- ‘मेरा बूथ सबसे मज़बूत’ अभियान के जरिए बीजेपी ने शुरू की जमीनी रणनीति
- विपक्षी गठबंधन पर भी निशाना साधने के संकेत
- NDA बनाम INDIA—बिहार में कौन है बढ़त पर?
जेबी लाइव, रिपोर्टर
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 की उलटी गिनती शुरू हो चुकी है और इसी बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ‘मेरा बूथ सबसे मज़बूत’ अभियान के तहत 15 अक्टूबर को बिहार के भाजपा-एनडीए कार्यकर्ताओं से सीधा संवाद करने की घोषणा की है। पीएम मोदी ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर पोस्ट कर कहा कि बिहार में भाजपा-एनडीए की जीत सुनिश्चित करने के लिए बूथ-स्तरीय कार्यकर्ता पूरी प्रतिबद्धता और ऊर्जा के साथ काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वह इन कार्यकर्ताओं के सुझाव लेंगे और कुछ चुनिंदा कार्यकर्ताओं से सीधे बातचीत करेंगे। यह कार्यक्रम न केवल चुनावी तैयारी का हिस्सा है बल्कि बूथ स्तर पर कार्यकर्ताओं की मजबूती के जरिए एनडीए के संगठनात्मक ढांचे को धार देने की रणनीति माना जा रहा है।
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बूथ मैनेजमेंट क्यों है बिहार चुनाव का असली खेल?
‘मेरा बूथ सबसे मज़बूत’ अभियान बीजेपी की लंबे समय से चल रही संगठन विस्तार रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। इस अभियान के जरिये भाजपा जमीनी कार्यकर्ताओं को सीधे जोड़ने और स्थानीय स्तर पर चुनावी मुद्दों की पहचान करने का प्रयास कर रही है। राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार में भाजपा और उसके सहयोगियों की चुनावी कामयाबी काफी हद तक बूथ प्रबंधन पर ही निर्भर करेगी। प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस अभियान से जुड़ना इस बात का संकेत है कि पार्टी बिहार में जीत को लेकर कोई ढिलाई नहीं बरतना चाहती। यह भी स्पष्ट है कि पीएम मोदी की सक्रियता के साथ भाजपा अपने कोर वोट बैंक को मजबूत करने और undecided voters को साधने की रणनीति पर काम कर रही है।
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बीजेपी की रणनीति—बूथ से लेकर विधानसभा तक संगठन मजबूत करने की बड़ी प्लानिंग
बिहार विधानसभा की 243 सीटों पर दो चरणों—6 और 11 नवंबर—को मतदान होना है, जबकि मतगणना 14 नवंबर को की जाएगी। सत्तारूढ़ राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सीट बंटवारे पर अंतिम मोहर लगने की उम्मीद जताई जा रही है। जे.पी. नड्डा और अमित शाह सहित भाजपा और एनडीए के वरिष्ठ नेता लगातार बैठकों में जुटे हुए हैं। इसके विपरीत विपक्षी INDIA गठबंधन अब भी सीट बंटवारे को लेकर उलझन में फंसा हुआ है। राजद, कांग्रेस, वामदलों और वीआईपी के बीच सहमति बनने में देरी साफ दिख रही है। ऐसे समय में प्रधानमंत्री मोदी की सक्रियता बिहार चुनावी मुकाबले को और अधिक रोचक बना रही है और इसे ‘मोदी बनाम महागठबंधन’ की सीधी जंग के रूप में देखा जा रहा है।
























