अवैध खनन, पर्यावरणीय नुकसान और जनसुरक्षा के मुद्दे उठाते हुए खदान संचालन पर रोक की मांग
मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन तेज करने की चेतावनी
जेबी लाइव, रिपोर्टर
पटमदा : पटमदा प्रखंड अंतर्गत ओड़िया पंचायत के ग्रामीणों ने ओड़िया मौजा में संचालित पत्थर खदान के विरोध में मंगलवार को उपायुक्त कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन किया। बड़ी संख्या में ग्रामीण पारंपरिक हथियारों के साथ जिला मुख्यालय पहुंचे और प्रशासन को ज्ञापन सौंपते हुए खनन कार्य पर तत्काल रोक लगाने की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि ओड़िया मौजा के लायाडीह, चिरूडीह और ओड़िया टोला क्षेत्र में खाता संख्या 624 के प्लॉट संख्या 4546 की 10 एकड़ तथा प्लॉट संख्या 988 की 8 एकड़ भूमि के विरुद्ध पिछले करीब 20 वर्षों से निर्धारित क्षेत्र से कई गुना अधिक भूमि पर अवैध पत्थर खनन किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे पर्यावरण को गंभीर क्षति पहुंच रही है और स्थानीय लोगों के जीवन एवं आजीविका पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है।
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विद्यालय, धार्मिक स्थल और बिजली लाइन के पास खनन से बढ़ी चिंता
ग्रामीणों ने प्रशासन को बताया कि खदान क्षेत्र के आसपास विद्यालय, आवासीय मकान और धार्मिक स्थल गौराम थान स्थित हैं। इसके अलावा लायाडीह गांव के बीच से 11 हजार वोल्ट की विद्युत लाइन भी गुजरती है। ऐसे में खनन और ब्लास्टिंग के दौरान किसी भी समय बड़ा हादसा होने की आशंका बनी रहती है। ग्रामीणों का आरोप है कि ग्रामसभा की सहमति के बिना खदान संचालन की प्रक्रिया को आगे बढ़ाया जा रहा है, जो स्थानीय अधिकारों और नियमों का उल्लंघन है। उन्होंने कहा कि लगातार होने वाली ब्लास्टिंग, धूल और प्रदूषण के कारण बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़ रहा है तथा क्षेत्र का प्राकृतिक वातावरण भी प्रभावित हो रहा है।
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धूल, प्रदूषण और ब्लास्टिंग से प्रभावित हो रहा जनजीवन
प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि जनहित और पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्रस्तावित पत्थर खदान की स्वीकृति पर तत्काल रोक लगाई जाए। साथ ही पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर अवैध खनन गतिविधियों को बंद कराया जाए और दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। ग्रामीणों ने कहा कि खनन के कारण कृषि भूमि, पेयजल स्रोत और पर्यावरणीय संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन को चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों ने एकजुटता का परिचय देते हुए अपने अधिकारों और क्षेत्र की सुरक्षा के लिए संघर्ष जारी रखने का संकल्प भी दोहराया।























