स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग पर अड़े आंदोलनकारी, खदान क्षेत्र में बढ़ा दबाव
500 युवाओं को रोजगार देने की मांग पर अड़े ग्रामीण
सीजीएम स्तर के अधिकारी से वार्ता की मांग, प्रस्ताव को बताया नाकाफी
उत्पादन ठप होने से बढ़ी प्रबंधन की चिंता, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
गुवा खदान क्षेत्र में आंदोलन के कारण प्रभावित हुआ लौह अयस्क उत्पादन
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : गुवा सेल खदान क्षेत्र में स्थानीय युवाओं को रोजगार देने की मांग को लेकर शुरू हुआ अनिश्चितकालीन चक्का जाम आंदोलन मंगलवार को लगातार दूसरे दिन भी जारी रहा। कई गांवों के मुंडा-मानकी संघ के बैनर तले चल रहे इस आंदोलन के कारण खदान क्षेत्र की उत्पादन और परिवहन व्यवस्था पूरी तरह प्रभावित रही। लौह अयस्क उत्पादन, क्रशर प्लांट संचालन तथा परिवहन कार्य लगभग ठप हो गया, जिससे सेल प्रबंधन पर लगातार दबाव बढ़ता जा रहा है। आंदोलन स्थल पर बड़ी संख्या में ग्रामीण, मजदूर और मुंडा-मानकी प्रतिनिधि डटे रहे। आंदोलनकारियों का कहना है कि स्थानीय युवाओं को रोजगार देने में लगातार उपेक्षा की जा रही है, जबकि खदानों से करोड़ों रुपये का मुनाफा कमाया जा रहा है।
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स्थानीय रोजगार की मांग को लेकर खदान क्षेत्रों में बढ़ रहे आंदोलन
आंदोलनकारियों ने साफ कहा कि जब तक स्थानीय 500 युवाओं को सम्मानजनक रोजगार, हटाए गए मजदूरों की बहाली, हैंड माइनिंग और मैनुअल रैक लोडिंग शुरू करने तथा 75 प्रतिशत स्थानीय लोगों को रोजगार देने पर ठोस निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन समाप्त नहीं होगा। आंदोलनकारी नेता मंगता सुरीन ने बताया कि आंदोलन के दूसरे दिन भी सेल प्रबंधन का कोई वरिष्ठ अधिकारी वार्ता के लिए स्थल पर नहीं पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रबंधन केवल समय बिताने की रणनीति अपना रहा है। मंगलवार शाम लगभग तीन बजे तक किसी प्रकार की औपचारिक वार्ता नहीं हुई थी। केवल अधिकारी डॉ. टी.सी. आनंद द्वारा फोन कर जानकारी दी गई कि वे और सीएसआर अधिकारी अनिल कुमार बातचीत के लिए आ सकते हैं।
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रोजगार और पुनर्बहाली की मांग को लेकर ग्रामीणों का बढ़ता आक्रोश
आंदोलनकारियों ने स्पष्ट कहा कि वे केवल सीजीएम स्तर के अधिकारी के साथ ही वार्ता करेंगे और अब केवल मौखिक आश्वासन नहीं बल्कि लिखित और ठोस निर्णय चाहते हैं। मंगता सुरीन ने बताया कि उन्हें जानकारी मिली है कि सेल प्रबंधन पहले 25 लोगों को रोजगार देने की बात कर रहा था, जिसे अब बढ़ाकर 40 करने का प्रस्ताव दिया गया है। बताया जा रहा है कि यह रोजगार मां सरला ठेका कंपनी के अधीन दिया जाएगा। हालांकि आंदोलनकारियों ने इस प्रस्ताव को पूरी तरह नाकाफी बताते हुए कहा कि आंदोलन केवल 40 लोगों की नौकरी के लिए नहीं, बल्कि सैकड़ों स्थानीय बेरोजगार युवाओं के भविष्य के लिए किया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि स्थानीय लोगों को ठेका कंपनियों के भरोसे छोड़ने के बजाय सेल प्रबंधन को स्थायी और सम्मानजनक रोजगार उपलब्ध कराना चाहिए।
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ठेका व्यवस्था के विरोध में स्थानीय संगठनों की आवाज हुई तेज
लगातार दूसरे दिन जारी आंदोलन का असर गुवा खदान क्षेत्र के उत्पादन पर साफ दिखाई दिया। लौह अयस्क उत्पादन बाधित रहने से कई विभागों का काम प्रभावित हुआ, वहीं भारी वाहनों की आवाजाही भी पूरी तरह बंद रही। आंदोलनकारियों का आरोप है कि खदानों से भारी मुनाफा कमाने वाली कंपनियां स्थानीय युवाओं को रोजगार देने से बच रही हैं। इसी कारण अब गांव-गांव से लोग आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। आंदोलनकारी नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द सकारात्मक पहल नहीं हुई तो आंदोलन को और व्यापक किया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति उत्पन्न होने पर इसकी पूरी जिम्मेदारी सेल प्रबंधन और प्रशासन की होगी। क्षेत्र में जारी इस आंदोलन को लेकर लोगों की नजर अब प्रबंधन और प्रशासन की अगली कार्रवाई पर टिकी हुई है।























