सीआईआई झारखंड मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव में उद्योग
सरकार और विशेषज्ञों ने साझा किया वैश्विक प्रतिस्पर्धा एवं सतत औद्योगिक विकास का रोडमैप
150 से अधिक प्रतिभागियों ने साझा किया झारखंड के औद्योगिक भविष्य का विजन
जेबी लाइव, रिपोर्टर
जमशेदपुर : भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) झारखंड द्वारा आयोजित 7वें झारखंड मैन्युफैक्चरिंग कॉन्क्लेव में राज्य के औद्योगिक विकास, तकनीकी नवाचार और हरित विनिर्माण के भविष्य पर व्यापक चर्चा हुई। “विनिर्माण में परिवर्तनः नेतृत्व, प्रौद्योगिकी एवं हरित विकास” विषय पर आयोजित इस कॉन्क्लेव में उद्योग जगत के दिग्गजों, सरकारी अधिकारियों, तकनीकी विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और नीति निर्माताओं ने भाग लेकर झारखंड को देश के अग्रणी विनिर्माण केंद्र के रूप में विकसित करने की रणनीतियों पर विचार-विमर्श किया। कार्यक्रम में इंडस्ट्री 4.0, कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), डिजिटल परिवर्तन, सतत विकास तथा एमएसएमई की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि बदलती वैश्विक अर्थव्यवस्था में प्रतिस्पर्धात्मक बने रहने के लिए उद्योगों को पारंपरिक उत्पादन प्रणाली से आगे बढ़कर स्मार्ट और पर्यावरण-अनुकूल विनिर्माण मॉडल अपनाने होंगे।
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झारखंड के औद्योगिक विकास में तकनीक और नवाचार की बढ़ती भूमिका

सीआईआई झारखंड राज्य परिषद के अध्यक्ष एवं वैदेही मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड के निदेशक दिलू बिपिन पारिख ने कहा कि झारखंड के विनिर्माण क्षेत्र की दीर्घकालिक सफलता नवाचार, डिजिटल परिवर्तन, अनुसंधान एवं विकास तथा सतत विकास को अपनाने पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि राज्य को केवल उत्पादन केंद्र नहीं बल्कि नवाचार और उन्नत इंजीनियरिंग के केंद्र के रूप में भी विकसित करना होगा। वहीं सीआईआई झारखंड मैन्युफैक्चरिंग पैनल के संयोजक और टाटा मोटर्स के प्लांट हेड ऑपरेशंस अनुराग छारिया ने कहा कि मैन्युफैक्चरिंग 4.0 का युग तकनीक आधारित निर्णय, परिचालन उत्कृष्टता और पर्यावरणीय जिम्मेदारी से संचालित होगा। उन्होंने उद्योगों, सरकार, शिक्षण संस्थानों और तकनीकी साझेदारों के बीच मजबूत सहयोग को भविष्य के औद्योगिक विकास की अनिवार्य शर्त बताया।
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मैन्युफैक्चरिंग 4.0 और एआई से बदल रही उद्योगों की कार्यशैली
कॉन्क्लेव में ईएसएल के निदेशक डीआईपी संजीव तिवारी ने कहा कि विनिर्माण क्षेत्र का भविष्य केवल उत्पादन क्षमता से नहीं बल्कि सुरक्षा, दक्षता, डेटा आधारित निर्णय और सतत विकास से निर्धारित होगा। उन्होंने बताया कि एआई, इंटरनेट ऑफ थिंग्स (आईओटी), डिजिटल ट्विन, डेटा एनालिटिक्स और प्रिडिक्टिव मेंटेनेंस जैसी तकनीकें उद्योगों को स्मार्ट फैक्ट्री मॉडल की ओर तेजी से ले जा रही हैं। उन्होंने कहा कि आज सतत विकास केवल अनुपालन का विषय नहीं बल्कि व्यावसायिक रणनीति का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है। उद्योगों को संसाधनों के जिम्मेदार उपयोग, ऊर्जा दक्षता और पर्यावरण-अनुकूल प्रक्रियाओं को अपनाकर प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त हासिल करनी होगी। विशेषज्ञों ने इस बात पर भी बल दिया कि डेटा-संचालित विनिर्माण मॉडल आने वाले वर्षों में औद्योगिक सफलता का आधार बनेंगे।
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स्मार्ट फैक्ट्री मॉडल और हरित उद्योगों की ओर बढ़ता झारखंड
उद्योग जगत के दृष्टिकोण को प्रस्तुत करते हुए सीआईआई झारखंड राज्य परिषद के उपाध्यक्ष एवं टाटा स्टील के उपाध्यक्ष (कॉर्पोरेट सर्विसेज) डी.बी. सुंदरा रामम ने कहा कि झारखंड की समृद्ध खनिज संपदा और मजबूत औद्योगिक आधार उसे राष्ट्रीय विनिर्माण विकास का प्रमुख केंद्र बना सकते हैं। उन्होंने कहा कि भारत के विकसित राष्ट्र बनने के लक्ष्य में विनिर्माण क्षेत्र की महत्वपूर्ण भूमिका होगी। इसके लिए डीकार्बोनाइजेशन, ऊर्जा दक्षता, कुशल मानव संसाधन, मजबूत आपूर्ति श्रृंखला और तकनीकी उन्नयन पर विशेष ध्यान देना होगा। उन्होंने उद्योगों से नवाचार को बढ़ावा देने तथा आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण के बीच संतुलन स्थापित करने का आह्वान किया। वक्ताओं ने यह भी कहा कि वैश्विक बाजार की चुनौतियों का सामना करने के लिए उद्योगों को अधिक लचीला, तकनीक-सक्षम और टिकाऊ बनाना आवश्यक है।
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उद्योग-सरकार साझेदारी से मजबूत होगा विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र
झारखंड सरकार के उद्योग विभाग के अंतर्गत जियाडा एवं जियिडको के प्रबंध निदेशक वरुण रंजन ने कहा कि राज्य पूर्वी भारत के प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने गुणवत्तापूर्ण आधारभूत संरचना, औद्योगिक भूमि, विश्वसनीय बिजली, कुशल लॉजिस्टिक्स और मजबूत एमएसएमई नेटवर्क को औद्योगिक प्रतिस्पर्धा की रीढ़ बताया। कॉन्क्लेव में विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञों ने नेतृत्व, नवाचार, तकनीकी परिवर्तन और सतत विकास पर अपने विचार साझा किए। कार्यक्रम का समापन इस संकल्प के साथ हुआ कि यहां प्राप्त सुझावों और विचारों को व्यावहारिक पहलों में बदलकर झारखंड को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी विनिर्माण हब बनाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि कॉन्क्लेव के सातवें संस्करण में 150 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और राज्य के औद्योगिक भविष्य को नई दिशा देने वाले कई महत्वपूर्ण सुझाव सामने आए।
























