सुनसुनिया गेट हादसे के बाद पूर्व मुख्यमंत्री ने यातायात व्यवस्था पर उठाए प्रश्न
मृतक परिवार को मुआवजा देने की मांग
टाटा कंपनी और प्रशासन से संयुक्त पहल कर सड़क सुरक्षा मजबूत करने की मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री चंपई सोरेन ने औद्योगिक नगरी जमशेदपुर में लगातार बढ़ रही सड़क दुर्घटनाओं पर गहरी चिंता व्यक्त की है। बुधवार को वे बर्मामाइंस थाना पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से मुलाकात कर हाल के सड़क हादसों तथा क्षेत्र की यातायात व्यवस्था की जानकारी ली। इसके बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उन्होंने कहा कि शहर में लगातार हो रही दुर्घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं और इन घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि औद्योगिक क्षेत्र होने के कारण जमशेदपुर में भारी वाहनों की आवाजाही अधिक रहती है, इसलिए यातायात प्रबंधन और निगरानी व्यवस्था को और मजबूत किया जाना चाहिए।
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बर्मामाइंस थाना पहुंचकर चंपई सोरेन ने ली सड़क हादसों की जानकारी
चंपई सोरेन ने मंगलवार रात सुनसुनिया गेट के पास हुई सड़क दुर्घटना का उल्लेख करते हुए कहा कि इस हादसे में एक युवक की जान चली गई। उन्होंने कहा कि दुर्घटना स्थल टाटा कंपनी से जुड़े क्षेत्र में आता है, इसलिए मृतक के परिजनों को मुआवजा दिलाने की दिशा में पहल की जानी चाहिए। उन्होंने मांग की कि पीड़ित परिवार को उचित सहायता उपलब्ध कराई जाए। पूर्व मुख्यमंत्री ने कहा कि सड़क हादसों में जान गंवाने वाले परिवारों को समय पर राहत और सहयोग मिलना आवश्यक है, ताकि वे कठिन परिस्थितियों का सामना कर सकें।
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सुनसुनिया गेट हादसे के पीड़ित परिवार के लिए मुआवजे की मांग
पूर्व मुख्यमंत्री ने शहर में भारी वाहनों के परिचालन को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि नो-एंट्री समाप्त होने का समय रात 11 बजे निर्धारित है, तो उससे पहले भारी वाहन शहर के अंदर कैसे प्रवेश कर जाते हैं। उन्होंने कहा कि टाटा नील्को, सीमेंट कंपनी, पावर प्लांट और अन्य औद्योगिक इकाइयों के कारण बड़ी संख्या में ट्रक और ट्रेलर शहर में आते-जाते हैं। ऐसे में निर्धारित नियमों का सख्ती से पालन कराया जाना चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि नो-एंट्री अवधि के दौरान भारी वाहनों को शहर की सीमा के बाहर ही रोका जाए और उनकी नियमित निगरानी की जाए।
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नो-एंट्री नियमों के पालन और भारी वाहनों की निगरानी पर उठे सवाल
चंपई सोरेन ने कहा कि जमशेदपुर में सड़क दुर्घटनाओं की खबरें लगातार सामने आती रहती हैं, लेकिन दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए अपेक्षित परिणाम दिखाई नहीं देते। उन्होंने पूर्वी सिंहभूम जिला प्रशासन से यातायात व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग करने और दुर्घटना संभावित क्षेत्रों की पहचान कर आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि सड़क सुरक्षा केवल नियम बनाने से नहीं, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन से सुनिश्चित होगी। साथ ही लोगों में सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने की भी आवश्यकता है।
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सड़क सुरक्षा के लिए प्रशासनिक निगरानी बढ़ाने की मांग
उन्होंने कहा कि जमशेदपुर एक प्रमुख औद्योगिक शहर है, जहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में भारी वाहनों का परिचालन होता है। ऐसे में यातायात प्रबंधन, नो-एंट्री नियमों का पालन और सड़क सुरक्षा उपायों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जानी चाहिए। चंपई सोरेन ने मांग की कि टाटा कंपनी और जिला प्रशासन संयुक्त रूप से सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए प्रभावी रणनीति तैयार करें। उन्होंने कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए सभी संबंधित पक्षों को अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन गंभीरता से करना होगा, ताकि लोगों की जान-माल की सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।


























