जमशेदपुर में साइबर अपराध और पीड़ित प्रतिकर योजना 2026 पर विशेष जागरूकता कार्यक्रम आयोजित
साइबर ठगी से बचाव और शिकायत की प्रक्रिया की दी गई जानकारी
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), जमशेदपुर के तत्वावधान में साइबर अपराध, ‘डिजिटल अरेस्ट’ से बचाव और पीड़ित प्रतिकर योजना 2026 को लेकर विशेष कानूनी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि जिला एवं अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश सह विशेष न्यायाधीश (साइबर क्राइम) आनंद मणि त्रिपाठी थे, जबकि अध्यक्षता DLSA सचिव कुमार सौरभ त्रिपाठी ने की। कार्यक्रम में आम नागरिकों और अधिवक्ताओं को साइबर ठगी के बदलते तरीकों, कानूनी प्रावधानों और पीड़ितों को मिलने वाली सहायता के बारे में जानकारी दी गई। मुख्य अतिथि आनंद मणि त्रिपाठी ने कहा कि साइबर अपराधी ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर लोगों को डराकर उनसे मोटी रकम वसूल रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून में डिजिटल अरेस्ट जैसा कोई प्रावधान नहीं है। इसलिए ऐसे फोन कॉल या वीडियो कॉल से घबराने के बजाय सतर्कता बरतनी चाहिए और किसी अनजान व्यक्ति के दबाव में आकर पैसे नहीं भेजने चाहिए।
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साइबर ठगी से बचने के लिए सतर्कता और सही जानकारी जरूरी

कार्यक्रम के दौरान साइबर पुलिस विंग के अधिकारियों ने साइबर अपराध के विभिन्न तरीकों और उनसे बचाव के उपायों पर विस्तार से जानकारी दी। साइबर पुलिस इंस्पेक्टर श्रीनिवास, सब-इंस्पेक्टर अमित अभिषेक और रूपेश कुमार कोठारी ने तकनीकी पहलुओं, साइबर अपराधियों की कार्यप्रणाली तथा साइबर हेल्पलाइन के उपयोग के बारे में बताया। उन्होंने लोगों को सलाह दी कि किसी भी संदिग्ध कॉल, वीडियो कॉल या संदेश पर भरोसा न करें और अपनी बैंकिंग जानकारी, ओटीपी तथा अन्य गोपनीय विवरण किसी के साथ साझा न करें। साइबर ठगी का शिकार होने पर जल्द शिकायत दर्ज कराना महत्वपूर्ण है, ताकि समय रहते कार्रवाई की जा सके। अधिकारियों ने पीड़ित सहायता योजना 2026 के तहत उपलब्ध आर्थिक और कानूनी मदद प्राप्त करने की प्रक्रिया की जानकारी भी साझा की।
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साइबर अपराध के पीड़ितों को आर्थिक और कानूनी सहायता की जानकारी
कार्यक्रम में मध्यस्थ (मीडिएटर) कमल कांत सिन्हा, लीगल एड डिफेंस काउंसिल (LADC) के सदस्य और बड़ी संख्या में अधिवक्तागण उपस्थित रहे। वक्ताओं ने साइबर अपराध के प्रति जागरूकता बढ़ाने और लोगों को कानूनी सहायता उपलब्ध कराने में सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम का उद्देश्य नागरिकों को साइबर ठगी के प्रति सजग बनाना, डिजिटल अरेस्ट जैसी धोखाधड़ी से बचाव के उपाय बताना तथा पीड़ितों को उपलब्ध कानूनी सहायता की जानकारी देना था। अधिकारियों ने अपील की कि साइबर अपराध की स्थिति में घबराने के बजाय तत्काल उचित माध्यम से शिकायत करें और जागरूकता के संदेश को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाएं।























