राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग के समक्ष विस्थापितों और आदिवासी कर्मचारियों ने रखीं समस्याएं
यूसील प्रबंधन को नियमित समीक्षा बैठक के निर्देश
त्रैमासिक समीक्षा बैठक के निर्देश से बढ़ी समाधान की उम्मीद
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जादूगोड़ा : राष्ट्रीय अनुसूचित जनजाति आयोग की सदस्या डॉ आशा लकड़ा के दो दिवसीय जादूगोड़ा दौरे के बाद यूसील के तीसरे टेलिंग पांड से सटे चाटीकोचा गांव के विस्थापित परिवारों में नई उम्मीद जगी है। गांव के 26 विस्थापित परिवारों का मानना है कि अब वर्षों से लंबित उनकी समस्याओं के समाधान की दिशा में ठोस पहल हो सकती है। ग्रामीणों का कहना है कि तीसरे टेलिंग पांड से निकलने वाले कथित यूरेनियम विकिरण के प्रभाव से राहत मिलने के साथ-साथ वर्ष 1997 से कोषागार में जमा पुनर्वास एवं मुआवजा राशि के भुगतान का रास्ता भी खुल सकता है। यूसील अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ के आग्रह पर पहुंचे आयोग की सदस्या ने क्षेत्र की परिस्थितियों का जायजा लिया और ग्रामीणों से सीधे संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं।
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चाटीकोचा के विस्थापित परिवारों में समाधान की नई उम्मीद
चाटीकोचा गांव के ग्रामीणों ने आयोग की सदस्या को पांच सूत्री मांग पत्र सौंपते हुए कई महत्वपूर्ण मांगें रखीं। मांग पत्र में वर्ष 1997 से पूर्व जन्मे सभी विस्थापितों को रोजगार देने, विस्थापित परिवार के सदस्य की मृत्यु अथवा कंपनी कर्मी के सेवानिवृत्त होने की स्थिति में 30 दिनों के भीतर योग्य आश्रित को नौकरी देने तथा तीसरे टेलिंग पांड से उत्पन्न समस्याओं से राहत दिलाने के लिए पुनर्वास की व्यवस्था करने की मांग प्रमुख रूप से शामिल है। ग्रामीणों ने कहा कि वर्षों से वे विस्थापन और पर्यावरणीय प्रभावों की दोहरी मार झेल रहे हैं, लेकिन उनकी समस्याओं का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। डॉ आशा लकड़ा ने ग्रामीणों की बातों को गंभीरता से सुना और संबंधित बिंदुओं को आयोग के स्तर पर उठाने का आश्वासन दिया।
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आयोग को सौंपा गया पांच सूत्री मांग पत्र
दौरे के दौरान यूरेनियम कामगार यूनियन और यूसील अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ ने भी अपनी विभिन्न समस्याओं को आयोग की सदस्या के समक्ष रखा। यूनियन के महामंत्री भरत किस्कू ने आरोप लगाया कि कंपनी में कर्मचारियों के लिए दो तरह की व्यवस्था लागू है। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय के कर्मचारियों को सेवानिवृत्ति के बाद केवल कंपनी अस्पताल तक सीमित चिकित्सा सुविधा मिलती है, जबकि अधिकारियों को व्यापक चिकित्सा लाभ उपलब्ध कराया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि ड्यूटी के दौरान किसी कर्मचारी की मृत्यु होने पर ग्रुप बीमा के तहत मिलने वाली राशि परिवार के भरण-पोषण के लिए पर्याप्त नहीं है। यूनियन ने कर्मचारियों के लिए बेहतर सामाजिक सुरक्षा, चिकित्सा सुविधा और समान अधिकारों की मांग उठाई।
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आदिवासी कर्मचारियों ने सुविधाओं में भेदभाव का लगाया आरोप
कर्मचारी संघ ने आयोग की सदस्या को धीमी पदोन्नति प्रक्रिया, सेवा नीतियों में सुधार, मृतक आश्रितों को नौकरी, विस्थापित आदिवासी परिवारों के पुनर्वास और पीढ़ी दर पीढ़ी नियोजन जैसी मांगों से भी अवगत कराया। संघ के पदाधिकारियों ने कहा कि लंबे समय से लंबित इन मुद्दों के कारण कर्मचारियों और प्रभावित परिवारों में असंतोष व्याप्त है। डॉ आशा लकड़ा ने इन शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए यूसील प्रबंधन से जवाब मांगा तथा समस्याओं के समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अनुसूचित जनजाति समुदाय से जुड़े मामलों में संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्य किया जाना चाहिए ताकि कर्मचारियों और प्रभावित परिवारों का विश्वास बना रहे।
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पदोन्नति और मृतक आश्रित नियोजन की मांग हुई प्रमुख
बैठक के दौरान डॉ आशा लकड़ा ने यूसील प्रबंधन को निर्देश दिया कि प्रत्येक तीन माह में यूसील अनुसूचित जनजाति कर्मचारी संघ के साथ समीक्षा बैठक आयोजित की जाए, जिससे विभिन्न विवादों और लंबित मामलों का समयबद्ध समाधान हो सके। इस अवसर पर यूसील के अध्यक्ष सह प्रबंध निदेशक डॉ कंचम आनंद राव, तकनीकी निदेशक विक्रम केसरी दास, कार्यकारी निदेशक एम.के. सिंघई, महाप्रबंधक मनोज कुमार सहित कई वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे। वहीं कर्मचारी संघ की ओर से अध्यक्ष मनोरंजन महाली, महासचिव दीपतेन्दु हांसदा समेत अनेक पदाधिकारी और चाटीकोचा गांव के प्रतिनिधि मौजूद थे। अब क्षेत्र के विस्थापित परिवारों और आदिवासी कर्मचारियों की नजर इस बात पर टिकी है कि आयोग के हस्तक्षेप के बाद यूसील प्रबंधन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए कितना प्रभावी कदम उठाता है।