फुलडुंगरी में आयोजित कार्यक्रम में सामाजिक, राजनीतिक और बौद्धिक वर्ग ने रखे विचार
जेबी लाइव, रिपोर्टर
घाटशिला : फुलडुंगरी स्थित बाबा तिलका माझी भवन में झारखंडी भाषा भाषी मूलनिवासी संघ की ओर से झारखंड में प्रस्तावित परिसीमन को लेकर एक महत्वपूर्ण चर्चा-परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में जनप्रतिनिधियों, सामाजिक एवं राजनीतिक कार्यकर्ताओं, शिक्षकों, छात्र नेताओं, बुद्धिजीवियों, अधिवक्ताओं, पत्रकारों तथा जागरूक नागरिकों ने भाग लिया। वक्ताओं ने परिसीमन के संभावित प्रभावों पर विस्तार से चर्चा करते हुए इसके सामाजिक, राजनीतिक और संवैधानिक पहलुओं पर अपने विचार व्यक्त किए। परिचर्चा के दौरान यह भी विचार किया गया कि परिसीमन का प्रभाव विशेष रूप से अनुसूचित जनजाति और अनुसूचित जाति समुदायों के राजनीतिक प्रतिनिधित्व पर किस प्रकार पड़ सकता है।
इसे भी पढ़ें : Gua : किरीबुरू-बड़ाजामदा मुख्य मार्ग पर विशाल पेड़ गिरा, घंटों बाधित रहा यातायात
राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को सौंपा जाएगा ज्ञापन
परिचर्चा में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि झारखंडी भाषा भाषी मूलनिवासी संघ की ओर से राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री को ज्ञापन सौंपा जाएगा। ज्ञापन के माध्यम से यह मांग की जाएगी कि परिसीमन से जुड़े किसी भी निर्णय में आरक्षित पंचायतों के जनप्रतिनिधियों, विधायक, सांसद, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति समुदाय, परंपरागत स्वशासन व्यवस्था के प्रतिनिधियों तथा कॉलेजों के छात्र-छात्राओं की भागीदारी सुनिश्चित की जाए। संघ के केंद्रीय अध्यक्ष संजय बेहरा ने कहा कि कार्यक्रम के दौरान प्राप्त सुझावों को संकलित कर जल्द ही व्यापक रणनीति तैयार की जाएगी तथा इस विषय पर आगे भी जनजागरण कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे।
इसे भी पढ़ें : Gua : राष्ट्रीय हस्तकरघा दिवस को लेकर गुवा पान तांती समाज सक्रिय, प्रभात फेरी से होगा कार्यक्रम का शुभारंभ
आरक्षित सीटों में कमी हुई तो होगा विरोध : वक्ता
संघ के केंद्रीय प्रवक्ता रामचन्द्र सोरेन ने कहा कि यदि परिसीमन के बाद आरक्षित सीटों की संख्या जनसंख्या के अनुपात में बढ़ती है तो उसका स्वागत किया जाएगा, लेकिन यदि आरक्षित सीटों में कमी आती है तो इसे पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के अधिकारों पर आघात माना जाएगा और इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा। वहीं माझी परगना महल के देश विचार सचिव बहादुर सोरेन ने कहा कि सरकार अब तक पेसा कानून के अनुरूप मानकी-मुंडा, ढोकलो पड़हा, माझी महाल सहित आदिवासी स्वशासन व्यवस्था के लिए आवश्यक प्रशासनिक नियमावली लागू नहीं कर सकी है। झारखंड आंदोलनकारी सुराई बास्के ने कहा कि झारखंड आंदोलन के लंबे संघर्ष के बाद राज्य को आदिवासी नेतृत्व मिला है और परिसीमन के कारण आरक्षित सीटों में कमी आना आंदोलन की मूल भावना के विपरीत होगा।
इसे भी पढ़ें : Dumaria : धोलाबेडा-बारदागोडा सड़क पर युवाओं का श्रमदान, गड्ढे भर प्रशासन को जगाने की कोशिश
सभी प्रखंडों में चलाया जाएगा जनजागरण अभियान
संघ के जिला अध्यक्ष एवं पूर्व प्रत्याशी आनन्द हेम्ब्रम ने कहा कि परिसीमन को लेकर पूर्वी सिंहभूम जिले के सभी प्रखंडों में चर्चा-परिचर्चा कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे, ताकि आम लोगों की राय लेकर आगे की रणनीति तय की जा सके। कार्यक्रम में समाजसेवी कृष्णा बास्के, पूर्व विधायक प्रत्याशी इंद्र मुर्मू, शिक्षक राम दुलार टुडू, आदिवासी छात्र संघ के पूर्व प्रत्याशी मनसा राम हांसदा, जिला अध्यक्ष अजीत मुर्मू सहित कई वक्ताओं ने अपने विचार रखे। कार्यक्रम को सफल बनाने में मुकेश कर्मकार, प्रकाश मुखी, संजय नायक, सुनील मुखी, मनोज मुखी, महेश करूवा, सुन्दर टुडू, सुजाता मंडी एवं मंगल टुडू सहित संघ के सदस्यों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वक्ताओं ने कहा कि परिसीमन जैसे महत्वपूर्ण विषय पर व्यापक जनभागीदारी और संवाद ही लोकतांत्रिक प्रक्रिया को मजबूत बना सकता है।