यूनिवर्सल पीस पैलेस में तीन दिवसीय शिविर का शुभारंभ, सैकड़ों प्रतिभागियों ने लिया हिस्सा
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : जमशेदपुर के सोनारी स्थित यूनिवर्सल पीस पैलेस में ब्रह्माकुमारीज़ के तत्वावधान में आयोजित तीन दिवसीय प्राकृतिक चिकित्सा एवं राजयोग मेडिटेशन शिविर का प्रथम दिवस उत्साह, उमंग और आध्यात्मिक ऊर्जा के साथ संपन्न हुआ। लंबे समय से प्रतीक्षित इस शिविर में कोल्हान, झारखंड तथा पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से सैकड़ों प्रतिभागियों ने भाग लिया। कोलकाता, चाकुलिया, बोकारो, रांची सहित कई शहरों से स्वास्थ्य और आध्यात्मिक जीवन में रुचि रखने वाले लोग शिविर में पहुंचे। कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को प्राकृतिक चिकित्सा, सकारात्मक जीवनशैली और आध्यात्मिक अभ्यासों के माध्यम से स्वस्थ एवं तनावमुक्त जीवन की दिशा में प्रेरित करना है। पहले ही दिन प्रतिभागियों में विशेष उत्साह देखने को मिला और पूरे परिसर में सकारात्मक ऊर्जा का वातावरण बना रहा।
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विचारों और भावनाओं का स्वास्थ्य से गहरा संबंध: डॉ. श्याम गांगुली
शिविर के मुख्य वक्ता एवं ब्रह्माकुमार डॉ. श्याम जी गांगुली (माउंट आबू) ने अपने वैज्ञानिक एवं आध्यात्मिक व्याख्यान में बताया कि अधिकांश बीमारियों की जड़ हमारे विचार, भावनाएं और संस्कार होते हैं। उन्होंने कहा कि भय, चिंता और नकारात्मक सोच का सीधा प्रभाव शरीर की जैविक प्रक्रियाओं पर पड़ता है। उदाहरण देते हुए उन्होंने समझाया कि भय की स्थिति में हार्मोनल परिवर्तन होने लगते हैं, जिससे लार ग्रंथियों का स्राव कम हो जाता है, मुख सूखने लगता है और पाचन तंत्र भी प्रभावित होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भय एक भावना है, जबकि शरीर में होने वाले परिवर्तन उसके परिणाम हैं। यदि व्यक्ति अपने विचारों और भावनाओं को नियंत्रित करना सीख ले तो अनेक रोगों को प्रारंभिक स्तर पर ही रोका जा सकता है। उनके सरल और रोचक प्रस्तुतीकरण ने प्रतिभागियों को गहराई से प्रभावित किया।
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राजयोग मेडिटेशन से जागृत होती है आत्म-उपचार की शक्ति
डॉ. गांगुली ने कहा कि राजयोग मेडिटेशन, सकारात्मक चिंतन, विज़ुअलाइजेशन और आत्मचेतना के अभ्यास से व्यक्ति अपने विचारों को सकारात्मक दिशा दे सकता है। इससे शरीर की स्वाभाविक उपचार क्षमता यानी सेल्फ हीलिंग पावर सक्रिय होती है, जो मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में सहायक होती है। उन्होंने बताया कि आधुनिक जीवनशैली में बढ़ते तनाव, अवसाद और मानसिक दबाव से बचने के लिए आध्यात्मिक अभ्यास अत्यंत आवश्यक हैं। शिविर में उपस्थित प्रतिभागियों ने इस वैज्ञानिक और आध्यात्मिक समन्वय को नई दृष्टि प्रदान करने वाला बताया। सत्र के दौरान अनेक लोगों ने अपने अनुभव भी साझा किए और भविष्य में नियमित रूप से राजयोग का अभ्यास करने की इच्छा व्यक्त की।
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प्राकृतिक आहार और सकारात्मक जीवनशैली अपनाने का संदेश
इस अवसर पर ब्रह्माकुमारी अंजू दीदी, निदेशिका, कोल्हान प्रमंडल ने कहा कि पिछले एक वर्ष में आयोजित यह चौथा प्राकृतिक चिकित्सा एवं राजयोग शिविर है और पूर्व के सभी शिविर लोगों के जीवन में सकारात्मक परिवर्तन लाने में सफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्राकृतिक चिकित्सा और आध्यात्मिकता का प्रभावी संगम लोगों को रोगमुक्त और तनावमुक्त जीवन की ओर ले जा सकता है। शिविर में प्रतिभागियों को स्वास्थ्यवर्धक प्राकृतिक आहार, ताजे जूस और औषधीय काढ़ा भी उपलब्ध कराया गया, जिसकी सभी ने सराहना की। प्रतिभागियों के चेहरों पर उत्साह और संतोष स्पष्ट दिखाई दिया। आयोजकों ने बताया कि इच्छुक व्यक्ति शेष दो दिनों या एक दिन के लिए भी पंजीकरण करा सकते हैं और अधिक जानकारी के लिए निर्धारित संपर्क नंबर पर संपर्क कर सकते हैं।
























