाना पड़ रहा है। इस पर एसडीओ अरुण उरांव ने प्रभावित गांवों का दौरा कर स्थिति का प्रत्यक्ष निरीक्षण करने का आश्वासन दिया। ग्रामीणों ने सीएसआर गांवों में शिक्षकों की कमी, पेयजल संकट, सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को भी अधिकारियों के सामने रखा। उन्होंने कहा कि खनन क्षेत्र से मिलने वाले राजस्व और संसाधनों का लाभ स्थानीय गांवों तक पहुंचना चाहिए तथा प्रभावित परिवारों के लिए विशेष विकास योजनाएं लागू की जानी चाहिए।
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5 अक्टूबर तक कार्रवाई नहीं हुई तो फिर बनेगी नई रणनीति
मुखिया राजू सांडिल ने बताया कि प्रशासन के आग्रह और सकारात्मक आश्वासन को देखते हुए आंदोलन फिलहाल स्थगित किया गया है। प्रशासन ने जल्द ही उपायुक्त और सेल प्रबंधन के साथ त्रिपक्षीय वार्ता कराने तथा मांगों के समाधान की दिशा में ठोस पहल करने का भरोसा दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन को 5 अक्टूबर तक का समय दिया है। यदि इस अवधि में मांगों पर संतोषजनक प्रगति नहीं होती है तो आगे की रणनीति तय कर आंदोलन को फिर से तेज किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि 22 दिनों तक चले इस आंदोलन में भारी बारिश के बावजूद ग्रामीण लगातार डटे रहे। स्वतंत्रता दिवस पर आंदोलन स्थल पर तिरंगा फहराकर देशभक्ति के नारे भी लगाए गए थे। आंदोलन स्थगित किए जाने के दौरान मानकी लागुड़ा देवगम, मुखिया राजू सांडिल, बुधराम सिद्धू, कुशू देवगम, जामदेव चाम्पिया, जानुम सिंह चेरोवा, लेबेया देवगम, राजेश टोपनो सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण और महिलाएं मौजूद थीं।


























