ओल चिकी और संताली संस्कृति पर होगा मंथन
झारखंड समेत कई राज्यों के बुद्धिजीवी, शिक्षाविद और सांस्कृतिक प्रतिनिधि होंगे शामिल
जेबी लाइव, रिपोर्टर
घाटशिला : आगामी 11 और 12 अक्टूबर 2026 को माझी पारगाना माहाल, घाटशिला में असेका (ASECA) झारखंड के तत्वावधान में दो दिवसीय प्रांतीय महाधिवेशन एवं सांस्कृतिक महोत्सव का आयोजन किया जाएगा। इस महाधिवेशन की तैयारियों को लेकर बुधवार को एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें आयोजन की रूपरेखा, अतिथियों की उपस्थिति और विभिन्न सत्रों की विस्तृत योजना पर चर्चा की गई। आयोजकों ने बताया कि इस कार्यक्रम में झारखंड के अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल, असम और बिहार से हजारों की संख्या में संताल समाज के बुद्धिजीवी, शिक्षाविद, सामाजिक कार्यकर्ता और सांस्कृतिक प्रतिनिधि भाग लेंगे। महाधिवेशन का मुख्य उद्देश्य संताली भाषा, ओल चिकी लिपि तथा आदिवासी सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन को नई दिशा देना है।
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पहले दिन राष्ट्रीय सेमिनार और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे आकर्षण का केंद्र
महाधिवेशन के प्रथम दिन 11 अक्टूबर को पारंपरिक पूजा-पाठ एवं ध्वजारोहण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया जाएगा। इसके बाद “संताली भाषा और ओल चिकी लिपि का आधुनिकीकरण एवं रोजगार में इसकी भूमिका” तथा “पंडित रघुनाथ मुर्मू की दर्शनशास्त्रीय सोच” विषय पर राष्ट्रीय स्तर का सेमिनार आयोजित होगा। इस सत्र में भाषा विशेषज्ञ, शिक्षाविद और शोधकर्ता संताली भाषा के डिजिटलीकरण, नई पीढ़ी तक पहुंच और रोजगार के अवसरों में इसकी उपयोगिता पर विचार-विमर्श करेंगे। शाम के सांस्कृतिक सत्र में विभिन्न राज्यों से आए कलाकार पारंपरिक दंग, सोहराय और लागड़े नृत्य की प्रस्तुति देंगे, जिससे संताल संस्कृति की समृद्ध परंपरा का प्रदर्शन होगा।
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दूसरे दिन सम्मान समारोह और भविष्य की रणनीति पर होगा विचार
12 अक्टूबर को आयोजित दूसरे दिन के कार्यक्रम में संताली भाषा, साहित्य, शिक्षा, खेल और सामाजिक क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले व्यक्तियों को ‘असेका रत्न’ सहित विभिन्न सम्मानों से सम्मानित किया जाएगा। इसके अलावा संताली माध्यम विद्यालयों की स्थिति, मातृभाषा आधारित शिक्षा के विस्तार और भाषा संरक्षण के लिए सरकारी स्तर पर आवश्यक पहल को लेकर प्रस्ताव पारित किए जाएंगे। समापन सत्र में समाज को संगठित रखने, युवाओं को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने और ओल चिकी लिपि के व्यापक प्रचार-प्रसार का संकल्प लिया जाएगा।
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कई विशिष्ट अतिथि करेंगे कार्यक्रम की शोभा बढ़ाने का कार्य
आयोजकों के अनुसार कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पारगाना बाबा बैजू मुर्मू, विधायक सोमेश चन्द्र सोरेन, पंडित रघुनाथ मुर्मू के पौत्र भीमवार मुर्मू, पारगाना बाबा दासमत हांसदा सहित कई विशिष्ट अतिथि शामिल होंगे। इसके अलावा साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित संताली साहित्यकार, कला अकादमी से सम्मानित कलाकार तथा विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियां भी कार्यक्रम में भाग लेंगी। उनके विचार और अनुभव प्रतिभागियों को भाषा और संस्कृति के संरक्षण की दिशा में नई प्रेरणा प्रदान करेंगे।
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बैठक में आयोजन को ऐतिहासिक बनाने का लिया गया संकल्प
बैठक में असेका झारखंड इकाई के अध्यक्ष सुभाष चन्द्र माण्डी, सचिव शंकर सोरेन, मेघराय टुडू, कन्हाई लाल हेम्ब्रम, सालखू मुर्मू, कृष्ण चन्द्र हेम्ब्रम, सावना हांसदा, चरण हेम्ब्रम, पीताम्बर बेसरा, रामजीत सोरेन, बिष्णु कुमार मुर्मू, बोडो राम सोरेन, धोना राम टुडू, बदेन चन्द्र हांसदा, पीताम्बर हांसदा, जीबन बास्के और बायला सोरेन सहित अनेक सदस्य उपस्थित रहे। पदाधिकारियों ने कहा कि यह महाधिवेशन केवल सांस्कृतिक आयोजन नहीं, बल्कि संताली भाषा और पहचान को सशक्त बनाने का एक महत्वपूर्ण मंच है। उन्होंने समाज के लोगों से पारंपरिक वेशभूषा में बड़ी संख्या में शामिल होकर आयोजन को ऐतिहासिक बनाने की अपील की।

























