प्रबंधन, प्रशासन और यूनियनों के बीच वार्ता के बाद बनी सहमति, पुरानी व्यवस्था रहेगी जारी
आंदोलन समाप्त होने के बाद खदानों में सामान्य होने लगा कामकाज
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : सेल की लौह अयस्क खदानों में बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर चल रहा श्रमिक आंदोलन सोमवार देर शाम सकारात्मक मोड़ पर पहुंच गया। रात करीब 7 बजे प्रबंधन, प्रशासन और संयुक्त यूनियनों के बीच हुई महत्वपूर्ण बैठक में सहमति बनी कि फिलहाल बायोमेट्रिक व्यवस्था लागू नहीं की जाएगी। बैठक में यह निर्णय लिया गया कि जब तक बायोमेट्रिक प्रणाली से संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है और अंतिम फैसला नहीं आ जाता, तब तक सेल की खदानों में पुरानी पंचिंग कार्ड एवं हाजिरी व्यवस्था ही जारी रहेगी। प्रबंधन की ओर से यह आश्वासन मिलने के बाद संयुक्त यूनियनों ने अपना आंदोलन समाप्त करने की घोषणा कर दी। इसके बाद श्रमिकों ने राहत की सांस ली और रात्रि पाली से पुनः अपने-अपने कार्यस्थलों के लिए रवाना हो गए।
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न्यायालय के अंतिम फैसले तक पुरानी हाजिरी प्रणाली जारी रखने पर बनी सहमति
इससे पहले सोमवार को गुवा स्थित एचआरडी भवन में प्रबंधन, प्रशासन और संयुक्त यूनियनों के बीच कई दौर की वार्ता हुई थी। प्रारंभिक दौर की बातचीत में कोई ठोस निष्कर्ष नहीं निकलने पर संयुक्त यूनियनों ने बैठक का बहिष्कार कर दिया था। यूनियन नेताओं ने स्पष्ट कहा था कि जब तक न्यायालय का अंतिम निर्णय नहीं आ जाता, तब तक बायोमेट्रिक व्यवस्था किसी भी स्थिति में लागू नहीं होने दी जाएगी। बैठक में किरीबुरू के एसडीपीओ विनीत कुमार किंडो भी मौजूद रहे। उन्होंने सभी पक्षों से न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान करने और आपसी संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की अपील की। यूनियन प्रतिनिधियों ने कहा कि वे न्यायालय और कानून का सम्मान करते हैं, लेकिन मामला मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के समक्ष विचाराधीन होने के कारण अंतिम आदेश आने तक पुरानी व्यवस्था जारी रहनी चाहिए।
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वार्ता के कई दौर के बाद निकला विवाद का समाधान
गौरतलब है कि सोमवार की पहली पाली से किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया लौह अयस्क खदानों के हजारों श्रमिकों ने बायोमेट्रिक प्रणाली के माध्यम से उपस्थिति दर्ज कराने से इनकार कर दिया था। इसके कारण उत्पादन, लोडिंग, परिवहन और अन्य खनन गतिविधियां प्रभावित हुई थीं। यूनियनों का आरोप था कि कर्मचारियों की सहमति और स्पष्ट दिशा-निर्देश के बिना नई व्यवस्था लागू करने का प्रयास किया जा रहा है। हालांकि देर शाम हुई सहमति के बाद फिलहाल विवाद शांत हो गया है और खदानों में कामकाज सामान्य होने लगा है। अब सभी की निगाहें न्यायालय और मुख्य श्रम आयुक्त के अंतिम निर्णय पर टिकी हुई हैं, जो भविष्य में बायोमेट्रिक व्यवस्था के क्रियान्वयन की दिशा तय करेगा।






















