डुमरिया के दोमहानी सबर टोला में लाभुकों ने उठाए सवाल, अधूरे मकानों में रहने को मजबूर परिवार
दरवाजे-खिड़कियां नहीं, प्लास्टर भी अधूरा; खतरे के बीच गुजर रही जिंदगी
मुखिया प्रतिनिधि ने आरोपों को बताया भ्रामक, जांच के बाद ही होगी स्थिति स्पष्ट
दोनों पक्षों के दावों से बढ़ा विवाद, जांच पर टिकी निगाहें
जेबी लाइव, रिपोर्टर
डुमरिया : पूर्वी सिंहभूम जिले के डुमरिया प्रखंड अंतर्गत केंदुआ पंचायत के बादल गोड़ा गांव स्थित दोमहानी सबर टोला में आबुआ आवास योजना के अधूरे निर्माण को लेकर आदिम जनजाति (सबर) परिवारों ने गहरी नाराजगी जताई है। पानसुरी सबर, बुदी सबर, ठुड़ू सबर, डेबो सबर, रामो सबर, बिरसिंह सबर, गोदा सबर और टुरा सबर समेत कई लाभुकों का कहना है कि योजना के तहत स्वीकृत उनके आवास आज तक पूरे नहीं हो पाए हैं। लाभुकों के अनुसार निर्माण कार्य काफी समय पहले शुरू हुआ था, लेकिन केवल छत की ढलाई के बाद काम रोक दिया गया। इससे परिवारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है और वे अधूरे घरों में रहने को विवश हैं।
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अधूरे निर्माण से सुरक्षा और सुविधा दोनों पर संकट
लाभुकों का आरोप है कि आवास निर्माण का कार्य पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि द्वारा ठेके के माध्यम से कराया जा रहा था। उन्होंने बताया कि अब तक मकानों में न तो दरवाजे और खिड़कियां लगाई गई हैं और न ही दीवारों पर प्लास्टर किया गया है। अधूरे मकानों में रहने के कारण परिवार असुरक्षित माहौल में जीवन बिताने को मजबूर हैं। उनका कहना है कि बरसात के दिनों में परेशानी और बढ़ जाती है तथा सांप, बिच्छू और चोरी जैसी घटनाओं का खतरा हमेशा बना रहता है। लाभुकों ने यह भी आरोप लगाया कि वे अपने बैंक खातों से योजना की राशि निकालकर मुखिया प्रतिनिधि को देते रहे, लेकिन इसके बावजूद निर्माण कार्य पूरा नहीं कराया गया। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र हस्तक्षेप कर निर्माण कार्य पूरा कराने की मांग की है।
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लाभुकों ने प्रशासन से जांच और कार्रवाई की मांग की
वहीं केंदुआ पंचायत के मुखिया प्रतिनिधि ने लाभुकों के आरोपों का खंडन किया है। उनका कहना है कि आबुआ आवास योजना की पूरी राशि अब तक प्राप्त नहीं हुई है, जिसके कारण कुछ आवासों का निर्माण अधूरा रह गया है। उन्होंने दावा किया कि शेष राशि मिलते ही सभी लंबित निर्माण कार्य पूरे करा दिए जाएंगे। मुखिया प्रतिनिधि ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ लाभुकों ने बायोमेट्रिक के माध्यम से अपने खातों से राशि निकालकर निजी कार्यों में खर्च कर दी, जिससे उपलब्ध धनराशि में निर्माण कार्य पूरा कराना संभव नहीं हो सका। दोनों पक्षों के अलग-अलग दावों के बीच अब प्रशासनिक जांच की मांग तेज हो गई है। स्थानीय लोगों का मानना है कि निष्पक्ष जांच के बाद ही पूरे मामले की वास्तविकता सामने आ सकेगी।


























