जादूगोड़ा की सोन मुनि भूमिज ने विधायक संजीव सरदार से मांगी मदद
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जादूगोड़ा : जादूगोड़ा के मुसाबनी प्रखंड अंतर्गत फॉरेस्ट पंचायत क्षेत्र की रहने वाली आदिवासी महिला सोन मुनि भूमिज ने अपनी पुस्तैनी जमीन को कथित भू-माफियाओं से बचाने के लिए पोटका विधायक संजीव सरदार से मदद की गुहार लगाई है। शुक्रवार को वह विधायक के तुरामडीह स्थित आवासीय कार्यालय पहुंचीं और अपनी समस्या से उन्हें अवगत कराया। सोन मुनि भूमिज का आरोप है कि कुछ लोगों की नजर उनकी पैतृक जमीन पर है और उसे कब्जाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने विधायक को बताया कि जब वह अपनी जमीन पर निर्माण कार्य कराने का प्रयास करती हैं तो उन्हें रोका जाता है। महिला ने यह भी आरोप लगाया कि बागबेड़ा थाना पुलिस द्वारा उन्हें अपनी ही जमीन पर काम नहीं करने दिया जा रहा है तथा जेल भेजने की धमकी भी दी जा रही है। इस पूरे मामले को लेकर उन्होंने प्रशासनिक हस्तक्षेप और न्याय की मांग की है।
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घाघीडीह स्थित जमीन पर दस्तावेजों के साथ किया प्रदर्शन
विधायक से मुलाकात के बाद भी समाधान नहीं निकलने पर सोन मुनि भूमिज ने घाघीडीह स्थित अपनी जमीन पर पहुंचकर दस्तावेजों के साथ प्रदर्शन किया। उन्होंने दावा किया कि पूर्वी सिंहभूम जिले के घाघीडीह मौजा, बागबेड़ा थाना क्षेत्र में स्थित खाता संख्या 2 के प्लॉट संख्या 4992 तथा खाता संख्या 13 के प्लॉट संख्या 4993 की कुल लगभग 29.52 डिसमिल जमीन उनके पूर्वजों की खातियानी और रैयती जमीन है। उनका कहना है कि इस भूमि पर उनका वैधानिक अधिकार है, लेकिन कथित भू-माफियाओं द्वारा विवाद उत्पन्न कर निर्माण कार्य में बाधा पहुंचाई जा रही है। महिला ने कहा कि उन्होंने अपनी जमीन से जुड़े सभी आवश्यक कागजात प्रशासन और संबंधित अधिकारियों के समक्ष प्रस्तुत किए हैं, फिर भी उन्हें राहत नहीं मिल सकी है। प्रदर्शन के दौरान उन्होंने अपनी जमीन की सुरक्षा और कानूनी अधिकार बहाल करने की मांग दोहराई।
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मुख्यमंत्री से जांच और न्याय की मांग, आदिवासी संगठनों की भूमिका पर नजर
सोन मुनि भूमिज ने कहा कि उन्होंने जिले के पुलिस अधीक्षक समेत कई प्रशासनिक अधिकारियों से न्याय की गुहार लगाई, लेकिन अब तक कोई ठोस परिणाम सामने नहीं आया है। ऐसे में उनकी अंतिम उम्मीद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन से है। उन्होंने मुख्यमंत्री से पूरे मामले की निष्पक्ष प्रशासनिक जांच कराने तथा उनकी पुस्तैनी जमीन पर उनका अधिकार सुनिश्चित करने की मांग की है। महिला का कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो आदिवासी समुदाय की रैयती जमीनों पर भू-माफियाओं का खतरा और बढ़ सकता है। इस मामले ने स्थानीय स्तर पर भी चर्चा को जन्म दिया है और अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि प्रशासन, जनप्रतिनिधि और विभिन्न आदिवासी संगठन इस मुद्दे पर क्या कदम उठाते हैं। फिलहाल पीड़ित महिला अपनी जमीन की सुरक्षा और न्याय की उम्मीद में संघर्ष जारी रखे हुए हैं।
























