रिसर्च और इनोवेशन के लिए तीन साल में होगा सहयोग
ब्रिटेन सरकार देगी 1.9 मिलियन पाउंड और टाटा स्टील करेगी 1 मिलियन पाउंड का योगदान
15 तक परियोजनाओं को मिल सकती है फंडिंग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : टाटा स्टील, ब्रिटेन सरकार और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग ने सर्कुलर मटेरियल्स के क्षेत्र में भारत और ब्रिटेन के बीच अनुसंधान, नवाचार और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने के लिए नई साझेदारी की घोषणा की है। तीन साल की इस रिसर्च एवं इनोवेशन साझेदारी के तहत दोनों देशों के विश्वविद्यालय, शोध संस्थान और उद्योग मिलकर टिकाऊ तथा पुनर्चक्रित सामग्रियों के उपयोग को बढ़ावा देंगे। इसका उद्देश्य संसाधनों का बेहतर इस्तेमाल करना, कार्बन उत्सर्जन कम करने वाली तकनीकों को विकसित करना और महत्वपूर्ण सामग्रियों एवं खनिजों की आपूर्ति शृंखला को अधिक मजबूत बनाना है। इस पहल के माध्यम से दोनों देशों के विशेषज्ञ बाजार के रुझानों, तकनीकी अवसरों और संसाधनों के पुनः उपयोग से जुड़े विषयों पर जानकारी साझा करेंगे। यह सहयोग भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग और इंडियन नेशनल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के साथ पहले किए गए प्रयासों को भी आगे बढ़ाएगा। दोनों देश बुनियादी ढांचे की बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के साथ पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभावों को कम करने के लिए सर्कुलर इकोनॉमी से जुड़े समाधान विकसित करने पर जोर दे रहे हैं।
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सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देने के लिए भारत-ब्रिटेन की संयुक्त पहल
इस साझेदारी के लिए ब्रिटेन सरकार करीब 1.9 मिलियन पाउंड और टाटा स्टील 1 मिलियन पाउंड का योगदान करेगी। इसके अतिरिक्त, चयनित परियोजनाओं को मिलने वाली अनुदान राशि के कम से कम आधे के बराबर अतिरिक्त फंडिंग भी उपलब्ध कराई जाएगी। इस वित्तीय मॉडल का उद्देश्य उन शोध टीमों को प्रोत्साहित करना है, जिनकी तकनीकें औद्योगिक इस्तेमाल के करीब हैं और जिन्हें आगे विकसित करने के लिए अतिरिक्त संसाधनों की आवश्यकता है। रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के ‘ट्रांसफॉर्मिंग सिस्टम्स थ्रू पार्टनरशिप’ (TSP) कार्यक्रम के अंतर्गत अप्रैल 2027 से परियोजनाओं को सहयोग दिया जाएगा। इस साझेदारी के तहत अधिकतम 15 रिसर्च एवं इनोवेशन परियोजनाओं को अनुदान मिलने की उम्मीद है। प्रत्येक परियोजना को 1 लाख से 1.5 लाख पाउंड तक की राशि दी जा सकती है और परियोजना की अवधि अधिकतम तीन साल होगी। प्रत्येक परियोजना का नेतृत्व भारत और ब्रिटेन के एक-एक अकादमिक या शोध साझेदार संयुक्त रूप से करेंगे। परियोजनाओं के चयन में उनके शोध परिणामों को उद्योग, उद्यमिता और अन्य व्यावहारिक क्षेत्रों में इस्तेमाल करने की स्पष्ट योजना पर भी ध्यान दिया जाएगा।
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टाटा स्टील की विशेषज्ञता से शोध परियोजनाओं को मिलेगा औद्योगिक सहयोग
टाटा स्टील के वाइस प्रेसिडेंट–टेक्नोलॉजी, R&D, NMB और ग्राफीन सुबोध पांडेय ने कहा कि कंपनी का भविष्य सर्कुलर और सस्टेनेबल मटेरियल्स में नवाचार करने तथा उनके इस्तेमाल को बड़े पैमाने पर बढ़ावा देने की क्षमता पर निर्भर करेगा। उन्होंने इस साझेदारी को उपयोगी अनुसंधान को वास्तविक औद्योगिक इस्तेमाल तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण अवसर बताया। उनके अनुसार, ब्रिटेन सरकार के सहयोग और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के साथ साझेदारी से दोनों देशों के बीच दीर्घकालिक संबंध मजबूत होंगे। इससे निर्माण और विनिर्माण क्षेत्रों में कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों तथा संसाधनों के पुनः उपयोग को बढ़ावा देने वाली प्रक्रियाओं के विकास और अपनाने में तेजी आ सकती है। टाटा स्टील इस कार्यक्रम के तहत चयनित शोध टीमों को केवल वित्तीय सहयोग तक सीमित सहायता नहीं देगी, बल्कि उन्हें उद्योग जगत के अनुभव और विशेषज्ञता का लाभ भी मिलेगा। परियोजनाओं की जरूरतों के अनुसार कंपनी के वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन, प्रयोगशालाओं और अन्य तकनीकी सुविधाओं के इस्तेमाल का अवसर उपलब्ध कराया जाएगा। जिन परियोजनाओं में व्यावसायिक संभावनाएं होंगी, उन्हें मेंटरशिप और इन्क्यूबेशन सपोर्ट भी दिया जा सकता है।
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कम कार्बन उत्सर्जन वाली तकनीकों के विकास पर रहेगा विशेष जोर
यूनिवर्सिटी ऑफ सरे के एडवांस्ड टेक्नोलॉजी इंस्टीट्यूट के निदेशक और रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग के TSP कार्यक्रम के अध्यक्ष प्रोफेसर रवि सिल्वा CBE FREng ने कहा कि इस कार्यक्रम का उद्देश्य ऐसे व्यावहारिक समाधानों को विकसित करना है, जिन्हें बड़े स्तर पर अपनाया जा सके और वास्तविक परिस्थितियों में इस्तेमाल किया जा सके। उन्होंने टाटा स्टील के साथ साझेदारी को इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उनके अनुसार, भारत और ब्रिटेन के संस्थानों, शोधकर्ताओं और उद्योग जगत की पूरक क्षमताओं को एक साथ लाने से दीर्घकालिक सहयोग मजबूत होगा। इससे टिकाऊ, सर्कुलर और ऊर्जा-कुशल सामग्रियों तथा प्रक्रियाओं को व्यवहार में अपनाने के अवसर बढ़ेंगे। उन्होंने यह भी कहा कि इंजीनियरिंग नवाचार को संसाधनों के बेहतर इस्तेमाल और टिकाऊ व्यवस्थाओं से जोड़ना जरूरी है। इससे बुनियादी ढांचे की बढ़ती मांग को पूरा करने के साथ पर्यावरणीय प्रभावों को कम करने में मदद मिल सकती है। कार्यक्रम की रूपरेखा ऐसी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की दिशा में है, जिनके परिणाम शोध संस्थानों से निकलकर औद्योगिक उपयोग और उद्यमिता तक पहुंच सकें।
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भारत-ब्रिटेन के विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच मजबूत होगा शोध नेटवर्क
रॉयल एकेडमी ऑफ इंजीनियरिंग का TSP कार्यक्रम पिछले एक दशक से अधिक समय से विश्वविद्यालयों और उद्योगों के बीच अंतरराष्ट्रीय सहयोग को बढ़ावा देता रहा है। इस कार्यक्रम के तहत दुनिया भर में 300 से अधिक संयुक्त परियोजनाओं को सहयोग दिया जा चुका है और 800 से अधिक पुरस्कार विजेताओं का नेटवर्क विकसित हुआ है। टाटा स्टील के साथ नई साझेदारी इसी अनुभव को आगे बढ़ाते हुए भारत और ब्रिटेन के शोध एवं औद्योगिक क्षेत्रों के बीच सहयोग का विस्तार करेगी। चयनित परियोजनाओं को उनकी जरूरत और उद्देश्य के अनुरूप तकनीकी मार्गदर्शन, उद्योग से जुड़ने के अवसर तथा संभावित व्यावसायीकरण में मदद मिलेगी। इस पहल से पुनर्चक्रित सामग्रियों के इस्तेमाल, महत्वपूर्ण खनिजों की आपूर्ति शृंखला, ऊर्जा-कुशल विनिर्माण और कम कार्बन उत्सर्जन वाली प्रक्रियाओं से जुड़े नए समाधान विकसित होने की उम्मीद है। इसके साथ ही, शोध परिणामों को व्यावहारिक उत्पादों और तकनीकों में बदलने पर जोर दिया जाएगा। यह साझेदारी संसाधनों के कुशल उपयोग और टिकाऊ औद्योगिक विकास को प्रोत्साहित करने के साथ संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों की दिशा में भी योगदान दे सकती है।