बसों की कमी से सैकड़ों बच्चों की पढ़ाई प्रभावित, ग्रामीणों ने उठाई आवाज
जेबी लाइव, रिपोर्टर
गुवा : नक्सल प्रभावित सारंडा क्षेत्र के करमपदा, थोलकोबाद समेत आसपास के गांवों में स्कूली बच्चों की शिक्षा व्यवस्था एक बार फिर गंभीर संकट के दौर से गुजर रही है। लंबे समय से स्कूल बसों की कमी और स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा की सुविधा नहीं होने से नाराज ग्रामीणों एवं स्कूली बच्चों ने गुरुवार को करमपदा में सेल किरीबुरू प्रबंधन की स्कूल बस रोककर विरोध-प्रदर्शन किया। यह दूसरी बार है जब ग्रामीणों ने अपनी मांगों को लेकर इस तरह का आंदोलन किया है। प्रदर्शन में शामिल लोगों ने स्पष्ट कहा कि जब तक बच्चों के लिए पर्याप्त परिवहन सुविधा और बेहतर शैक्षणिक व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जाती, उनका आंदोलन जारी रहेगा। ग्रामीणों का आरोप है कि कई बार जनप्रतिनिधियों, प्रशासन और सेल प्रबंधन को समस्या से अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इसका सबसे अधिक नुकसान क्षेत्र के बच्चों को उठाना पड़ रहा है, जिनकी नियमित पढ़ाई प्रभावित हो रही है।
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बसों की कमी बनी बच्चों की शिक्षा में सबसे बड़ी बाधा

ग्रामीण प्रतिनिधि देवधारी कुमार ने बताया कि वर्तमान में सेल प्रबंधन की ओर से केवल दो स्कूल बसें संचालित की जा रही हैं। इन बसों के माध्यम से करमपदा, थोलकोबाद सहित लगभग 15 गांवों के बच्चे किरीबुरू स्थित विभिन्न विद्यालयों में पढ़ने जाते हैं। प्रत्येक बस में करीब 80 बच्चे सफर करते हैं और क्षमता पूरी होने के बाद चालक सुरक्षा कारणों से अतिरिक्त बच्चों को बस में नहीं बैठाता। परिणामस्वरूप प्रतिदिन कई छात्र-छात्राएं स्कूल पहुंचने से वंचित रह जाते हैं। ग्रामीणों के अनुसार सारंडा के अधिकांश गांवों में उच्च विद्यालय की सुविधा उपलब्ध नहीं है, जिसके कारण बच्चों को 25 से 40 किलोमीटर दूर किरीबुरू जाकर शिक्षा प्राप्त करनी पड़ती है। लंबी दूरी, सीमित बस सेवा और कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण विद्यार्थियों की पढ़ाई पर लगातार प्रतिकूल असर पड़ रहा है।
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ग्रामीणों ने रखीं तीन प्रमुख मांगें, आंदोलन तेज करने की चेतावनी
प्रदर्शन के दौरान ग्रामीणों और अभिभावकों ने तीन प्रमुख मांगें प्रशासन और सेल प्रबंधन के समक्ष रखीं। उन्होंने सीएसआर योजना के तहत तत्काल एक अतिरिक्त स्कूल बस उपलब्ध कराने, करमपदा स्कूल को 10वीं कक्षा तक उत्क्रमित करने तथा थोलकोबाद स्कूल को 8वीं कक्षा तक विकसित करने की मांग की। ग्रामीणों ने सांसद, विधायक, जिला प्रशासन और सेल प्रबंधन से अविलंब हस्तक्षेप करने की अपील की। साथ ही चेतावनी दी कि यदि जल्द समाधान नहीं निकाला गया तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा। उनका कहना है कि नक्सल प्रभावित सारंडा के समग्र विकास की सबसे मजबूत नींव शिक्षा है। यदि बच्चों को समय पर विद्यालय पहुंचने और उच्च शिक्षा प्राप्त करने की सुविधा नहीं मिलेगी तो क्षेत्र का भविष्य प्रभावित होगा। ग्रामीणों ने दोहराया कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी प्रकार का समझौता स्वीकार नहीं किया जाएगा।























