Baharagoda : बहरागोड़ा में चोरी गिरोह का पर्दाफाश, पड़ोसी मास्टरमाइंड समेत सात गिरफ्तार
बंद मकानों को बनाते थे निशाना, चोरी के जेवर खपाने और सोना गलाने में सुनार की भूमिका का आरोप
नकदी, आभूषण, टीवी और दो बाइक बरामद
चोरी का सामान, नकदी और दो मोटरसाइकिल बरामद, सात आरोपी जेल भेजे गए
जेबी लाइव, रिपोर्टर
बहरागोड़ा :थाना क्षेत्र में लगातार हो रही चोरी की घटनाओं का खुलासा करते हुए बहरागोड़ा पुलिस ने बुधवार शाम प्रेस कॉन्फ्रेंस कर सात आरोपियों की गिरफ्तारी की जानकारी दी। पुलिस के अनुसार, ईचड़ासोल, राजलाबांध, मुड़ाकाटी, पिठापुरा और केंवला के बंद मकानों में चोरी करने वाले गिरोह का कथित मास्टरमाइंड आकाश दास निकला, जो पीड़ित परिवार का पड़ोसी बताया जा रहा है। गिरफ्तार आरोपियों में आकाश दास के अलावा शंभू कर्मकार, निखिल नामता, दीपेश कुमार साव, चोरी के सामान को खपाने के आरोपी राहुल बेरा और कृष्णा बेरा तथा सोना गलाकर ठिकाने लगाने के आरोप में ज्वेलरी संचालक सुभाष चंद्र साव शामिल हैं। पुलिस के मुताबिक, आकाश को घर में रखे जेवरात की जानकारी थी। आरोप है कि उसने चावल रखने वाले बर्तन में छिपाए गए आभूषणों की जानकारी जुटाकर चोरी की योजना बनाई। गिरोह बंद मकानों को निशाना बनाता था और चोरी के दौरान ताला तोड़ने के बाद उसे दोबारा चिपकाकर संदेह से बचने की कोशिश करता था।
बहरागोड़ा में बंद मकानों में चोरी करने वाले गिरोह का खुलासा
पुलिस ने गिरफ्तार आरोपियों के पास से 71,100 रुपये नकद, सोने-चांदी के आभूषण, गला हुआ सोना, दो इनवर्टर, एक बड़ा सोनी स्मार्ट टीवी, ताला तोड़ने के औजार और दो मोटरसाइकिलें बरामद की हैं। पुलिस के अनुसार, गिरोह के कुछ सदस्य चोरी की संपत्ति को खपाने में मदद करते थे, जबकि ज्वेलरी संचालक पर सोना गलाकर ठिकाने लगाने का आरोप है। सभी सात आरोपियों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। लगातार हो रही चोरी की घटनाओं के खुलासे के बाद स्थानीय लोगों ने थाना प्रभारी रवि होनाहागा और उनकी पुलिस टीम की कार्रवाई की सराहना की है। पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में चोरी की घटनाओं को लेकर चिंतित लोगों को राहत मिलने की उम्मीद है।
उलीडीह थाना में वर्ष 2015 में दर्ज हुआ था मामला साक्ष्यों और गवाह की गवाही के परीक्षण के बाद अदालत
उलीडीह थाना में वर्ष 2015 में दर्ज हुआ था मामला
साक्ष्यों और गवाह की गवाही के परीक्षण के बाद अदालत ने सुनाया फैसला
जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय में पुराने मुकदमे का निपटारा, बचाव पक्ष की रही अहम भूमिका
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर :जमशेदपुर व्यवहार न्यायालय ने धोखाधड़ी की नीयत से रजिस्ट्री कराने से जुड़े करीब 11 साल पुराने मामले में तीन आरोपियों को बरी कर दिया है। न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी धर्मेंद्र कुमार की अदालत ने जीआर-306/2015 वाद में भवानी हलदर, गणेश हलदर और रूबी झा को साक्ष्यों के परीक्षण के बाद राहत दी। यह मामला उलीडीह थाना से संबंधित है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सूचक कार्तिक हलदर ने जनवरी 2015 में तीनों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 467, 468 और 427 के तहत प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप धोखाधड़ी की नीयत से रजिस्ट्री कराने से संबंधित थे। मामले की सुनवाई के दौरान केवल एक गवाह की गवाही दर्ज हो सकी। इसके बाद अदालत ने उपलब्ध गवाही और साक्ष्यों का परीक्षण किया तथा तीनों आरोपियों को बरी करने का फैसला सुनाया।
उलीडीह थाना के पुराने मामले में अदालत का फैसला, तीनों आरोपियों को मिली राहत
बरी होने के बाद भवानी हलदर ने मामले को झूठा बताते हुए कहा कि सच्चाई को झूठ में बदलना आसान नहीं है। उनके अनुसार, अन्य गवाहों के गवाही के लिए उपस्थित नहीं होने का भी मामले पर असर पड़ा। हालांकि, अदालत के फैसले का आधार उपलब्ध न्यायिक साक्ष्य और सुनवाई के दौरान दर्ज गवाही रही। इस मुकदमे में बचाव पक्ष की ओर से अधिवक्ता हेमंत कुमार और श्रीकांत चौरसिया ने आरोपियों का पक्ष रखा। वहीं, एसोसिएट अधिवक्ताओं अक्षय कुमार झा, मिथिलेश सिंह, राजेश कुमार प्रमाणिक और रमेश प्रसाद ने भी मामले में महत्वपूर्ण सहयोग दिया। लगभग 11 वर्षों तक चले इस मामले में अदालत के फैसले के बाद तीनों आरोपियों को कानूनी राहत मिली।
डीएसपी डेविड ए डोडराय के नेतृत्व में उरकिया गांव के एक घर में छापेमारी गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस
डीएसपी डेविड ए डोडराय के नेतृत्व में उरकिया गांव के एक घर में छापेमारी
गुप्त सूचना के आधार पर पुलिस की कार्रवाई; संदिग्ध कार की तलाश जारी।
संदिग्ध कार की तलाश में जुटी मनोहरपुर पुलिस, शराब के स्रोत की जांच
जेबी लाइव, रिपोर्टर
मनोहरपुर :पश्चिमी सिंहभूम जिले के मनोहरपुर थाना क्षेत्र में पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए उरकिया गांव के एक घर से 20 से 25 पेटी अवैध और कथित नकली शराब बरामद की है। बुधवार सुबह डीएसपी डेविड ए डोडराय के नेतृत्व में पुलिस टीम ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी की। इस दौरान एक व्यक्ति को हिरासत में लिया गया। पुलिस बरामद शराब के साथ उसे मनोहरपुर थाना ले आई, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस की इस कार्रवाई से क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मचने की आशंका है।
उरकिया गांव में अवैध शराब के ठिकाने पर पुलिस की दबिश, जांच तेज
प्राप्त जानकारी के अनुसार, पुलिस को सूचना मिली थी कि एक कार में अवैध और कथित नकली शराब लेकर मनोहरपुर की ओर आया जा रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस ने निगरानी बढ़ाई और संदिग्ध वाहन को पकड़ने के लिए रणनीति बनाई। हालांकि, पुलिस उक्त कार को पकड़ने में सफल नहीं हो सकी। इसके बाद मिली जानकारी के आधार पर उरकिया गांव स्थित एक घर में छापेमारी की गई, जहां पेटियों में रखी शराब बरामद हुई। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि शराब कहां से लाई गई थी और इसकी आपूर्ति किन लोगों तक की जानी थी। मामले में हिरासत में लिए गए व्यक्ति की भूमिका तथा संभावित नेटवर्क की भी जांच की जा रही है। अंतिम सूचना मिलने तक पुलिस की पड़ताल जारी थी।
कई मोहल्लों में 10 से 30 मिनट ही मिल रहा पानी, मोटर खराबी से बढ़ी परेशानी मरम्मत के बाद तीन
कई मोहल्लों में 10 से 30 मिनट ही मिल रहा पानी, मोटर खराबी से बढ़ी परेशानी
मरम्मत के बाद तीन मोटर चालू होने की सूचना के बीच लोगों ने स्थायी समाधान मांगा
पेयजल संकट के स्थायी समाधान के लिए प्रशासन से ठोस कार्रवाई की मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर :मानगो नगर निगम क्षेत्र में पेयजल संकट को लेकर लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। क्षेत्र के कई मोहल्लों में कहीं मात्र 10 से 30 मिनट तक पानी की आपूर्ति हो रही है, तो कहीं पीने के लिए भी पर्याप्त पानी नहीं मिल पा रहा है। त्योहारों के बीच उत्पन्न इस संकट से आम परिवारों को दैनिक जरूरतें पूरी करने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। मानगो नगर निगम क्षेत्र समिति के अध्यक्ष विकास कुमार साहनी ने बताया कि 10 अक्टूबर 2026 को जनता दल (यूनाइटेड) के जिलाध्यक्ष सुबोध श्रीवास्तव के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने पूर्वी सिंहभूम के उपायुक्त से मुलाकात कर ज्ञापन सौंपा था। प्रतिनिधिमंडल ने मानगो में गहराते पेयजल संकट से अवगत कराते हुए तत्काल समाधान की मांग की थी। साहनी के अनुसार, उपायुक्त ने 24 घंटे के भीतर आवश्यक कदम उठाने का आश्वासन दिया था, लेकिन इसके बावजूद कई इलाकों में जलापूर्ति की स्थिति में अपेक्षित सुधार नहीं हुआ। इससे लोगों में नाराजगी बढ़ रही है।
मानगो में पानी की किल्लत से परेशान लोग, प्रशासन से लगाई गुहार
विकास कुमार साहनी ने बताया कि मानगो घनी आबादी वाला क्षेत्र है, जहां बड़ी संख्या में परिवार नियमित पेयजल आपूर्ति पर निर्भर हैं। पिछले कई दिनों से मोटर खराब होने के कारण जलापूर्ति प्रभावित रही है। संबंधित अधिकारियों की ओर से मोटर की मरम्मत कर आपूर्ति सामान्य करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन लोगों की शिकायत है कि उन्हें पर्याप्त पानी नहीं मिल रहा है। साहनी ने कहा कि पेयजल जैसी बुनियादी सुविधा के लिए लोगों को संघर्ष करना पड़ना चिंताजनक है। त्योहारों के दौरान पानी की कमी से घरेलू कामकाज, साफ-सफाई और अन्य दैनिक गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं। उन्होंने प्रशासन और संबंधित विभाग से मांग की कि मानगो नगर निगम के सभी 36 वार्डों में नियमित, पर्याप्त और समान रूप से पानी की आपूर्ति सुनिश्चित की जाए। साथ ही, खराब मोटरों और जलापूर्ति व्यवस्था में मौजूद तकनीकी खामियों को तत्काल दूर किया जाए, ताकि लोगों को बार-बार ऐसी परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।
36 वार्डों में समान जलापूर्ति की मांग, खराब मोटरों की मरम्मत पर जोर
इधर, 14 अक्टूबर 2026 की उपलब्ध जानकारी के अनुसार, मानगो जलापूर्ति परियोजना के इंटेकवेल की खराब मोटर की मरम्मत के बाद तीन मोटर चालू किए जाने और पानी का उठाव शुरू होने की सूचना विधायक सरयू राय ने दी है। इस घटनाक्रम से जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार की उम्मीद जगी है। हालांकि, मोटर चालू होने और पानी का उठाव शुरू होने के बाद सभी मोहल्लों में आपूर्ति कितनी नियमित हुई है, इसकी स्थिति स्पष्ट होना जरूरी है। स्थानीय लोगों की परेशानी का आकलन केवल मोटर चालू होने के आधार पर नहीं, बल्कि घरों तक पर्याप्त पानी पहुंचने से किया जा सकता है। ऐसे में संबंधित विभाग को आपूर्ति की स्थिति की निगरानी कर यह सुनिश्चित करना होगा कि कम दबाव, सीमित समय और अनियमित जलापूर्ति की समस्या से प्रभावित इलाकों को भी राहत मिले। लोगों की मांग है कि तकनीकी खराबियों को दूर करने के साथ पूरी व्यवस्था को भरोसेमंद बनाया जाए।
मानगो जलापूर्ति परियोजना की तीन मोटर चालू, नियमित पानी मिलने की उम्मीद
विकास कुमार साहनी ने कहा कि पेयजल उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिक जिम्मेदारी है और केवल आश्वासन देने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। इसके लिए धरातल पर ठोस कार्रवाई करते हुए प्रत्येक घर तक पर्याप्त पानी पहुंचाना जरूरी है। उन्होंने मांग की कि सभी 36 वार्डों में जलापूर्ति की समीक्षा की जाए, तकनीकी खामियों को समय रहते दूर किया जाए और प्रभावित मोहल्लों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित की जाए। साथ ही, मोटरों में खराबी आने की स्थिति में त्वरित मरम्मत की व्यवस्था भी होनी चाहिए, ताकि लंबे समय तक आपूर्ति बाधित न रहे। फिलहाल, मानगो में पेयजल संकट के बीच मोटरों की मरम्मत से राहत की उम्मीद है, लेकिन वास्तविक समाधान तभी माना जाएगा जब सभी प्रभावित इलाकों में नियमित और पर्याप्त जलापूर्ति बहाल होगी।
एनएच-33 किनारे वर्षों से कचरा जमा होने से दुर्गंध और प्रदूषण की शिकायत जलस्तर दूषित होने की आशंका, स्थानीय लोगों
एनएच-33 किनारे वर्षों से कचरा जमा होने से दुर्गंध और प्रदूषण की शिकायत
जलस्तर दूषित होने की आशंका, स्थानीय लोगों ने स्थायी समाधान की मांग की
डिमना के कचरा डंपिंग यार्ड का स्थायी समाधान चाहते हैं स्थानीय निवासी
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर :डिमना इलाके में एनएच-33 के किनारे स्थित कचरा डंपिंग यार्ड आसपास रहने वाले लोगों के लिए परेशानी का कारण बन गया है। वर्षों से यहां कचरा जमा किए जाने के कारण स्थानीय निवासियों को तेज दुर्गंध और प्रदूषण की समस्या का सामना करना पड़ रहा है। लंबे समय से जारी परेशानी से नाराज लोगों ने अब विरोध का रास्ता अपनाते हुए डंपिंग यार्ड का प्रवेश द्वार बंद कर दिया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कचरे से उठने वाली बदबू इतनी तेज होती है कि घरों के दरवाजे और खिड़कियां बंद रखने के बावजूद राहत नहीं मिलती। इसका असर दैनिक जीवन और आसपास के रिहायशी इलाकों के वातावरण पर पड़ रहा है। लोगों के अनुसार, समस्या लगातार बनी हुई है, लेकिन इसका स्थायी समाधान नहीं निकलने से नाराजगी बढ़ती जा रही है। इसी के विरोध में लोगों ने कचरा डंपिंग यार्ड के प्रवेश द्वार पर मोर्चा संभाल लिया है और कचरा लेकर आने वाले वाहनों को अंदर जाने से रोकने की कोशिश कर रहे हैं।
डिमना में कचरे की दुर्गंध से परेशान लोगों ने शुरू किया विरोध
स्थानीय निवासियों ने कचरा डंपिंग यार्ड से निकलने वाले गंदे पानी के जमीन में रिसने को लेकर भी चिंता जताई है। उनका कहना है कि यदि कचरे से निकलने वाला दूषित पानी आसपास की जमीन में फैलता है, तो इससे भूजल और स्थानीय जलस्रोतों की गुणवत्ता प्रभावित होने की आशंका है। हालांकि, जलस्तर वास्तव में दूषित हुआ है या नहीं, इसकी पुष्टि के लिए संबंधित विभाग की ओर से वैज्ञानिक जांच कराया जाना जरूरी है। लोगों का आरोप है कि कचरे के लगातार जमा होने से इलाके की स्वच्छता और पर्यावरण पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। दुर्गंध के कारण आसपास रहने वाले परिवारों को परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थानीय लोगों की मांग है कि कचरे के निस्तारण के लिए उचित व्यवस्था की जाए और डंपिंग यार्ड से उठने वाली बदबू को नियंत्रित करने के प्रभावी उपाय किए जाएं। उनका कहना है कि जब तक समस्या का समाधान नहीं होता, तब तक लोगों को राहत मिलने की उम्मीद कम है।
डंपिंग यार्ड से निकलने वाले गंदे पानी की जांच कराने की मांग
लोगों के अनुसार, जिस जमीन पर वर्तमान में कचरा डंप किया जा रहा है, वहां पहले खेलकूद जैसी गतिविधियां होती थीं। बाद में इस स्थान पर आधुनिक बस अड्डा बनाए जाने की उम्मीद जताई गई थी। स्थानीय निवासियों को लगा था कि इससे क्षेत्र का विकास होगा और लोगों को परिवहन की बेहतर सुविधाएं मिलेंगी। लेकिन समय के साथ यह जमीन कचरा डंपिंग यार्ड में तब्दील हो गई। लोगों का कहना है कि जिस स्थान से विकास और बेहतर सुविधाओं की उम्मीद थी, वहां अब कचरे का जमाव उनकी परेशानी बढ़ा रहा है। एनएच-33 के किनारे स्थित इस स्थल पर वर्षों से कचरा जमा होने की समस्या को लेकर स्थानीय लोगों में असंतोष है। उनका मानना है कि क्षेत्र की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कचरा प्रबंधन की ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे आसपास के निवासियों को परेशानी न हो और पर्यावरण की सुरक्षा भी सुनिश्चित की जा सके।
खेलकूद की जमीन से कचरा डंपिंग यार्ड तक, विकास की उम्मीदों पर उठे सवाल
लगातार बढ़ती परेशानी के बीच स्थानीय लोगों ने खुद ही डंपिंग यार्ड के प्रवेश द्वार पर पहरा देना शुरू कर दिया है। उनका उद्देश्य कचरा लेकर आने वाले वाहनों की आवाजाही रोकना और प्रशासन का ध्यान समस्या की ओर आकर्षित करना है। लोगों का कहना है कि दुर्गंध और प्रदूषण की शिकायतों के बावजूद स्थिति में सुधार नहीं होने के कारण उन्हें विरोध करना पड़ रहा है। वे चाहते हैं कि कचरे का अनियंत्रित जमाव रोका जाए और उसके निस्तारण के लिए वैज्ञानिक तरीके अपनाए जाएं। स्थानीय निवासियों ने स्पष्ट किया कि समस्या का स्थायी समाधान होने तक वे इस मुद्दे को उठाते रहेंगे। हालांकि, प्रवेश द्वार बंद किए जाने से कचरा वाहनों की आवाजाही और कचरा निस्तारण व्यवस्था पर क्या असर पड़ा है, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है। फिलहाल, लोगों का विरोध डंपिंग यार्ड के संचालन और उससे उत्पन्न परेशानियों को लेकर क्षेत्र में चर्चा का विषय बना हुआ है।
कचरा वाहनों को रोकने के लिए स्थानीय लोगों ने संभाला मोर्चा
डिमना के स्थानीय निवासियों ने संबंधित प्रशासन और नगर निकाय से तत्काल हस्तक्षेप करने की मांग की है। उनकी प्रमुख मांगों में डंपिंग यार्ड से उठने वाली दुर्गंध पर नियंत्रण, कचरे का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण, गंदे पानी के संभावित प्रभाव की जांच और आसपास के वातावरण को स्वच्छ बनाए रखने के लिए ठोस कदम उठाना शामिल है। लोगों का कहना है कि कचरा प्रबंधन की जिम्मेदारी निभाते हुए आसपास रहने वाले परिवारों के स्वास्थ्य, स्वच्छता और पर्यावरण का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। इसके लिए नियमित निगरानी, उचित कचरा निस्तारण और प्रदूषण नियंत्रण के प्रभावी उपाय जरूरी हैं। फिलहाल, स्थानीय लोगों की शिकायतों और विरोध के बीच प्रशासन की ओर से किसी ठोस पहल की जानकारी सामने नहीं आई है। अब यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि संबंधित अधिकारी लोगों की मांगों पर क्या कार्रवाई करते हैं और वर्षों से चली आ रही इस समस्या के समाधान के लिए कैसी व्यवस्था लागू की जाती है।
स्वर्णरेखा परियोजना के कार्यपालक अभियंता और एसडीओ से मारपीट के आरोपों को बताया बेबुनियाद कहा— जानकारी लेना और मारपीट करना
स्वर्णरेखा परियोजना के कार्यपालक अभियंता और एसडीओ से मारपीट के आरोपों को बताया बेबुनियाद
कहा— जानकारी लेना और मारपीट करना अलग-अलग बातें हैं
स्वर्णरेखा परियोजना विवाद में संबंधित अधिकारियों के पक्ष का इंतजार
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर :पोटका के विधायक संजीव सरदार ने स्वर्णरेखा परियोजना के कार्यपालक अभियंता और एसडीओ के साथ कथित मारपीट के आरोपों को खारिज करते हुए अपना पक्ष रखा है। विधायक ने कहा कि उन्होंने विभागीय अधिकारियों को बुलाकर केवल संबंधित मामले की जानकारी हासिल की थी। ऐसे में मारपीट का आरोप कैसे सामने आया, यह उनकी समझ से परे है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अधिकारियों से किसी विषय पर जानकारी लेना और उनके साथ मारपीट करना दो अलग-अलग बातें हैं। विधायक के अनुसार, उन्होंने अधिकारियों के साथ मारपीट नहीं की है और इस संबंध में लगाए जा रहे आरोप बेबुनियाद हैं। उन्होंने कहा कि विभागीय कामकाज को लेकर अधिकारियों से जानकारी मांगना जनप्रतिनिधि की जिम्मेदारी का हिस्सा है, लेकिन इसे मारपीट की घटना के रूप में पेश करना उचित नहीं है।
विधायक संजीव सरदार ने मारपीट के आरोपों को किया खारिज
विधायक संजीव सरदार ने कहा, “आखिर मैं किसी कर्मचारी को क्यों मारूंगा? अधिकारियों से जानकारी लेना और किसी के साथ मारपीट करना, दोनों अलग-अलग बातें हैं।” उन्होंने कहा कि यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी गलत कार्य करते हुए पाया जाता है, तो वे उसे फटकार जरूर लगाते हैं। कामकाज में लापरवाही मिलने पर अपनी नाराजगी भी जाहिर करते हैं, लेकिन इसका अर्थ यह नहीं है कि वे किसी के साथ मारपीट करेंगे। विधायक ने दोहराया कि स्वर्णरेखा परियोजना के अधिकारियों के साथ मारपीट की कोई घटना नहीं हुई है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों से बातचीत कर जानकारी लेने के मामले को बेवजह मारपीट से जोड़कर प्रस्तुत किया जा रहा है। हालांकि, यह विधायक का पक्ष है और मामले के अन्य पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
अधिकारियों से सवाल करना मारपीट नहीं, विधायक ने दी सफाई
इस पूरे प्रकरण में विधायक संजीव सरदार ने अपना पक्ष स्पष्ट कर दिया है। अब मामले की वास्तविक स्थिति सामने लाने के लिए स्वर्णरेखा परियोजना के संबंधित कार्यपालक अभियंता और एसडीओ का पक्ष भी महत्वपूर्ण होगा। आरोपों से जुड़े घटनाक्रम, उपलब्ध साक्ष्यों और संबंधित पक्षों के बयानों की पुष्टि के बाद ही विवाद की पूरी तस्वीर स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल विधायक ने मारपीट के आरोपों को सिरे से नकारते हुए कहा है कि उन्होंने अधिकारियों से केवल जानकारी मांगी थी। मामले में संबंधित अधिकारियों की प्रतिक्रिया और किसी आधिकारिक जांच की स्थिति सामने आने पर आगे की जानकारी स्पष्ट हो सकेगी।
राजेंद्र नगर की कमेटी में करीब 10 लाख रुपये के कथित गबन का आरोप महीनों से शिकायत के बावजूद कार्रवाई
राजेंद्र नगर की कमेटी में करीब 10 लाख रुपये के कथित गबन का आरोप
महीनों से शिकायत के बावजूद कार्रवाई नहीं होने से परेशान होने का दावा
सुरक्षा जवान की सतर्कता से टला बड़ा हादसा, पुलिस जांच में जुटी
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर :पूर्वी सिंहभूम जिला उपायुक्त कार्यालय के मुख्य गेट पर बुधवार को उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब एक व्यक्ति ने अपने शरीर पर केरोसिन तेल डालकर आत्महत्या करने का प्रयास किया। मौके पर तैनात सुरक्षा जवान की तत्परता से एक बड़ा हादसा टल गया। व्यक्ति के हाथ में लाइटर होने की जानकारी मिलते ही जवान ने उसे छीन लिया और आग लगाने से रोक दिया। घटना के बाद कार्यालय परिसर के बाहर लोगों की भीड़ जुट गई। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने व्यक्ति को शांत कराने और समझाने का प्रयास किया। इस दौरान कुछ देर तक गहमागहमी की स्थिति बनी रही। बाद में पुलिस उसे पूछताछ और मामले की जांच के लिए थाने ले गई। घटना के पीछे व्यक्ति ने लंबे समय से न्याय नहीं मिलने और प्रशासनिक स्तर पर शिकायतों की अनदेखी किए जाने की बात कही है। हालांकि, उसके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।
डीसी कार्यालय के बाहर आत्मदाह की कोशिश से मची अफरा-तफरी
व्यक्ति ने खुद को राजेंद्र नगर का निवासी बताते हुए वहां की एक कमेटी में करीब 10 लाख रुपये के कथित गबन का आरोप लगाया है। उसके अनुसार, कमेटी में कथित तौर पर अनियमितताएं की जा रही हैं, जिनके संबंध में वह पिछले कई महीनों से जिला प्रशासन के अधिकारियों को शिकायत दे रहा था। व्यक्ति का दावा है कि बार-बार शिकायत करने के बावजूद अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। उसने आरोप लगाया कि अधिकारी उसकी शिकायतों पर केवल आश्वासन दे रहे थे और समस्या का समाधान नहीं हो रहा था। इसी कथित उपेक्षा और निराशा के कारण उसने बुधवार को उपायुक्त कार्यालय के मुख्य गेट पर आत्मघाती कदम उठाने का प्रयास किया। हालांकि, कमेटी में वित्तीय अनियमितताओं की वास्तविक स्थिति, कथित गबन की राशि और शिकायतों पर प्रशासन की ओर से की गई कार्रवाई की जानकारी अभी स्पष्ट नहीं है। इन बिंदुओं की पुष्टि संबंधित दस्तावेजों और अधिकारियों के पक्ष से ही हो सकेगी।
राजेंद्र नगर की कमेटी पर 10 लाख रुपये के गबन का आरोप
घटना के दौरान व्यक्ति के गले में एक दस्तावेज भी लटका हुआ था, जिसे उसने अदालत का स्टे ऑर्डर बताया। उसका कहना था कि न्यायालय से आदेश मिलने के बावजूद उसकी समस्या का समाधान नहीं किया जा रहा है। व्यक्ति ने आरोप लगाया कि लगातार शिकायत करने और कानूनी प्रक्रिया का सहारा लेने के बाद भी उसे राहत नहीं मिली। इसी वजह से वह मानसिक रूप से परेशान हो गया था और उसने यह कदम उठाया। मौके पर मौजूद पुलिसकर्मियों ने उसे समझाने का प्रयास किया, जबकि सुरक्षा जवान ने समय रहते लाइटर छीनकर उसकी जान बचाने में अहम भूमिका निभाई। हालांकि, व्यक्ति द्वारा बताए गए न्यायालय के आदेश की प्रकृति, उसकी वर्तमान वैधता और संबंधित मामले में प्रशासनिक कार्रवाई की स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है। इन तथ्यों की जांच के बाद ही पूरे प्रकरण की वास्तविक स्थिति सामने आ सकेगी।
कोर्ट के स्टे ऑर्डर के बावजूद न्याय नहीं मिलने का व्यक्ति ने लगाया आरोप
घटना के बाद पुलिस व्यक्ति को थाने ले गई, जहां उससे पूछताछ कर पूरे मामले की जानकारी जुटाई जा रही है। जांच में राजेंद्र नगर की संबंधित कमेटी पर लगाए गए कथित गबन के आरोपों, जिला प्रशासन को दी गई शिकायतों और न्यायालय के आदेश से जुड़े दस्तावेजों की पड़ताल महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल व्यक्ति के आरोपों के संबंध में संबंधित कमेटी और जिला प्रशासन का पक्ष सामने आना बाकी है। यह भी स्पष्ट नहीं है कि पूर्व में दी गई शिकायतों पर किस स्तर पर क्या कार्रवाई की गई थी। सुरक्षा जवान की तत्परता से व्यक्ति को आग लगाने से रोक लिया गया और एक संभावित गंभीर हादसा टल गया। मामले में आगे की स्थिति पुलिस जांच, उपलब्ध दस्तावेजों और संबंधित पक्षों के आधिकारिक बयान के बाद स्पष्ट होगी।