Share

Ghatsila : घाटशिला में झामुमो ने स्वर्गीय रूपी सोरेन को दी श्रद्धांजलि, आंदोलन के दिनों में उनके त्याग को किया याद

  • पांवड़ा स्थित झामुमो संपर्क कार्यालय में आयोजित हुई श्रद्धांजलि सभा
  • नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दो मिनट का मौन रखकर दिवंगत आत्मा की शांति के लिए की प्रार्थना
  • झामुमो कार्यकर्ताओं ने दिवंगत रूपी सोरेन को दी भावभीनी श्रद्धांजलि

जेबी लाइव, रिपोर्टर

घाटशिला : झारखंड के मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की माता, दिशोम गुरु स्वर्गीय शिबू सोरेन की धर्मपत्नी एवं झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) की केंद्रीय उपाध्यक्ष स्वर्गीय रूपी सोरेन के निधन पर सोमवार को घाटशिला प्रखंड समिति की ओर से श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई। पांवड़ा पंचायत स्थित झामुमो संपर्क कार्यालय में प्रखंड अध्यक्ष दुर्गा चरण मुर्मू की अध्यक्षता में आयोजित इस सभा में पार्टी के नेताओं और कार्यकर्ताओं ने दिवंगत रूपी सोरेन के चित्र पर श्रद्धासुमन अर्पित कर उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि दी। इस दौरान सभी उपस्थित लोगों ने दो मिनट का मौन रखकर उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना की। सभा का माहौल शोकपूर्ण रहा और नेताओं ने उनके निधन को पार्टी तथा पूरे झारखंड के लिए अपूरणीय क्षति बताया।

इसे भी पढ़ें : Potka : पोटका में ग्रामीण एसपी ने दुर्गा पूजा पंडालों का किया निरीक्षण

झारखंड आंदोलन में रूपी सोरेन के योगदान को नेताओं ने किया याद

श्रद्धांजलि सभा में झामुमो नेताओं ने झारखंड आंदोलन के कठिन दिनों में स्वर्गीय रूपी सोरेन के त्याग, समर्पण और संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि अलग झारखंड राज्य के आंदोलन के दौरान उन्होंने विपरीत परिस्थितियों में परिवार और आंदोलन से जुड़े दायित्वों को निभाते हुए महत्वपूर्ण भूमिका अदा की। उनका जीवन संघर्ष, धैर्य और संगठन के प्रति अटूट निष्ठा का प्रतीक रहा है। नेताओं ने कहा कि उनके विचार और योगदान आने वाली पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे। सभा में प्रखंड उपाध्यक्ष बाबूलाल मुर्मू, दासमात सोरेन, वरिष्ठ नेता जगदीश भकत, काजल डॉन, मीडिया प्रभारी सोमेन मिश्रा, सुखलाल हांसदा, विकास मजूमदार, अम्पा हेंब्रम, भादो मुर्मू, राजा सिंह, काला सरकार, अमर पूर्ति, सुनील मुर्मू, मेघराय बेसरा, फुलचंद टुडू, मदन दलाई, मनोज सिंह, बड़ा दुर्गा मुर्मू, मुकेश दंडपात, महेश्वर माहली, शिवलाल टुडू, भोला नाथ, अमित राय समेत कई नेता और कार्यकर्ता उपस्थित थे।

Leave a Comment

Jamshedpur : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस पर सदर अस्पताल में कार्यशाला आयोजित

अधिकार मित्रों को मानसिक रोगों के प्रति जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने किया उद्घाटन विशेषज्ञ

  • अधिकार मित्रों को मानसिक रोगों के प्रति जागरूकता फैलाने की जिम्मेदारी
  • सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने किया उद्घाटन
  • विशेषज्ञ डॉ. दीपक गिरी ने बताए मानसिक बीमारी के शुरुआती लक्षण और तनाव से बचाव के उपाय
  • मानसिक रोगों से जुड़े कलंक को दूर कर सहयोगी समाज बनाने की अपील

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के सप्ताहव्यापी कार्यक्रमों के तहत सोमवार को सदर अस्पताल, खासमहल, परसुडीह में एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। सिविल सर्जन डॉ. साहिर पाल ने कार्यशाला का उद्घाटन किया। इसमें मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. दीपक गिरी, डॉ. महेश मांझी, जिला विधिक सेवा प्राधिकार (डालसा) के पैरा लीगल वॉलंटियर्स यानी अधिकार मित्र और सदर अस्पताल की नर्सिंग टीम ने भाग लिया। कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाना और मानसिक बीमारियों से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करना था। विशेषज्ञों ने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। समय पर लक्षणों की पहचान, उचित परामर्श और चिकित्सकीय सहायता से मानसिक समस्याओं का प्रभावी प्रबंधन किया जा सकता है। इसलिए मानसिक बीमारी से जूझ रहे लोगों के प्रति संवेदनशीलता और सहयोग का व्यवहार अपनाना आवश्यक है।

इसे भी पढ़ें : Novamundi/Chaibasa : टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल नोवामुंडी में आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल, 642 विद्यार्थियों ने सीखे बचाव के गुर

मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेषज्ञों ने दिया जोर

कार्यशाला को संबोधित करते हुए डॉ. दीपक गिरी ने तनाव, मानसिक बीमारी के शुरुआती लक्षणों और उनके सामाजिक प्रभावों पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने कहा कि आज के दौर में अनेक लोग किसी न किसी रूप में तनाव का सामना कर रहे हैं। लगातार तनाव बने रहने पर व्यक्ति की दिनचर्या, व्यवहार और सामान्य जीवन प्रभावित हो सकता है। उन्होंने मानसिक बीमारी के शुरुआती संकेतों में लंबे समय तक उदास रहना, अत्यधिक चिंता करना, एकाग्रता में कमी, नींद से जुड़ी परेशानियां, बार-बार गुस्सा आना और तनाव का सामना करने में कठिनाई होना शामिल बताया। इसके अलावा, स्वयं की देखभाल नहीं कर पाना और नशीले पदार्थों का अत्यधिक सेवन भी चिंता का विषय हो सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर उन्हें नजरअंदाज करने के बजाय विशेषज्ञ से सलाह लेनी चाहिए। समय रहते मदद मिलने से समस्या को गंभीर होने से रोकने में सहायता मिल सकती है।

इसे भी पढ़ें : Baharagoda : बहरागोड़ा के पांकलो टोला में बदला गया जला ट्रांसफॉर्मर, ग्रामीणों को बिजली संकट से मिली राहत

उदासी, चिंता और नींद की परेशानी को नजरअंदाज नहीं करने की सलाह

डॉ. गिरी ने मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने के लिए कई व्यावहारिक उपाय भी बताए। उन्होंने प्रकृति के बीच समय बिताने, दिनचर्या को व्यवस्थित रखने, सकारात्मक सोच विकसित करने और दोस्तों एवं परिवार के सदस्यों से खुलकर बातचीत करने की सलाह दी। संगीत सुनना, किताबें पढ़ना, योग करना, नियमित व्यायाम और हंसने जैसी गतिविधियां तनाव कम करने में सहायक हो सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि मानसिक परेशानी होने पर व्यक्ति को अकेले संघर्ष करने के बजाय अपने विश्वसनीय लोगों से बात करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। कार्यशाला में इस बात पर भी चर्चा हुई कि मानसिक बीमारी को लेकर समाज में प्रचलित गलत धारणाएं प्रभावित व्यक्ति के लिए परेशानी बढ़ा सकती हैं। किसी व्यक्ति को मानसिक बीमारी के कारण अपमानित करना या उससे भेदभाव करना उसके आत्मविश्वास और उपचार की प्रक्रिया पर नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है।

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : टाटा स्टील, ब्रिटेन सरकार और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग की साझेदारी, सर्कुलर मटेरियल्स में भारत-ब्रिटेन मिलकर करेंगे नवाचार

योग, व्यायाम और अपनों से बातचीत तनाव कम करने में सहायक

कार्यशाला में पैरा लीगल वॉलंटियर्स यानी अधिकार मित्रों की भूमिका को विशेष रूप से महत्वपूर्ण बताया गया। डॉ. दीपक गिरी ने उनसे ग्रामीण क्षेत्रों में जाकर लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने की अपील की। उन्होंने कहा कि जानकारी के अभाव और सामाजिक झिझक के कारण कई लोग मानसिक समस्याओं को पहचान नहीं पाते और समय पर डॉक्टर तक नहीं पहुंचते। ऐसे में अधिकार मित्र लोगों को मानसिक बीमारी के शुरुआती संकेतों की जानकारी देने, जरूरतमंदों को चिकित्सकीय परामर्श लेने के लिए प्रेरित करने और मानसिक रोगों से जुड़ी भ्रांतियां दूर करने में मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि ग्रामीण समुदायों में जागरूकता फैलाकर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं तक लोगों की पहुंच बेहतर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा सकती है। अधिकार मित्रों को लोगों के साथ संवेदनशील व्यवहार करने और जरूरत पड़ने पर उन्हें उचित स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंचने में मार्गदर्शन देने पर जोर दिया गया।

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वालों पर मुकदमा दर्ज करे जिला प्रशासन – अप्पू तिवारी

ग्रामीण क्षेत्रों में मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता फैलाएंगे अधिकार मित्र

कार्यशाला के दौरान मानसिक बीमारी से जुड़े सामाजिक कलंक और भेदभाव के दुष्प्रभावों पर भी चर्चा हुई। विशेषज्ञों ने बताया कि किसी व्यक्ति पर मानसिक बीमारी का ठप्पा लगाना, लगातार संदेह करना या उसे समाज से अलग करना उसकी परेशानी को बढ़ा सकता है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कमजोरी समझने के बजाय उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ा विषय मानना जरूरी है। लोगों को प्रभावित व्यक्तियों की बात सुनने, उनका सहयोग करने और जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञों से संपर्क कराने के लिए प्रोत्साहित किया गया। कार्यक्रम में शामिल चिकित्सकों, अधिकार मित्रों और नर्सिंग टीम ने मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता बढ़ाने तथा ग्रामीण क्षेत्रों तक सही जानकारी पहुंचाने के महत्व पर जोर दिया। कार्यशाला का संदेश रहा कि समय पर सहायता, सकारात्मक सामाजिक व्यवहार और उचित उपचार से मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।

Novamundi/Chaibasa : टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल नोवामुंडी में आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल, 642 विद्यार्थियों ने सीखे बचाव के गुर

आगजनी और प्राकृतिक आपदा जैसी आपात स्थितियों से निपटने का दिया गया प्रशिक्षण 22 शिक्षकों के साथ विद्यार्थियों ने किया

  • आगजनी और प्राकृतिक आपदा जैसी आपात स्थितियों से निपटने का दिया गया प्रशिक्षण
  • 22 शिक्षकों के साथ विद्यार्थियों ने किया सुरक्षा प्रोटोकॉल का अभ्यास
  • मॉक ड्रिल से विद्यार्थियों में सुरक्षा और सतर्कता के प्रति बढ़ी जागरूकता

जेबी लाइव, रिपोर्टर

नोवामुंडी/चाईबासा : राष्ट्रीय स्तर पर सुरक्षा एवं आपातकालीन सतर्कता को बढ़ावा देने और आपदा प्रबंधन संबंधी निर्देशों के तहत सोमवार, 12 अक्टूबर 2026 को टाटा डीएवी पब्लिक स्कूल, नोवामुंडी में विशेष आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य विद्यार्थियों और शिक्षकों को प्राकृतिक आपदा, आगजनी तथा अन्य आकस्मिक परिस्थितियों में त्वरित प्रतिक्रिया देने और स्वयं को सुरक्षित रखने के लिए तैयार करना था। विद्यालय की प्राचार्या शशिकला ने बताया कि इस तरह के अभ्यास से बच्चों में आपातकालीन परिस्थितियों के प्रति जागरूकता बढ़ती है। मॉक ड्रिल के दौरान आपातकालीन घंटी बजते ही विद्यालय में निर्धारित सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन किया गया। शिक्षकों के मार्गदर्शन में विद्यार्थियों ने सुरक्षित स्थानों पर पहुंचने और संकट की स्थिति में अनुशासित तरीके से बाहर निकलने का अभ्यास किया। कार्यक्रम में कनीय कक्षाओं से लेकर कक्षा 12वीं तक के विद्यार्थियों ने भाग लिया।

इसे भी पढ़ें : Baharagoda : बहरागोड़ा के पांकलो टोला में बदला गया जला ट्रांसफॉर्मर, ग्रामीणों को बिजली संकट से मिली राहत

आपातकालीन घंटी बजते ही विद्यार्थियों ने किया सुरक्षा नियमों का पालन

मॉक ड्रिल के दौरान विद्यार्थियों को आपदा की स्थिति में डेस्क और मजबूत सतहों के नीचे शरण लेने तथा सुरक्षित स्थान पर पहुंचने के तरीके सिखाए गए। इसके बाद विद्यार्थियों ने विद्यालय के क्रीड़ा प्रांगण में एकत्रित होकर सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया का अभ्यास किया। बच्चों को बिजली के उपकरण बंद करने, आपात स्थिति में घबराने के बजाय शांत रहने और प्राथमिक उपचार के जरूरी तरीकों की जानकारी भी दी गई। कार्यक्रम संयोजक सचिन साव ने कहा कि सुरक्षा केवल नियम नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा होनी चाहिए। किसी भी आपदा या आपातकालीन परिस्थिति में घबराने के बजाय समझदारी, त्वरित निर्णय और उचित प्रशिक्षण से जान-माल की रक्षा की जा सकती है। उन्होंने कहा कि मॉक ड्रिल का उद्देश्य बच्चों में सतर्कता, अनुशासन और नागरिक जिम्मेदारी की भावना विकसित करना है, ताकि वे विद्यालय के साथ-साथ अपने घर और समाज में भी संकट के समय जागरूक भूमिका निभा सकें।

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : टाटा स्टील, ब्रिटेन सरकार और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग की साझेदारी, सर्कुलर मटेरियल्स में भारत-ब्रिटेन मिलकर करेंगे नवाचार

प्राथमिक उपचार से लेकर सुरक्षित निकासी तक विद्यार्थियों को मिला प्रशिक्षण

इस विशेष अभ्यास में कुल 642 विद्यार्थियों और 22 शिक्षकों ने भाग लिया। विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाओं के साथ गैर-शैक्षणिक कर्मचारियों ने भी सक्रिय सहयोग दिया। सभी प्रतिभागियों ने आपदा के समय निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करने और सुरक्षित निकासी की प्रक्रिया को समझने पर जोर दिया। विद्यालय प्रबंधन के अनुसार, इस तरह के अभ्यास विद्यार्थियों को वास्तविक आपातकालीन परिस्थितियों के लिए मानसिक रूप से तैयार करने में सहायक होते हैं। नियमित मॉक ड्रिल से बच्चों को सुरक्षा संबंधी नियमों की जानकारी मिलती है और संकट के समय सही कदम उठाने का आत्मविश्वास विकसित होता है। कार्यक्रम के माध्यम से विद्यालय परिसर में सुरक्षा, सतर्कता और सामूहिक जिम्मेदारी के महत्व को रेखांकित किया गया।

Baharagoda : बहरागोड़ा के पांकलो टोला में बदला गया जला ट्रांसफॉर्मर, ग्रामीणों को बिजली संकट से मिली राहत

मुखिया राम मुर्मू की पहल पर 25 केवीए की जगह लगाया गया 63 केवीए का नया ट्रांसफॉर्मर, ग्रामीणों ने जताया

  • मुखिया राम मुर्मू की पहल पर 25 केवीए की जगह लगाया गया 63 केवीए का नया ट्रांसफॉर्मर, ग्रामीणों ने जताया आभार
  • नया ट्रांसफॉर्मर लगने से पांकलो टोला के ग्रामीणों को राहत

जेबी लाइव, रिपोर्टर

बहरागोड़ा : पूर्वी सिंहभूम जिले के बहरागोड़ा प्रखंड अंतर्गत मानुषमुड़िया पंचायत के पांकलो टोला में जला ट्रांसफॉर्मर बदल दिए जाने से ग्रामीणों को राहत मिली है। 25 केवीए का ट्रांसफॉर्मर खराब होने के कारण गांव में पिछले कई दिनों से बिजली संकट बना हुआ था।

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : टाटा स्टील, ब्रिटेन सरकार और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग की साझेदारी, सर्कुलर मटेरियल्स में भारत-ब्रिटेन मिलकर करेंगे नवाचार

मुखिया की पहल पर गांव में बिजली व्यवस्था बहाल करने की पहल

मुखिया राम मुर्मू की पहल पर सोमवार को गांव में 63 केवीए का नया ट्रांसफॉर्मर स्थापित किया गया। इससे ग्रामीणों में खुशी का माहौल है। इस मौके पर महादेव नायक, दुखीराम गोप, बाबलू मुर्मू, ईश्वर नायक, बालक नायक, गोया नायक, शिवशंकर गोप, पागान मुर्मू, निमाई नायक और किशन मुर्मू सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद थे। ग्रामीणों ने ट्रांसफॉर्मर लगवाने की पहल के लिए मुखिया के प्रति आभार जताया।

Jamshedpur : टाटा स्टील, ब्रिटेन सरकार और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग की साझेदारी, सर्कुलर मटेरियल्स में भारत-ब्रिटेन मिलकर करेंगे नवाचार

रिसर्च और इनोवेशन के लिए तीन साल में होगा सहयोग ब्रिटेन सरकार देगी 1.9 मिलियन पाउंड और टाटा स्टील करेगी

  • रिसर्च और इनोवेशन के लिए तीन साल में होगा सहयोग
  • ब्रिटेन सरकार देगी 1.9 मिलियन पाउंड और टाटा स्टील करेगी 1 मिलियन पाउंड का योगदान
  • 15 तक परियोजनाओं को मिल सकती है फंडिंग

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : टाटा स्टील, ब्रिटेन सरकार और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग ने सर्कुलर मटेरियल्स के क्षेत्र में भारत और ब्रिटेन के बीच अनुसंधान, नवाचार और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नई साझेदारी की घोषणा की है। तीन साल की इस रिसर्च एवं इनोवेशन साझेदारी के तहत दोनों देशों के विश्वविद्यालय, शोध संस्थान और उद्योग मिलकर टिकाऊ तथा पुनर्चक्रित सामग्रियों के उपयोग को बढ़ावा देंगे। इसका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना, कार्बन उत्सर्जन कम करने वाली तकनीकों को विकसित करना और महत्वपूर्ण सामग्रियों एवं खनिजों की आपूर्ति शृंखला को अधिक मजबूत बनाना है। इस पहल के माध्यम से दोनों देशों के विशेषज्ञ बाजार के रुझानों, तकनीकी अवसरों और संसाधनों के पुनः उपयोग से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा करेंगे। यह सहयोग भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के साथ पहले किए गए प्रयासों को भी आगे बढ़ाएगा। दोनों देश बुनियादी ढांचे की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े समाधान विकसित करने पर जोर दे रहे हैं।

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वालों पर मुकदमा दर्ज करे जिला प्रशासन – अप्पू तिवारी

सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए भारत-ब्रिटेन की संयुक्त पहल

इस साझेदारी के लिए ब्रिटेन सरकार करीब 1.9 मिलियन पाउंड और टाटा स्टील 1 मिलियन पाउंड का योगदान करेगी। इसके अतिरिक्त, चयनित परियोजनाओं को मिलने वाली अनुदान राशि के कम से कम आधे के बराबर अतिरिक्त फंडिंग भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस वित्तीय मॉडल का उद्देश्य उन शोध टीमों को प्रोत्साहित करना है, जिनकी तकनीकें औद्योगिक इस्तेमाल के करीब हैं और जिन्हें आगे विकसित करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है। रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के ‘ट्रांसफॉर्मिंग सिस्टम्स थ्रू पार्टनरशिप’ (TSP) कार्यक्रम के अंतर्गत अप्रैल 2027 से परियोजनाओं को सहयोग दिया जाएगा। इस साझेदारी के तहत अधिकतम 15 रिसर्च एवं इनोवेशन परियोजनाओं को अनुदान मिलने की उम्मीद है। प्रत्येक परियोजना को 1 लाख से 1.5 लाख पाउंड तक की राशि दी जा सकती है और परियोजना की अवधि अधिकतम तीन साल होगी। प्रत्येक परियोजना का नेतृत्व भारत और ब्रिटेन के एक-एक अकादमिक या शोध साझेदार संयुक्त रूप से करेंगे। परियोजनाओं के चयन में उनके शोध परिणामों को उद्योग, उद्यमिता और अन्य व्यावहारिक क्षेत्रों में इस्तेमाल करने की स्पष्ट योजना पर भी ध्यान दिया जाएगा।

इसे भी पढ़ें : Chaibasa : दिल्ली के लोकतांत्रिक आंदोलन में शामिल हुए विधायक सोनाराम सिंकु, मताधिकार की रक्षा का उठाया मुद्दा

टाटा स्टील की विशेषज्ञता से शोध परियोजनाओं को मिलेगा औद्योगिक सहयोग

टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट–टेक्नोलॉजी, R&D, NMB और ग्राफीन सुबोध पांडेय ने कहा कि कंपनी का भविष्य सर्कुलर और सस्टेनेबल मटेरियल्स में नवाचार करने तथा उनके इस्तेमाल को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की क्षमता पर निर्भर करेगा। उन्होंने इस साझेदारी को उपयोगी अनुसंधान को वास्तविक औद्योगिक इस्तेमाल तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनके अनुसार, ब्रिटेन सरकार के सहयोग और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के साथ साझेदारी से दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक संबंध मजबूत होंगे। इससे निर्माण और विनिर्माण क्षेत्रों में कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों तथा संसाधनों के पुनः उपयोग को बढ़ावा देने वाली प्रक्रियाओं के विकास और अपनाने में तेजी आ सकती है। टाटा स्टील इस कार्यक्रम के तहत चयनित शोध टीमों को केवल वित्तीय सहयोग तक सीमित सहायता नहीं देगी, बल्कि उन्हें उद्योग जगत के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ भी मिलेगा। परियोजनाओं की जरूरतों के अनुसार कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन, प्रयोगशालाओं और अन्य तकनीकी सुविधाओं के इस्तेमाल का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। जिन परियोजनाओं में व्यावसायिक संभावनाएं होंगी, उन्हें मेंटरशिप और इन्क्यूबेशन सपोर्ट भी दिया जा सकता है।

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : जमशेदपुर में भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प, जमकर पथराव; दर्जनभर से अधिक घायल

कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों के विकास पर रहेगा विशेष जोर

यूनिवर्सिटी ऑफ सरे के एडवांस्ड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के TSP कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर रवि सिल्वा CBE FREng ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे व्यावहारिक समाधानों को विकसित करना है, जिन्हें बड़े स्तर पर अपनाया जा सके और वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने टाटा स्टील के साथ साझेदारी को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार, भारत और ब्रिटेन के संस्थानों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत की पूरक क्षमताओं को एक साथ लाने से दीर्घकालिक सहयोग मजबूत होगा। इससे टिकाऊ, सर्कुलर और ऊर्जा-कुशल सामग्रियों तथा प्रक्रियाओं को व्यवहार में अपनाने के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इंजीनियरिंग नवाचार को संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और टिकाऊ व्यवस्थाओं से जोड़ना जरूरी है। इससे बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम की रूपरेखा ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की दिशा में है, जिनके परिणाम शोध संस्थानों से निकलकर औद्योगिक उपयोग और उद्यमिता तक पहुंच सकें।

इसे भी पढ़ें : Gua : गुवासाई ग्राम सभा में गांव की समस्याओं पर मंथन, डीएवी स्कूल की शिकायत डीसी तक पहुंचाने का निर्णय

भारत-ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच मजबूत होगा शोध नेटवर्क

रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग का TSP कार्यक्रम पिछले एक दशक से अधिक समय से विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता रहा है। इस कार्यक्रम के तहत दुनिया भर में 300 से अधिक संयुक्त परियोजनाओं को सहयोग दिया जा चुका है और 800 से अधिक पुरस्कार विजेताओं का नेटवर्क विकसित हुआ है। टाटा स्टील के साथ नई साझेदारी इसी अनुभव को आगे बढ़ाते हुए भारत और ब्रिटेन के शोध एवं औद्योगिक क्षेत्रों के बीच सहयोग का विस्तार करेगी। चयनित परियोजनाओं को उनकी जरूरत और उद्देश्य के अनुरूप तकनीकी मार्गदर्शन, उद्योग से जुड़ने के अवसर तथा संभावित व्यावसायीकरण में मदद मिलेगी। इस पहल से पुनर्चक्रित सामग्रियों के इस्तेमाल, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा-कुशल विनिर्माण और कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रक्रियाओं से जुड़े नए समाधान विकसित होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, शोध परिणामों को व्यावहारिक उत्पादों और तकनीकों में बदलने पर जोर दिया जाएगा। यह साझेदारी संसाधनों के कुशल उपयोग और टिकाऊ औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के साथ संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में भी योगदान दे सकती है।

Jamshedpur : धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने वालों पर मुकदमा दर्ज करे जिला प्रशासन – अप्पू तिवारी

बिष्टुपुर में भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प और पथराव की आजसू नेता ने की निंदा निष्पक्ष जांच और दोषियों की

  • बिष्टुपुर में भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच झड़प और पथराव की आजसू नेता ने की निंदा
  • निष्पक्ष जांच और दोषियों की गिरफ्तारी की मांग
  • आजसू नेता अप्पू तिवारी ने शहर में शांति बनाए रखने की अपील की

जेबी लाइव, रिपोर्टर

जमशेदपुर : बिष्टुपुर स्थित कांग्रेस मुख्यालय तिलक पुस्तकालय के बाहर भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई झड़प एवं पथराव की घटना की आजसू पार्टी के पूर्वी सिंहभूम जिला प्रवक्ता अप्पू तिवारी ने कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि शहर में अपराध पर नियंत्रण रखने और विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए जिला पुलिस लगातार प्रयास कर रही है। ऐसे समय में आस्था के महापर्व दुर्गापूजा की शुरुआत में इस तरह की हिंसक घटना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में विरोध दर्ज कराने के अनेक तरीके हैं, लेकिन हिंसा और पत्थरबाजी किसी भी परिस्थिति में स्वीकार्य नहीं हो सकती। इस तरह की घटनाएं शहर की शांति और सामाजिक सद्भाव को प्रभावित करती हैं।

इसे भी पढ़ें : Chaibasa : दिल्ली के लोकतांत्रिक आंदोलन में शामिल हुए विधायक सोनाराम सिंकु, मताधिकार की रक्षा का उठाया मुद्दा

बिष्टुपुर पथराव मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग, दोषियों की गिरफ्तारी पर जोर

अप्पू तिवारी ने जिला प्रशासन से मांग की कि धार्मिक सौहार्द बिगाड़ने और हिंसा में शामिल लोगों के खिलाफ बिना किसी राजनीतिक दबाव के उचित धाराओं में मुकदमा दर्ज किया जाए तथा दोषियों की गिरफ्तारी सुनिश्चित की जाए। उन्होंने कहा कि शहर की शांति, सामाजिक सद्भाव और आम नागरिकों की सुरक्षा सर्वोपरि होनी चाहिए। प्रशासन को पूरे मामले में निष्पक्षता के साथ कार्रवाई करनी चाहिए, ताकि जनता के बीच कानून के प्रति विश्वास बना रहे। उन्होंने जोर देते हुए कहा कि कानून सभी के लिए समान है और किसी भी राजनीतिक दल या व्यक्ति को कानून से ऊपर नहीं माना जाना चाहिए। घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों पर कार्रवाई से ही शहर में शांति एवं सौहार्द का माहौल बनाए रखने में मदद मिलेगी।

Chaibasa : दिल्ली के लोकतांत्रिक आंदोलन में शामिल हुए विधायक सोनाराम सिंकु, मताधिकार की रक्षा का उठाया मुद्दा

विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन पात्र नागरिकों के मतदान

  • विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं के खिलाफ कांग्रेस का प्रदर्शन
  • पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार सुरक्षित रखने की मांग

जेबी लाइव, रिपोर्टर

चाईबासा : लोकतंत्र, संविधान और नागरिकों के मताधिकार की रक्षा के मुद्दे पर दिल्ली में आयोजित आंदोलन में झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी ने भागीदारी निभाई। पश्चिमी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष सह जगन्नाथपुर विधायक सोनाराम सिंकु भी इस आंदोलन में शामिल हुए। आंदोलन के दौरान विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के तहत मतदाता सूची में कथित अनियमितताओं और इसके कारण पात्र नागरिकों के मतदान अधिकार प्रभावित होने की आशंकाओं को लेकर विरोध दर्ज कराया गया। कांग्रेस नेताओं ने मतदाता सूची की पारदर्शिता और शुद्धता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उनका कहना था कि लोकतांत्रिक व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के लिए यह जरूरी है कि किसी भी पात्र नागरिक को संविधान प्रदत्त मतदान के अधिकार से वंचित नहीं किया जाए।

इसे भी पढ़ें : Jamshedpur : जमशेदपुर में भाजपा-कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हिंसक झड़प, जमकर पथराव; दर्जनभर से अधिक घायल

मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर दिल्ली में कांग्रेस का प्रदर्शन

झारखंड प्रदेश कांग्रेस कमिटी के अध्यक्ष केशव महतो कमलेश के नेतृत्व में आयोजित आंदोलन में कांग्रेस विधायक दल के नेता प्रदीप यादव, उपनेता राजेश कच्छप, प्रदेश के मंत्री, सांसद, विधायक, प्रदेश पदाधिकारी, विभिन्न जिलों के जिलाध्यक्ष और बड़ी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता शामिल हुए। आंदोलन के माध्यम से कांग्रेस ने मतदाता सूची तैयार करने और उसके पुनरीक्षण की प्रक्रिया को निष्पक्ष, पारदर्शी और त्रुटिरहित बनाने की मांग की। पार्टी नेताओं ने मतदाता सूची से जुड़े मुद्दों को लोकतांत्रिक एवं संवैधानिक तरीके से उठाने पर जोर दिया। उनके अनुसार, मतदाता सूची में किसी भी प्रकार की गड़बड़ी का असर नागरिकों के मतदान के अधिकार पर पड़ सकता है, इसलिए पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही आवश्यक है।

इसे भी पढ़ें : Gua : गुवासाई ग्राम सभा में गांव की समस्याओं पर मंथन, डीएवी स्कूल की शिकायत डीसी तक पहुंचाने का निर्णय

सोनाराम सिंकु ने लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा के प्रति जताई प्रतिबद्धता

आंदोलन में विधायक सोनाराम सिंकु की भागीदारी के माध्यम से पश्चिमी सिंहभूम जिला कांग्रेस कमिटी ने भी लोकतांत्रिक मूल्यों और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की। कांग्रेस ने कहा कि मताधिकार लोकतंत्र की बुनियाद है और प्रत्येक पात्र नागरिक को मतदान का अवसर मिलना चाहिए। पार्टी के अनुसार, मतदाता सूची से संबंधित समस्याओं को सामने लाने तथा उनके समाधान की मांग करने का सिलसिला लोकतांत्रिक तरीकों से जारी रहेगा। आंदोलन में उठाए गए मुद्दों के जरिए कांग्रेस ने मतदाता सूची की शुद्धता, नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों और निष्पक्ष चुनाव प्रक्रिया के महत्व को रेखांकित किया।

Leave a Comment

You cannot copy content of this page

Scroll to Top