- आदिवासी-मुलवासी समाज ने शहीद को नमन कर दोहराया सामाजिक एकता का संकल्प
- कोका कामार चौक पर श्रद्धांजलि, समाज के विभिन्न वर्गों की रही सहभागिता
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : बिरसा सेना एवं कोका कामार करमाली संघर्ष समिति के संयुक्त तत्वावधान में आदिवासी-मुलवासी समाज के अमर वीर शहीद कोका कामार जी का 130वाँ शहादत दिवस बारिडीह स्थित कोका कामार चौक पर श्रद्धा और सम्मान के साथ मनाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत शहीद कोका कामार जी की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर तथा दो मिनट का मौन रखकर की गई। इस अवसर पर बड़ी संख्या में आदिवासी-मुलवासी समाज के लोग, सामाजिक कार्यकर्ता, बुद्धिजीवी, युवा साथी, महिला प्रतिनिधि एवं विभिन्न संगठनों के सदस्य उपस्थित रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान शहीद के बलिदान को याद करते हुए भावनात्मक माहौल देखने को मिला।
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उलगुलान आंदोलन में कोका कामार जी की भूमिका को किया गया याद
सभा को संबोधित करते हुए वक्ताओं ने कहा कि शहीद कोका कामार जी धरती आबा बिरसा मुंडा के प्रमुख सेनापतियों एवं अत्यंत विश्वस्त सहयोगियों में से एक थे। उलगुलान आंदोलन के दौरान उन्होंने अंग्रेजी शासन, जमींदारी व्यवस्था और बाहरी शोषण के खिलाफ निर्णायक भूमिका निभाई। वक्ताओं ने बताया कि अंग्रेजी हुकूमत उनके प्रभाव और नेतृत्व से इतनी भयभीत थी कि उन्हें हाथ-पैर में बेड़ियाँ डालकर जेल में बंद कर दिया गया, ताकि वे कैद में रहते हुए भी किसी जनआंदोलन का केंद्र न बन सकें। यह तथ्य उनके क्रांतिकारी व्यक्तित्व और संघर्षशील नेतृत्व को दर्शाता है।
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नई पीढ़ी को इतिहास से जोड़ने का लिया गया संकल्प
वक्ताओं ने कहा कि कोका कामार जी जैसे वीर सेनानियों का बलिदान यह साबित करता है कि उलगुलान आंदोलन किसी एक व्यक्ति का नहीं, बल्कि अनेक साहसी योद्धाओं के त्याग और संघर्ष से खड़ा हुआ ऐतिहासिक जनआंदोलन था। सभा में यह भी आह्वान किया गया कि शहादत दिवस केवल श्रद्धांजलि तक सीमित न रहे, बल्कि नई पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने, सामाजिक एकता को मजबूत करने तथा आदिवासी-मुलवासी समाज के अधिकार, स्वाभिमान और अस्तित्व की रक्षा के लिए संगठित प्रयास किए जाएँ। इस अवसर पर बिरसा सेना के संस्थापक प्रमुख बलराम कर्मकार सहित केंद्रीय सदस्य राजू लोहरा, बिसु लोहरा, अरमान बावरी, गोविन्द कर्मकार, सुनील सोरेन, डेनियाल उराउ, लाल मुंडा, विकास पात्रों, विष्णु नाग, दीपक मुर्मू, दीपक रंजीत, कृष्णा लोहार, उमाकांत ओझा, दीपक लकड़ा समेत अनेक सामाजिक कार्यकर्ता और गणमान्य लोग उपस्थित थे। कार्यक्रम शांतिपूर्ण, अनुशासित और सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।
























