बसों की कमी से दर्जनों बच्चे स्कूल जाने से वंचित, अतिरिक्त बस और विद्यालय उत्क्रमण की मांग तेज
शिक्षा को विकास का आधार बताते हुए समाधान की मांग
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की समस्याओं को लेकर सोमवार को ग्रामीणों, अभिभावकों और स्कूली बच्चों का आक्रोश सड़क पर फूट पड़ा। करमपदा गांव के समीप किरीबुरू-थोलकोबाद मुख्य चौक पर बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सेल किरीबुरू प्रबंधन द्वारा संचालित दोनों स्कूल बसों को रोककर प्रदर्शन किया। प्रदर्शन में शामिल बच्चों ने हाथों में किताबें और कॉपियां लेकर शिक्षा के अधिकार की मांग करते हुए जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों का कहना था कि वर्षों से स्कूल बसों की संख्या अपर्याप्त है, जिसके कारण क्षेत्र के अनेक बच्चे नियमित रूप से स्कूल नहीं पहुंच पा रहे हैं। कई बार शिकायत किए जाने के बावजूद न तो सेल प्रबंधन और न ही संबंधित प्रशासनिक विभागों ने समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कोई ठोस कदम उठाया है। इससे ग्रामीणों में नाराजगी बढ़ती जा रही है।
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‘हमें पढ़ना है, आगे बढ़ना है’ के नारों से गूंजा प्रदर्शन स्थल
प्रदर्शन के दौरान स्कूली बच्चों ने भावुक अंदाज में अपनी समस्याएं सामने रखीं। बच्चों ने कहा कि वे पढ़-लिखकर अपने माता-पिता और क्षेत्र का नाम रोशन करना चाहते हैं, लेकिन संसाधनों की कमी उनके सपनों के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बन रही है। “हम आधी रोटी खाएंगे, फिर भी स्कूल जाएंगे” और “हमें खूब पढ़ना है, जीवन में आगे बढ़ना है” जैसे नारों से पूरा क्षेत्र गूंज उठा। अभिभावकों ने बताया कि शिक्षा के प्रति बच्चों में उत्साह तो है, लेकिन परिवहन सुविधा की कमी के कारण उनका मनोबल प्रभावित हो रहा है। कई विद्यार्थी बस में जगह नहीं मिलने के कारण रोजाना घर लौट जाते हैं। इससे उनकी पढ़ाई लगातार प्रभावित हो रही है और भविष्य को लेकर चिंता बढ़ती जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षा जैसी मूलभूत आवश्यकता की अनदेखी किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जा सकती।
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15 गांवों के विद्यार्थियों के लिए केवल दो बसें, बढ़ी परेशानी
ग्रामीणों के अनुसार सेल की कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) योजना के तहत करमपदा, थोलकोबाद सहित लगभग 15 गांवों के विद्यार्थियों के लिए केवल दो स्कूल बसें संचालित की जा रही हैं। पहले छात्रों की संख्या कम होने के कारण यह व्यवस्था किसी तरह चल रही थी, लेकिन अब विद्यार्थियों की संख्या बढ़ने से बसों में पर्याप्त जगह नहीं बचती। सुरक्षा मानकों के तहत चालक निर्धारित क्षमता से अधिक बच्चों को बस में बैठाने से इनकार कर देते हैं, जिसके कारण कई छात्र-छात्राएं प्रतिदिन स्कूल नहीं पहुंच पाते। ग्रामीणों ने बताया कि थोलकोबाद और करमपदा से किरीबुरू की दूरी लगभग 25 से 40 किलोमीटर तक है। क्षेत्र में उच्च कक्षाओं की शिक्षा उपलब्ध नहीं होने के कारण बच्चों को रोजाना लंबी और कठिन यात्रा करनी पड़ती है। पहाड़ी रास्ते, खतरनाक घाटियां और सीमित परिवहन सुविधा उनकी शिक्षा में गंभीर बाधा बन रही हैं।
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अतिरिक्त बस या विद्यालय उत्क्रमण की मांग, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शनकारियों ने समस्या के समाधान के लिए दो प्रमुख मांगें प्रशासन और सेल प्रबंधन के समक्ष रखीं। पहली मांग यह है कि सीएसआर योजना के तहत तत्काल अतिरिक्त स्कूल बस उपलब्ध कराई जाए, ताकि सभी विद्यार्थियों को नियमित और सुरक्षित रूप से स्कूल पहुंचाया जा सके। दूसरी मांग के तहत थोलकोबाद विद्यालय को कम से कम आठवीं कक्षा तक तथा करमपदा विद्यालय को दसवीं या प्लस-टू स्तर तक उत्क्रमित करने की बात कही गई। ग्रामीणों का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा उपलब्ध हो जाए तो बच्चों को लंबी दूरी तय करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा। उन्होंने जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग और सेल किरीबुरू प्रबंधन से तत्काल हस्तक्षेप कर सारंडा के बच्चों के भविष्य को सुरक्षित करने की मांग की। उनका कहना है कि नक्सल प्रभावित क्षेत्र में शिक्षा ही विकास और सामाजिक बदलाव का सबसे मजबूत माध्यम है।






















